शेख हसीना को फांसी की सजा, ICT ने कहा- निहत्थे प्रदर्शनकारियों को मारा, अपराध मानवता के खिलाफ

बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी-बीडी) ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने हसीना को फांसी की सजा सुनाई है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि हमने मानवाधिकार संगठन और अन्य संगठनों की कई रिपोर्ट्स पर विचार किया है। हमने क्रूरताओं का विवरण भी दिया है। शेख हसीना ने मानवता […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 17 नवंबर 2025, 08:14 AM 6 मिनट read
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शेख हसीना को फांसी की सजा, ICT ने कहा- निहत्थे प्रदर्शनकारियों को मारा, अपराध मानवता के खिलाफ
Photo: UB India News Archive

बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी-बीडी) ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने हसीना को फांसी की सजा सुनाई है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि हमने मानवाधिकार संगठन और अन्य संगठनों की कई रिपोर्ट्स पर विचार किया है। हमने क्रूरताओं का विवरण भी दिया है। शेख हसीना ने मानवता के खिलाफ अपराध किए। ट्रिब्यूनल ने फैसले में यह भी कहा है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मारे गए हैं। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा है कि अवामी लीग के कार्यकर्ता कथित रूप से सड़कों पर उतर आए और पार्टी नेतृत्व की पूरी जानकारी में सुनियोजित हमले किए।

हसीना को दी गई फांसी की सजा

ट्रिब्यूनल ने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व की ओर से दिए गए सीधे आदेशों की वजह से प्रदर्शनकारियों और अन्य नागरिकों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हुआ। मामले में अभियोजकों ने दोषी के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि हसीना सरकार की ओर से आदेश के बाद 15 जुलाई से 15 अगस्त के बीच ‘विद्रोह’ के दौरान 1,400 लोग मारे गए थे। 11 हजार से अधिक लोग हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए थे।

शेख हसीना ने जारी किया बयान

कोर्ट के फैसले से पहले शेख हसीना का बयान भी सामने आ गया था। अपने बयान में उन्होंने सभी आरोपों को पूरी तरह से झूठा बताया था। हसीना ने एक ऑडियो संदेश में कहा- “हमने इस तरह के हमलों और मामलों को बहुत देखा है। मुझे परवाह नहीं है, अल्लाह ने मुझे जीवन दिया है और एक दिन मेरी मौत आएगी, लेकिन मैं देश के लोगों के लिए काम कर रही हूं और ऐसा करना जारी रखूंगी। हमारे संविधान के अनुच्छेद 7 (बी) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अगर कोई निर्वाचित प्रतिनिधियों को बलपूर्वक सत्ता से हटाता है, तो उसे दंडित किया जाएगा। यूनुस ने यही (मुझे बलपूर्वक सत्ता से हटाया) किया। अगर कोई अदालत में झूठी शिकायत करता है, तो उस पर कानून के तहत मुकदमा चलता है और एक दिन ऐसा होगा ही।” उन्होंने पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से सजा के बारे में चिंता ना करने को कहा है।

 

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में, जहां आम तौर पर सोमवा की सुबह जाम रहती है, वहां आज जागने पर लगभग खाली सड़कें दिखीं, भारी पुलिस वाले चौराहों पर केवल छिटपुट कारें और रिक्शा ही चल रहे थे. लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा, शहर में छिटपुट हिंसा की घटनाएं हुईं. प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को ब्लॉक करने के लिए पेड़ों की टहनियां और टायर जलाए, जबकि ढाका में कई देशी बम विस्फोटों से आसपास के इलाके दहल गए.

कुछ समूह बुलडोजर के साथ ढाका के 32 धानमंडी पहुंचे हैं. यह शेख हसीना के पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान का पैतृक घर है. फिलहाल घटनास्थल पर पुलिस मौजूद है. पुलिस के रोकने के बावजूद समूह नारे लगा रहा है और कह रहा है कि वे इस घर को तोड़ देंगे. इससे पहले भी पिछले साल के विद्रोह के बीच इसे तबाह करने की कोशिश हुई थी. शेख हसीना ने एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में 32 धनमंडी के विषय पर एनडीटीवी से बात की है. उन्होंने कहा, “मेरे पिता के ऐतिहासिक निवास का विनाश बांग्लादेश के इतिहास से आजादी के लिए हमारी कड़ी लड़ाई की विरासत को मिटाने का एक बर्बर प्रयास था. सत्ता में बैठे लोग हमारे मुक्ति संग्राम की भावना को मिटाना चाहते हैं. यह उन लोगों की यादों का घोर अपमान है जिन्होंने हमारे भविष्य के लिए अपनी जान दे दी.”

वहीं देश के कई अन्य हिस्सों से भी ऐसी ही हिंसा की खबरें आ रही हैं.

आज शेख हसीना पर आएगा फैसला

शेख हसीना, अपदस्थ अवामी लीग सरकार में उनके गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल और तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक या पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून पर न्यायाधिकरण में मुकदमा चलाया गया है. पूर्व प्रधानमंत्री और कमाल पर उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया गया और अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया.

ICT-BD के मुख्य अभियोजक मोहम्मद ताजुल इस्लाम ने पहले आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी. पूर्व पुलिस प्रमुख ने व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर मुकदमे का सामना किया लेकिन वह सरकारी गवाह बन गए.

ICT-BD अध्यक्ष न्यायमूर्ति मोहम्मद गुलाम मुर्तजा मजूमदार ने मामले में जब फैसला सुनाने की तारीख तय की तब मामून कटघरे में खड़े दिखायी दिए. इस न्यायाधिकरण ने 28 कार्य दिवसों के बाद 23 अक्टूबर को मामले की सुनवाई पूरी की, जब 54 गवाहों ने अदालत के समक्ष गवाही दी कि किस प्रकार पिछले वर्ष ‘जुलाई विद्रोह’ नामक छात्र आंदोलन को दबाने के प्रयास किए गए थे, जिसने पांच अगस्त 2024 को हसीना की अब भंग हो चुकी अवामी लीग सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंका था.

राजधानी ढाका में 13 नवंबर को तीन न्यायाधीशों वाले न्यायाधिकरण ने फैसला सुनाने के लिए 17 नवंबर की तारीख तय की थी.

शेख हसीना और उनके सहयोगियों पर 5 आरोप 

  1. आरोप नंबर 1- आरोपियों पर हत्या, हत्या की कोशिश, यातना देने का आरोप है। चार्जशीट में कहा गया है कि हसीना ने पुलिस और अवामी लीग से जुड़े हथियारबंद लोगों को आम नागरिकों पर हमला करने के लिए उकसाया। इसे बढावा दिया और हिंसा रोकने में नाकाम रहे।
  2. आरोप नंबर 2- हसीना ने छात्र प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए घातक हथियार, हेलिकॉप्टर और ड्रोन इस्तेमाल करने का आदेश दिया।
  3. आरोप नंबर 3- 16 जुलाई को बेगम रौकेया यूनिवर्सिटी के छात्र अबू सैयद की हत्या से जुड़ा है। आरोप में कहा गया है कि हसीना और अन्य ने इस हत्या के आदेश दिए, इसके लिए साजिश रची और अपराध में शामिल रहे।
  4. आरोप नंबर 4- 5 अगस्त को ढाका के चांखारपुल में छह निहत्थे प्रदर्शनकारियों की हत्या कर दी गई। यह भी कहा गया है कि यह हत्या हसीना के सीधे आदेश, उकसावे, मदद, साजिश की वजह से हुई।
  5. आरोप नंबर 5- इस आरोप में 5 प्रदर्शनकारियों को गोली मारकर हत्या करने और एक को घायल करने की बात है। आरोप है कि उन 5 मारे गए लोगों की लाशें जला दी गईं, और एक प्रदर्शनकारी को जिंदा जला दिया गया।
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