क्या अल फलाह यूनिवर्सिटी पर लगेगा ताला!

दिल्‍ली के लाल किला के सामने हुए ब्‍लास्‍ट के तार जिस अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं, क्‍या उसमें ताला लग जाएगा? इस ब्‍लास्‍ट का सुसाइड बॉम्‍बर डॉक्‍टर उमर नबी इसी अल-फलाह यूनिवर्सिटी में काम करता था. इस यूनिवर्सिटी से जुड़े कई और डॉक्‍टर भी दिल्‍ली ब्‍लास्‍ट मामले से जुड़ हैं. वहीं, यूनिवर्सिटी के बैंक अकाउंट्स में […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 21 नवंबर 2025, 06:16 AM 9 मिनट read
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क्या अल फलाह यूनिवर्सिटी पर लगेगा ताला!
Photo: UB India News Archive

दिल्‍ली के लाल किला के सामने हुए ब्‍लास्‍ट के तार जिस अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं, क्‍या उसमें ताला लग जाएगा? इस ब्‍लास्‍ट का सुसाइड बॉम्‍बर डॉक्‍टर उमर नबी इसी अल-फलाह यूनिवर्सिटी में काम करता था. इस यूनिवर्सिटी से जुड़े कई और डॉक्‍टर भी दिल्‍ली ब्‍लास्‍ट मामले से जुड़ हैं. वहीं, यूनिवर्सिटी के बैंक अकाउंट्स में भी कई झोल सामने आए हैं. ऐसे में हरियाणा के फरीदाबाद में स्थिति अल-फलाह यूनिवर्सिटी के भविष्‍य पर सवाल खड़ा हो गया है. अगर ये यूनिवर्सिटी बंद होती है, तो सैकड़ों छात्रों का भविष्‍य अधर में लटक सकता है. हरियाणा सरकार आज इस यूनिवर्सिटी के पर कोई फैसला ले सकती है.

निर्दोष छात्रों की शिक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा’

हरियाणा सरकार अल-फलाह यूनिवर्सिटी के भाग्य का फैसला आज कर सकती है. यह यूनिवर्सिटी हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत आती है. एनएमसी राज्य और केंद्र सरकार दोनों से प्राप्त सूचनाओं की समीक्षा के बाद अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के भविष्य का फैसला करेगी. दिल्‍ली बम धमाके और फरीदाबाद में मिलने विस्‍फोटक की जांच इस कॉलेज पर ही केंद्रित है.  राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने आश्वासन दिया है कि निर्दोष छात्रों की शिक्षा और करियर पर कोई असर नहीं पड़ेगा और वह नए दिशानिर्देश जारी करने की योजना बना रही है, जिसमें चिकित्सा संस्थानों और डॉक्टरों से सामाजिक जिम्मेदारी निभाने और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों से बचने का आग्रह किया जाएगा.

छात्रों को कहीं शिफ्ट… 

एनएमसी ने साफ कहा है कि जो भी कार्रवाई होगी, उसका असर मेडिकल छात्रों के भविष्य पर किसी भी तरीके से नहीं पड़ेगा. आयोग ने आश्वासन दिया है कि मेडिकल छात्रों की पढ़ाई, इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन जैसी चीजों को भविष्य में सुरक्षित रखने के लिए सभी महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे. एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि नए सत्र में दाखिला के लिए छात्रों को कहीं और शिफ्ट करने पर विचार किया जा रहा है. इसके लिए बड़े स्तर पर एनएमसी में बैठकों का दौर जारी है. उन्होंने ये भी कहा कि आने वाले समय में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग सभी मेडिकल कॉलेजों और डॉक्टर्स के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगा कि वे कार्यस्थल पर किसी भी तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शमिल नहीं हों

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विस्फोट के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मुजम्मिल गनई, अदील राथर और शाहीना सईद के साथ-साथ मौलवी इरफान अहमद वागे को गिरफ्तार कर लिया था. NIA के एक प्रवक्ता ने कहा, “इन सभी ने आतंकवादी हमले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसमें कई निर्दोष लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हुए थे.” उनकी हिरासत एनआईए को सौंपे जाने के साथ ही केंद्रीय एजेंसी द्वारा आरोपित लोगों की संख्या छह हो गई है. एनआईए ने 11 नवंबर को आधिकारिक तौर पर इस मामले को अपने हाथों में लिया था. एनआईए पहले ही दो लोगों आमिर राशिद अली और जसीर बिलाल वानी उर्फ ​​दानिश को गिरफ्तार कर चुकी है. डॉ. उमर-उन-नबी विस्फोटकों से भरी कार चला रहा था और उसने अली के नाम पर कार कथित तौर पर खरीदी थी. इस धमाके में 15 लोगों की मौत हुई थी.

200 डॉक्टर शक के घेरे में, SIT को कमान…

दिल्ली में कार ब्लास्ट और 3 राज्यों में फैले व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की जांच में कई एजेंसियां जुटी हुई हैं. इसी बीच, फरीदाबाद पुलिस ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की गतिविधियों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. यूनिवर्सिटी के कई डॉक्टरों को हाल ही में गिरफ्तार किया गया था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने एक कैब ड्राइवर, एक मौलवी और एक उर्दू शिक्षक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है.

यूनिवर्सिटीज की गतिविधियों की जांच

 

सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने पूछताछ के लिए एक कैब ड्राइवर, एक मौलवी और एक उर्दू टीचर को हिरासत में लिया है. SIT, जिसमें दो असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, एक इंस्पेक्टर और दो सब-इंस्पेक्टर शामिल हैं, यूनिवर्सिटी की एक्टिविटीज़ पर एक पूरी रिपोर्ट तैयार कर रही है. फरीदाबाद पुलिस के एक स्पोक्सपर्सन ने कहा, “फरीदाबाद में अल फलाह यूनिवर्सिटी के मामलों की जांच के लिए एक SIT बनाई गई है, सभी पहलुओं पर गौर किया जाएगा.”

एसआईटी में कौन-कौन शामिल

एसआईटी में दो सहायक पुलिस आयुक्त, एक निरीक्षक और दो उप निरीक्षक हैं. यह विश्वविद्यालय की गतिविधियों पर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार कर रही है. फरीदाबाद पुलिस के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘अल फलाह विश्वविद्यालय फरीदाबाद की गतिविधियों की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया गया है। सभी पहलुओं की जांच की जाएगी.” फरीदाबाद के पुलिस आयुक्त सतेंद्र कुमार गुप्ता ने एसआईटी को निर्देश दिया कि वह विश्वविद्यालय में आतंकवाद का गढ़ बनने के बारे में जांच करे.

रडार पर अल-फलाह के 200 से ज्यादा डॉक्टर

पुलिस सूत्रों ने बताया कि एसआईटी ऐसे समय में गठित की गई है जब पुलिस महानिदेशक ओ.पी. सिंह ने मंगलवार को अल फलाह विश्वविद्यालय का दौरा करने के बाद कहा था कि पुलिस आयुक्त और उपायुक्त को खुद उस जगह का दौरा करना चाहिए. पुलिस सूत्रों के अनुसार इस जांच के दौरान एजेंसियों के रडार पर अब अल-फलाह यूनिवर्सिटी के 200 से ज्यादा डॉक्टर हैं. जांच एजेंसियां इस यूनिवर्सिटी के कुछ स्टॉफ से भी पूछताछ करने की तैयारी में हैं. पुलिस को जानकारी मिली है कि धमाके वाले दिन ही कई डॉक्टर एकाएक इस यूनिवर्सिटी को छोड़कर चले गए थे.

क्या पता लगाने में जुटी जांच एजेंसियां

जांच एजेंसियां अब इस बात का भी पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि आखिर दिल्ली में हुए धमाके के बाद कितने डॉक्टर व अन्य स्टॉफ ने एकाएक यूनिवर्सिटी छोड़कर गए थे.कहा जा रहा है कि जांच में पता चला है कि कई लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने इस धमाके के बाद अपने मोबाइल का डेटा भी डिलीट किया था. अब जांच एजेंसियों इन लोगों के लैपटॉप और फोन की जांच कर इस बात का पता लगाने की कोशिशों में जुटी हैं कि आखिर इनमें कौन से ऐसे डेटा थे जिन्हें धमाके के ठीक बाद डिलीट किया गया था.

अल-फलाह का टेरर कनेक्शन

दिल्ली ब्लास्ट के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी सुर्खियों में है. दिल्ली में 10 नवंबर को ब्लास्ट करने वाला आत्मघाती आतंकी डॉ उमर उन नबी अल फलाह से जुड़ा पहला आतंकी नहीं था. 2008 में अहमदाबाद में सीरियल बम धमाके हुए थे, इसमें शामिल आतंकी मिर्जा शादाब बेग भी अल-फलाह यूनिवर्सिटी का ही छात्र है. उसने 2007 में फरीदाबाद के अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन में बीटेक पूरा किया था और 2008 में अहमदाबाद में होने वाले सीरियल ब्लास्ट में शामिल रहा. यानी पढ़ाई के दौरान ही हमले की तैयारी में था. सालों से यह फरार है. अभी इसके अफगानिस्तान में होने की खबर है.

AK 47 के कारतूस, हैंडग्रेनेड…

जम्मू और कश्मीर में बड़े पैमाने में कई जगहों पर छापेमारी की जा रही है. एजेंसियां टेरर मॉड्यूल की परतों को खोलने में लगी हुई हैं. जम्मू और कश्मीर में कई जगहों पर अभी भी छापेमारी की जा रही है. ताजा छापेमारी कश्मीर टाइम्स के मुख्यालय पर की गई. तलाशी अभियान के दौरान हथियार, गोला-बारूद और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं. जम्मू कश्मीर पुलिस की राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) के एक प्रवक्ता ने कहा कि इस तलाशी अभियान को उन आरोपों के बाद शुरू किया गया था कि यह प्रकाशन देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है.

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एसआईए ने एक बयान में कहा कि जम्मू के रेजीडेंसी रोड पर मौजूद कश्मीर टाइम्स के कार्यालय में की गई छापेमारी और तलाशी में एक रिवॉल्वर, ए.के.-सीरीज़ के हथियारों के कई कारतूस व खोखे, चार ग्रेनेड सेफ्टी लीवर और पिस्तौल के तीन कारतूस बरामद किये गए.  जांच अभी जारी है, और सामने आए सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. वहीं, कश्मीर टाइम्स के प्रबंधन ने प्रकाशन के जम्मू कार्यालय में कथित छापे की कड़ी आलोचना की और कहा कि राज्य के खिलाफ गतिविधियों के आरोप एक स्वतंत्र मीडिया संस्थान को दबाने की एक सोची-समझी कोशिश है.

डॉक्टरों के लॉकरों की जांच

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दूसरी और जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर और अनंतनाग जिले में अधिकारियों ने एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों और चिकित्साकर्मियों के लॉकरों की जांच की है. अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को शुरू किया गया यह अभियान हाल ही में दिल्ली में हुए विस्फोट और ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल में हथियारों और गोला-बारूद की बरामदगी के बाद चाक-चौबंद सुरक्षा उपायों के तहत किया गया है.

जम्मू, कठुआ और सांबा में सुरक्षा अभ्यास

सुरक्षा बलों ने सतर्कता बढ़ाने के मकसद से जम्मू, कठुआ और सांबा जिलों में भारत-पाकिस्तान सीमा और अंदरूनी इलाकों में बृहस्पतिवार को सुरक्षा अभ्यास किया. अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने कठुआ जिले के मारहीन और कोरेपन्नू गांवों में, सांबा जिले में सादोह और अरंगल गांवों के बीच तथा जम्मू के चौकी चौरा इलाके में तलाशी अभियान चलाया. अधिकारियों के अनुसार, जम्मू कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी), सीमा पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा संयुक्त तलाशी अभियान का उद्देश्य भारत-पाकिस्तान सीमा के पास सुरक्षा को मजबूत करना और सतर्कता बढ़ाना था.

 

 

बता दें कि इस छापेमारी की शुरुआत अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज से शुरू हुई थी. जहां पर एक लॉकर से AK-47 राइफल बरामद की गई थी. यह राइफल डॉ. आदिल अहमद राठर की थी. डॉ. आदिल अहमद राठर से जब पूछताछ की गई तो डॉक्टरों के टेरर मॉड्यूल का खुलासा हुआ था. जांच फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी पहुंची और यहां से कई डॉक्टरों के पकड़ा गया. इसी दौरान दिल्ली के लाल किले के पास धमाका भी हुआ.

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