पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को क्यों लिखा खत !

श्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने गुरुवार को राज्य में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को रोकने की मांग करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेटर लिखा। उन्होंने SIR प्रक्रिया को जबरदस्ती थोपने वाली और खतरनाक बताया है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया में बहुत गड़बड़ियां हैं। ममता ने चुनाव […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 21 नवंबर 2025, 06:32 AM 7 मिनट read
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पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को क्यों लिखा खत !
Photo: UB India News Archive

श्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने गुरुवार को राज्य में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को रोकने की मांग करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेटर लिखा। उन्होंने SIR प्रक्रिया को जबरदस्ती थोपने वाली और खतरनाक बताया है।

उन्होंने कहा कि प्रक्रिया में बहुत गड़बड़ियां हैं। ममता ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त ट्रेनिंग, गाइडलाइन और तैयारी के SIR को लागू किया जा रहा है, जिससे BLO और लोगों दोनों पर दबाव बन रहा है।

उन्होंने दावा किया कि कई BLO टीचर, फ्रंटलाइन वर्कर और दूसरे नियमित कर्मचारी हैं, जिन्हें एक साथ घर-घर सर्वे और ऑनलाइन फॉर्म भरने जैसे काम भी करने पड़ रहे हैं। उन्होंने इसे इंसानी क्षमता से ज्यादा का दबाव बताया।

इधर, पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर तैनात BSF ने दावा किया है कि राज्य में SIR प्रक्रिया के बाद से बॉर्डर पार करने की कोशिश करने वाले अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ गई है। रोज 150 से ज्यादा अवैध बांग्लादेशी लौट रहे हैं।

दूसरी तरफ बीजेपी ने इसे ममता बनर्जी की “हताशा” करार दिया है. पार्टी का दावा है कि SIR से मतदाता सूची की सफाई हो रही है और फर्जी वोटरों की पहचान के बाद TMC पूरी तरह घबरा गई है. प्रवीण भंडारी और अमित मालवीय जैसे नेताओं ने ममता पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि यह पत्र TMC नेतृत्व के “घबराहट और चिंता” का साफ संकेत है.

BJP का पलटवार- TMC डरी हुई है, SIR ने असलियत उजागर कर दी

BJP नेताओं ने एक-एक कर जवाब दिया और TMC को घबराया हुआ बताया. प्रदीप भंडारी ने कहा, “TMC की टॉप लीडरशिप बुरी तरह हिल चुकी है.” उन्होने आरोप लगाते हुए कहा, TMC ने सालों तक “फर्जी वोटरों” से फायदा उठाया. SIR फर्जी एंट्री हटाकर मतदाता सूची साफ कर रहा है.
सीएम ममता बनर्जी के आरोपों पर बीजेपी विधायक शंकर घोष ने कहा कि सीएम बनर्जी आदतन झूठ बोलती हैं. उनके इस तरह के बेबुनियाद आरोपों के खिलाफ चुनाव आयोग को जांच शुरू करनी चाहिए. क्योंकि हमारे देश के 12 राज्यों में SIR का काम चल रहा है और इनमें से किसी भी राज्य में कोई घटना सामने नहीं आई है, लेकिन बंगाल में हमारी मुख्यमंत्री लगातार SIR से बचने की कोशिश कर रही हैं.ऐसा करना उन्हें शोभा नहीं देता.

बीजेपी नेता शिशिर बाजोरिया ने क्या कहा?

बजोरिया ने विधाननगर विधानसभा क्षेत्र में प्रसारित एक कथित निर्देश की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिसमें पार्ट-133 के मतदाताओं को सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे के बीच फॉर्म भरकर, परिवार के सभी सदस्यों के मूल मतदाता पहचान पत्र और आधार कार्ड लेकर सत्यापन के लिए एक सामुदायिक भवन में आने का निर्देश दिया गया है.

पत्र में लिखा है कि पार्ट-133 के बीएलओ और बीएलए सामुदायिक भवन में मौजूद रहेंगे. परिवार का कोई एक सदस्य सभी के मूल मतदाता पहचान पत्र और आधार कार्ड लेकर आएगा, जो सत्यापन के बाद वापस कर दिए जाएंगे. बीजेपी नेता ने दावा किया कि संबंधित सामुदायिक भवन ‘‘तृणमूल के एक मंत्री और नगरपालिका अध्यक्ष के नियंत्रण में” है और उन्होंने एसआईआर में राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया. उन्होंने मांग की कि निर्वाचन आयोग कोलकाता के पास विधाननगर में लगे शिविर से शुरुआत करते हुए, राजनीतिक रूप से आयोजित ऐसे सभी एसआईआर शिविरों को तुरंत बंद करे. बीजेपी के इन आरोपों पर अब तक चुनाव आयोग या टीएमसी की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

TMC के शिविरों में BLO पर अवैध SIR का आरोप

इस बीच बीजेपी ने टीएमसी पर ही गंभीर आरोप लगाए हैं. बीजेपी ने मंगलवार को चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए कहा कि टीएमसी के कंट्रोल वाले सामुदायिक भवनों से बीएलओ अवैध एसआईआर कर रहे हैं. उन्होंने ऐसे शिविरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की. बीजेपी ने दावा किया कि यह कवायद पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की निष्पक्षता का उल्लंघन है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को जलपाईगुड़ी के माल क्षेत्र में एक बूथ स्तर अधिकारी (BLO) की मौत पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि SIR ने क्षेत्र के कर्मचारियों पर ‘अमानवीय’ दबाव डाल दिया है, जिसकी वजह से अब तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है. सीएम बनर्जी ने दावा किया कि मृत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बीएलओ के रूप में काम कर रही थी. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की एसआईआर की कवायद के ‘असहनीय दबाव’ के चलते उसने आत्महत्या कर ली.

ममता बनर्जी के लेटर की मुख्य बातें…

  • जरूरी डॉक्यूमेंट्स में अस्पष्टता, सर्वर की समस्याएं और ऑनलाइन फॉर्म में बार-बार डेटा मिसमैच जैसी परेशानियां BLO के काम को प्रभावित कर रही हैं।
  • इस समय राज्य में धान कटाई और रबी की बुआई चल रही है, इसलिए लाखों किसान खेतों में व्यस्त हैं। ऐसे में SIR में उनकी भागीदारी मुश्किल है और ग्रामीण कामकाज प्रभावित हो रहा है।
  • मुख्यालय नोटिस तो जारी कर रहा है, लेकिन न तो बैठक कर रहा है और न ठीक से बात। ऊपर से BLO को अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी दी जा रही है, इसके चलते कर्मचारी डरे हुए हैं।
  • जलपाईगुड़ी की एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की कथित रूप से आत्महत्या कर ली, इसे लोग SIR के काम के दबाव से जोड़ रहे हैं। प्रक्रिया शुरू होने के बाद ऐसे और मामले भी सामने आए हैं।

BSF का दावा- रोजाना 100 से ज्यादा बांग्लादेशी लौट रहे

BSF के एक अधिकारी के मुताबिक नॉर्थ 24 परगना, मुर्शिदाबाद और मालदा में बॉर्डर के बिना फेंसिंग वाले हिस्सों से लौटने की कोशिश कर रहे बांग्लादेशी इमीग्रेंट्स के फ्लो में क्वांटम जंप देखा गया है।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक BSF अधिकारी ने बताया कि पहले ऐसे मामले मुश्किल से डबल डिजिट में आते थे। अब यह आंकड़ा हर दिन लगातार तीन डिजिट में है।

बॉर्डर पर तैनात BSF के जवानों ने कहा कि चेक पोस्ट पर छोटे बैग और सामान लेकर लोगों की लाइन लग रही है, जो खुलेआम मान रहे हैं कि वे बांग्लादेशी हैं और सालों पहले गैर-कानूनी तरीके से भारत में आए थे।

अवैध बांग्लादेशियों की अचानक बढ़ोतरी से BSF और स्टेट पुलिस पर प्रेशर बढ़ गया है, जिन्हें बॉर्डर के दोनों तरफ हर पकड़े गए व्यक्ति का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, पूछताछ और क्रिमिनल बैकग्राउंड चेक करना होता है।

9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 51 करोड़ वोटरों में से 50.35 करोड़ से ज्यादा लोगों को वोटर लिस्ट के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत फॉर्म मिल गए हैं।

SIR या पुलिस वेरिफिकेशन ड्राइव के दौरान पकड़े जाने का डर

BSF अधिकारियों ने कहा कि वापस जाने की कोशिश करने वाले लोगों के पास कोई वैलिड ट्रैवल पेपर्स नहीं हैं। सिर्फ वही लोग गैर-कानूनी तरीके से घुसने की कोशिश करते हैं जिनके पास डॉक्यूमेंट्स नहीं होते। कई लोग सालों पहले आए थे, ज्यादा समय तक रुके। अब SIR या पुलिस वेरिफिकेशन ड्राइव के दौरान पकड़े जाने से डरते हैं।

BSF के मुताबिक अवैध बांग्लादेशियों की इतनी बड़ी संख्या ने लॉजिस्टिक मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। कोई भी एजेंसी हजारों लोगों को लंबे समय तक हिरासत में नहीं रख सकती।

वेरिफिकेशन के बाद, अगर उनका कोई क्रिमिनल हिस्ट्री नहीं है, तो BGB- बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के साथ कोऑर्डिनेट करना और उनकी वापसी में मदद करना ही इकलौता ऑप्शन है।

 

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