न्यूक्लियर सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों के लिए खुलेंगे नए रास्ते…………….

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को संसद के शीतकालीन सत्र में पारित शांति बिल 2025 को मंजूरी दे दी है. शांति बिल का पूरा नाम सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) है. इसी के साथ अब प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को भी इस सेक्टर में कई मौके मिलेंगे और सरकार का एकाधिकार […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 22 दिसंबर 2025, 08:43 AM 4 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
न्यूक्लियर सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों के लिए खुलेंगे नए रास्ते…………….
Photo: UB India News Archive

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को संसद के शीतकालीन सत्र में पारित शांति बिल 2025 को मंजूरी दे दी है. शांति बिल का पूरा नाम सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) है. इसी के साथ अब प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को भी इस सेक्टर में कई मौके मिलेंगे और सरकार का एकाधिकार खत्म होगा. इस बिल को पास कराने का एक मकसद साल 2047 तक 100 GW न्यूक्लियर एनर्जी के लक्ष्य को हासिल करना है, जिसे सरकारी कंपनियां अपने अकेले के दम पर हासिल नहीं कर पाएंगी. इसके लिए प्राइवेट कंपनियों की भी मदद चाहिए होगी.

बता दें कि मौजूदा समय में Atomic Energy Act, 1962 के तहत सिर्फ केंद्र सरकार और उसकी स्वामित्व वाली कंपनियों को ही न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाने और इसे चलाने का अधिकार है. प्राइवेट कंपनियों को इसमें दखल देने की अनुमति नहीं है. लेकिन अब नए शांति बिल के साथ Atomic Energy Act, 1962 और Civil Liability for Nuclear Damage Act, 2010 को रद्द किया जा रहा है. इससे न्यूक्लियर एनर्जी को कंट्रोल करने के बारे में कानूनी फ्रेमवर्क में सुधार होगा. इससे सेक्टर में नए निवेश के रास्ते खुलेंगे और तकनीकि सहयोग का भी सहारा मिलेगा.

न्यूक्लियर सेक्टर पर अडानी ग्रुप की नजर

इसी क्रम में एशिया के दूसरे सबसे अमीर आदमी और बिजनेस टायकून गौतम अडानी की अगुवाई वाला अडानी ग्रुप अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर्स और उन्हें सपोर्ट करने के लिए जरूरी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बढ़ाने की तैयारी में है. उनके छोटे बेटे जीत अडानी ने निक्केई एशिया को बताया है कि डेटा सेंटरों की डिमांड तेजी से बढ़ रही है और भारत अभी कम खर्च और एनर्जी नियमों में हाल के बदलावों के चलते  AI डेटा सेंटर्स बनाने के लिए अच्छी स्थिति में है. इससे देश को नैचुरल फायदा होगा.

डेटा सेंटरों की क्यों बढ़ रही डिमांड

ऑनलाइन खरीदारी से लेकर डिजिटल पेमेंट, तमाम तरह के ऐप्स और ऑनलाइन वीडियोज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से भारत में डेटा की डिमांड तेजी से बढ़ती जा रही है. नतीजतन, डेटा सेंटर की भी डिमांड बढ़ रही है.

चूंकि, डेटा सेंटर 24*7 चालू रहते हैं इसलिए इन्हें बड़े पैमाने पर बिजली की जरूरत पड़ती है इसलिए कंपनियां न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाकर बेसलोड पावर की अपनी जरूरतें पूरा कर सकती हैं और चूंकि यह क्लीन एनर्जी का एक बड़ा सोर्स है इसलिए इससे ग्रीनहाउस गैस कम होगी और यह पर्यावरण के लिए बेहतर साबित होगा. न्यूक्लियर सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों के आने से निवेश बढ़ेगा, प्रोजेक्ट्स तेजी से पूरे होंगे, प्रोडक्शन जल्दी शुरू होगा, रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स पर निर्भरता बढ़ेगी, रोजगार बढ़ेंगे, बिजली की अधिक जरूरतें पूरी होंगी.

अडानी ग्रुप का क्या है प्लान?

बताया जा रहा है अडानी ग्रुप AI डेटा सेंटर की बढ़ती बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने बड़े रिन्यूएबल एनर्जी बेस का इस्तेमाल करने का प्लान बना रहा है. या यूं कहें कि कंपनी न्यूक्लियर प्लांट लगाने का सोच रही है.

अडानी ग्रीन एनर्जी पहले से ही देश में सोलर और विंड पावर में सबसे आगे है. अब इसका प्लान गूगल के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर प्रोजेक्ट बनाने में 5 बिलियन डॉलर तक निवेश करने का है. जीत अडानी का कहना है कि बड़ी ग्लोबल टेक कंपनियों की जरूरत के हिसाब से उनकी कंपनी रिन्यूएबल पावर दे सकता है और फिर डिमांड के हिसाब से एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को आगे अलग-अलग चरणों में और बढ़ाया जा सकता है.

जीत अडानी ने कहा कि न्यूक्लियर एनर्जी को सालों तक नज़रअंदाज किया गया, जबकि यह लंबे समय की बिजली की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती है. इस प्लान के तहत, ग्रुप पावर प्लांट्स का मालिक होगा और उन्हें ऑपरेट करेगा, जबकि रिएक्टर का कंस्ट्रक्शन स्पेशलाइज्ड पार्टनर्स द्वारा किया जाएगा.

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰