क्या बदलने वाला है भारत का एजुकेशन सिस्टम!

उच्च शिक्षा आयोग यानी ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान’ बन जाने के बाद देश के टीचिंग संस्थानों में सुधारों की प्रक्रिया में तेजी आएगी। मौजूदा समय में टीचर एजुकेशन को रेगुलेट करने वाली नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) के पास अभी टीचिंग संस्थानों का थर्ड पार्टी ऑडिट करवाने, वित्तीय जुर्माना व चरणबद्ध कार्रवाई का अधिकार […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 23 दिसंबर 2025, 08:40 AM 4 मिनट read
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क्या बदलने वाला है भारत का एजुकेशन सिस्टम!
Photo: UB India News Archive

उच्च शिक्षा आयोग यानी ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान’ बन जाने के बाद देश के टीचिंग संस्थानों में सुधारों की प्रक्रिया में तेजी आएगी। मौजूदा समय में टीचर एजुकेशन को रेगुलेट करने वाली नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) के पास अभी टीचिंग संस्थानों का थर्ड पार्टी ऑडिट करवाने, वित्तीय जुर्माना व चरणबद्ध कार्रवाई का अधिकार नहीं है।

हालांकि डमी टीचिंग संस्थानों, डमी टीचर्स और स्टूडेंट्स की पड़ताल करने के लिए परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (PARs) को पिछले साल लागू किया गया और 3500 संस्थान संदेह के घेरे में है, इनमें से एक हजार से अधिक कोर्ट चले गए।

नया उच्च शिक्षा आयोग बनने के बाद हर टीचिंग संस्थान के स्तर की जांच के लिए एक प्रक्रिया होगी। वहीं हर कार्यक्रम व कोर्स में पढ़ाई का एक मिनिमम स्टैंडर्ड तय होगा। थर्ड पार्टी ऑडिट शुरू होने के साथ- साथ नियमों के खिलाफ जाकर काम करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई भी की जा सकेगी। वहीं छात्रों को टीचिंग संस्थानों में ही नए कोर्सेज का विकल्प भी मिलेगा। उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ाने की दिशा में यह प्रयास कारगर साबित हो सकता है।

टीचिंग संस्थानों में दूसरे कोर्सेज को चलाना आसान होगा
NCTE के चेयरमैन प्रो. पंकज अरोड़ा ने एनबीटी से बातचीत में कहा कि टीचिंग संस्थानों में अब टीचर एजुकेशन प्रोग्राम के साथ- साथ बीए, बीकॉम, बीएससी समेत स्किल एजुकेशन के दूसरे कोर्सेज भी शुरू किए जा सकेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मुताबिक 2030 तक सभी टीचिंग संस्थानों को बहुविषयक संस्थान बनना ही होगा, जिसके लिए यूजीसी और एनसीटीई ने गाइडलाइंस जारी की हैं। नए बिल के बाद संस्थानों में नये कोर्सेज को शुरू करने आसान हो जाएगा।

सिंगल एप्लीकेशन विंडो का फायदा मिलेगा
उन्होंने आगे कहा कि नए कोर्सेज के लिए मंजूरी के लिए अलग-अलग जगह आवेदन नहीं करना होगा। एक ही जगह आवेदन करने का सिस्टम लागू हो जाएगा। अभी एनसीटीई संस्थानों को मान्यता देता है, एकेडमिक स्टैंडर्ड को देखता है। इसके अलावा भी रेगुलेशंस से जुड़े कई तरह के काम होते हैं, लेकिन नए आयोग बनने के बाद एनईपी 2020 के अनुरूप टीचिंग के लिए जो प्रफेशनल स्टैंडर्ड सेटिंग बॉडी यानी PSSB होगी, उसका काम कोर्स तैयार करना, टीचिंग के नियमों और एलिजिबिलिटी तय करना और एकेडमिक स्टैंडर्ड को देखना होगा, इससे टीचिंग की गुणवत्ता पर पूरा ध्यान दिया जा सकेगा।

थर्ड पार्टी ऑडिट
NCTE के मौजूदा रेगुलेशंस में थर्ड पार्टी ऑडिट करवाने न चरणबद्ध कार्रवाई का अधिकार नहीं है। प्रो. अरोड़ा का कहना है कि थर्ड पार्टी ऑडिट के लिए कोशिशें की गई लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो सका है। लेकिन नए आयोग के जरिए संस्थानों का थर्ड पार्टी असेसमेंट होगा। साथ ही अभी जो स्थिति है, उसमें अगर कोई संस्थान नियमों को नहीं मानता तो उसकी मान्यता रद्द कर दी जाती है।

जुर्माने का भी प्रावधान
वहीं अब जुर्माने का भी प्रावधान हो जाएगा। कुछ मामलों में जुर्माना लगाकर चेतावनी दी जा सकती है जबकि अभी सिर्फ मान्यता रद्द करने का ही विकल्प मौजूद है। टीचिंग संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार के लिए नैक जैसी प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

संसदीय समिति के पास भेजा गया नए आयोग का बिल
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक सिंगल पॉइंट रेगुलेटर बनाने से जुड़े बिल ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक- 2025’ को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने की मंजूरी दी गई है। बिल में तीन परिषदों के साथ एक शीर्ष निकाय (Apex Body ) के रूप में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान की स्थापना का प्रावधान है। इसमें विकसित भारत शिक्षा विनियमन परिषद (रेगुलेटरी काउंसिल), विकसित भारत शिक्षा गुणवत्ता परिषद (Accreditation काउंसिल) और विकसित भारत शिक्षा मानक परिषद (स्टैंडर्ड काउंसिल) शामिल हैं।

अप्रेजल रिपोर्ट में 2500 डमी संस्थानों का संदेह
एनसीटीई ने इस साल 15 हजार से ज्यादा टीचिंग संस्थानों से परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (PARs) मांगी, 3500 ने रिपोर्ट नहीं दी। इनमें से 1050 संस्थान कोर्ट चले गए। वहीं 2500 संस्थान न तो कोर्ट गए और न ही एनसीटीई के पास अपील की। ऐसे में संदेह है कि कहीं ये संस्थान कागजों पर तो नहीं चल रहे थे। उच्च शिक्षा आयोग के बाद थर्ड पार्टी ऑडिट जब शुरू हो जाएगा तो हर संस्थान की सही तस्वीर सरकार व लोगों के पास होगी।

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