आखिरकार नीलाम हो गई पाकिस्तान की एयरलाइन………..

पाक‍िस्‍तान वैसे तो भारत के साथ गुस्ताखी खूब करता है. उसके प्रधानमंत्री तमाम इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर बड़ी-बड़ी डींगे हांकते हैं, लेकिन इस मुल्क का बाल-बाल कर्जे में डूबा हुआ है. पाकिस्तान कर्ज के जाल में इस कदर फंसता जा रहा है कि दोबारा लोन लेने के लिए घर के सामान तक बेचने की नौबत आ […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 24 दिसंबर 2025, 04:38 AM 7 मिनट read
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आखिरकार नीलाम हो गई पाकिस्तान की एयरलाइन………..
Photo: UB India News Archive

पाक‍िस्‍तान वैसे तो भारत के साथ गुस्ताखी खूब करता है. उसके प्रधानमंत्री तमाम इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर बड़ी-बड़ी डींगे हांकते हैं, लेकिन इस मुल्क का बाल-बाल कर्जे में डूबा हुआ है. पाकिस्तान कर्ज के जाल में इस कदर फंसता जा रहा है कि दोबारा लोन लेने के लिए घर के सामान तक बेचने की नौबत आ गई है. शहबाज शरीफ सरकार ने पहले से कई पब्लिक प्रॉपर्टी चीन और अमेरिका के पास ग‍िरवी रखी हुई है. अब उसका इंटरनेशनल एयरलाइंस भी नीलाम हो गया है.

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, शहबाज सरकार ने पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) की 75% हिस्सेदारी बेच दी है. इसके लिए 23 दिसंबर यानी आज बोली जमा करने की लास्ट डेट थी. आरिफ हबीब ग्रुप ने 4320 करोड़ रुपये में PIA को खरीद लिया है. PIA का बाकी 25% हिस्सा फिलहाल सरकार के पास ही रहेगा. इसे बाद में बेचा भी जा सकता है.

रिपोर्ट के मुताबिकपाकिस्तान की सरकार ने PIA की बिक्री के लिए 3200 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया थाहालांकिउसे 1320 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ हैआरिफ हबीब एंड कंपनीज ग्रुप पाकिस्तान में बड़ा बिजनेस हाउस हैइसमें आरिफ हबीब कॉर्पोरेशन लिमिटेडफातिमा फर्टिलाइजरसिटी स्कूल्स और लेक सिटी होल्डिंग्स कंपनी शामिल है.

आइए जानते हैं आखिर पाकिस्तान को अपने इंटरनेशनल एयरलाइंस को बेचने की नौबत क्यों आई? कौन इसके खरीदार हैं? PIA के बिकने से IMF के बेलआउट पैकेज की शर्तों से कोई कनेक्शन तो नहीं है:-


IMF ने 1.2 बिलियन डॉलर के फंड को दी मंजूरी
खस्ताहाल पाकिस्तान अपने खर्चे चलाने के लिए कभी तुर्किये से मदद मांगने लगता है, तो कभी अमेरिका और चीन की जी हजूरी करने लगता है. पाकिस्तान के हर बंदे पर औसतन 3 लाख रुपये से ज्यादा का कर्जा चढ़ चुका है. फिर भी इस मुल्क ने इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) के सामने हाथ फैलाया है. इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) ने पाकिस्तान को आर्थिक संकट से उबरने के लिए 1.2 बिलियन डॉलर (करीब 11 हजार करोड़ रुपये) के फंड को मंजूरी दी है. पाकिस्तान को यह फंडिंग 2024 में मिले एक बेलआउट प्रोग्राम का हिस्सा है, जो 37 महीनों तक चलेगा. इसमें किस्तों में उसे कुल 7 बिलियन डॉलर दिए जाने हैं. यह उसकी तीसरी किस्त है, जो पिछली यानी दूसरी किस्त के रिव्यू के बाद अप्रूव हुई है. IMF ने इसके लिए पाकिस्तान को 11 नई शर्तें पूरी करने को कहा है.

क्यों बिका PIA?
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के बिकने के पीछे सबसे बड़ी वजह IMF की पॉलिसी है. क्योंकि IMF ने अपनी 11 शर्तों में एक शर्त घाटे में चल रहीं सरकारी कंपनियों के प्राइवेटाइजेशन की रखी हैइसी शर्त के मुताबिक, पाकिस्तान अपनी 24 सरकारी कंपनियों को प्राइवेट कर रहा है. शुरुआत PIA से हो रही है.

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि यह सौदा पाकिस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा निजीकरण सौदा हो सकता है. उन्होंने इस नीलामी से PIA को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद जताई है.

खरीदारों में कौन-कौन?
बोली देने वालों में लकी सीमेंट के लीडरशिप वाला एक बिजनेस ग्रुप, आरिफ हबीब कॉरपोरेशन के लीडरशिप वाला ग्रुप और प्राइवेट एयरलाइन एयरब्लू शामिल हैं. नीलामी में पाकिस्तान फौज से जुड़ी एक कंपनी भी शामिल थी, लेकिन डेडलाइन के ठीक 2 दिन पहले फर्टिलाइजर प्राइवेट लिमिटेड (FFPL) ने बोली लगाने से अपना नाम वापस लिया.

कैसे हुई PIA की नीलामी?

  • इस्लामाबाद में मंगलवार की सुबह तीनों ग्रुप के प्रतिनिधियों ने ट्रांसपेरेंट बॉक्स में अपनी-अपनी बोली के लिफाफे डाले.
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि एयरलाइन को खरीदने के लिए आरिफ हबीब ग्रुप और लकी सीमेंट ग्रुप के बीच ओपन बिडिंग राउंड चलीलकी सीमेंट ग्रुप 4288 करोड़ रुपये तक ही बोली लगा पाईऐसे में आरिफ हबीब ग्रुप ने बोली जीत ली.

PIA पर कितना कर्ज?
2020 में कराची में PIA का एक प्लेन क्रैश हुआ था. इसमें 96 लोगों की मौत हो गई थी. जांच में PIA के 250 से ज्यादा पायलट के लाइसेंस फर्जी पाए गए थे. इस हादसे से PIA की इमेज खराब हुई. अमेरिका-ब्रिटेन समेत कई देशों ने PIA की फ्लाइट्स को बैन कर दिया था. इस बैन के चलते PIA घाटे में चलता रहा. धीरे-धीरे कंपनी पर 25 हजार करोड़ का कर्ज हो गया. आज के समय में PIA पर 80 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्जा हो चुका है. जबकि, पाकिस्तान में एविएशन सेक्टर का GDP में योगदान सिर्फ 1.3% है. पिछले साल भी सरकार ने इसे बेचने की कोशिश की थीलेकिन तब अच्छी बोली नहीं मिली. इसलिए सौदा रद्द हो गया.

PIA के बारे में जानिए

  • पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस का पुराना नाम ओरिएंट एयरवेज है.
  • एम ए इस्पहानी ने 1946 में इसकी स्थापना की थी.
  • 1955 में पाकिस्तानमें ओरिएंट एयरवेज का नेशनलाइजेशन हुआ.
  • इसके बेड़े में 32 एयरक्राफ्ट आती हैं. ATR, Airbus A320, Boeing 777 मुख्य एयरक्राफ्ट हैं.
  • PIA का 28 रूट्स पर इंटनेशनल नेटवर्क हैइसका मुख्य डेस्टिनेशन दुबईअबू धाबीजेद्दागल्फ और यूरोपीय देश हैं.

नीलामी के बाद PIA के स्टाफ की नौकरी चली जाएगी?
75% हिस्सेदारी खरीदने वाले को कर्मचारियों को कम से कम 12 महीने की जॉब गारंटी देनी होगी. पेंशन और दूसरे रिटायरमेंट फायदे सरकार की कंपनी संभालेगी, जबकि मौजूदा वेतन और सुविधाएं नए मालिक देगा.

पाकिस्तान पर कुल कितना कर्ज?
Express Tribune की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान 1958 से अब तक कुल 20 बार IMF से लोन ले चुका है. पिछले साल से अब तक पाकिस्तान को IMF से कुल 3.3 अरब डॉलर (29.65 हजार करोड़ रुपए) मिल चुके हैं. जुलाई 2025 तक पाकिस्तान पर कुल 80.6 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (25.66 लाख करोड़) का कर्ज है. इसमें घरेलू यानी देश के अंदर से लिया गया कर्ज 54.5 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (भारतीय रुपये में 17.41 लाख करोड़) और विदेशी कर्ज 26 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (भारतीय रुपये में 8.25 लाख करोड़) है.

FAQs
पाकिस्तान के हर नागरिक पर अमूमन कितना कर्ज होगा?
जून 2025 तक पाकिस्तान का कुल सार्वजनिक कर्ज 286.832 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 80.6 ट्रिलियन रुपये) हो गया है. इस हिसाब से हर नागरिक पर औसतन 3 लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज होगा. नवंबर 2025 तक पाकिस्तान की आबादी 249 मिलियन से 255 मिलियन (करीब 24.9 करोड़ से 25.5 करोड़) के बीच रहने का अनुमान है.

एयरलाइन से पहले पाकिस्तान ने और क्या-क्या बेचा है?
पाकिस्तान अपने बंदरगाहों और एयरपोर्ट को पहले ही बेच चुका है. पाकिस्तान ने पिछले साल इस्लामाबाद एयरपोर्ट को ठेके पर देने का फैसला किया था.

IMF में कितना है भारत का वोट कोटा?
IMF में भारत का वोट कोटा 2.75%. ये सदस्य देशों की तुलना में काफी कम है. जबकि पाकिस्तान का वोट कोटा महज 0.43% है. भारत का एक अलग (स्वतंत्र) प्रतिनिधि होता है, जो भारत की तरफ से IMF में अपनी बात रखता है.

SDR क्या होता है?
स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स यानी SDR, IMF का बनाया एक इंटरनेशनल रिजर्व एसेट है. इसे ‘IMF की इंटरनेशनल करेंसी’ या ‘ग्लोबल करेंसी यूनिट’ कहा जाता है.

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