अरावली केस: क्यों पलटना पड़ा सुप्रीम कोर्ट को अपना फैसला……………..

अरावली मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा दखल देते हुए अपने ही निष्कर्षों पर को स्थगित कर दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि फिलहाल उन्हें लागू नहीं किया जाएगा. शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों और अपनी ही आदेश पर रोक लगा दी है. SC अब पर्यावरण विशेषज्ञों का नया […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 29 दिसंबर 2025, 06:09 AM 10 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
अरावली केस: क्यों पलटना पड़ा सुप्रीम कोर्ट को अपना फैसला……………..
Photo: UB India News Archive

अरावली मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा दखल देते हुए अपने ही निष्कर्षों पर को स्थगित कर दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि फिलहाल उन्हें लागू नहीं किया जाएगा. शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों और अपनी ही आदेश पर रोक लगा दी है. SC अब पर्यावरण विशेषज्ञों का नया पैनल बनाएगा जो पूरे रिपोर्ट का विश्लेषण करेगा. शीर्ष अदालत ने विशेषज्ञ समिति के निष्कर्षों पर स्पष्टीकरण मांगते हुए, केंद्र और 4 अरावली राज्यों- दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात को नोटिस जारी किया है. CJI ने कहा कि हम निर्देश देते हैं कि समिति की सिफारिशें और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निष्कर्ष तब तक स्थगित रहेंगे मामले की सुनवाई 21 जनवरी, 2026 को होगी.

कोर्ट की अहम टिप्पणी 

कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट लागू होने से पहले या इस कोर्ट के फैसले को लागू करने से पहले मार्गदर्शन देने के लिए एक निष्पक्ष स्वतंत्र प्रक्रिया की जरूरत है, जिसमें इन बातों पर विचार किया जाए:

अरावली पर वो 5 सवाल 

  •  क्या अरावली की परिभाषा को 500 मीटर एरिया तक सीमित करने से एक स्ट्रक्चरल विरोधाभास पैदा होता है, जहां संरक्षण क्षेत्र छोटा हो जाता है?
  • क्या इससे गैर-अरावली क्षेत्र का दायरा बढ़ा है जहां रेगुलेटेड माइनिंग की जा सकती है?
  • क्या 100 मीटर और उससे ज्यादा के दो एरिया के बीच के गैप में रेगुलेटेड माइनिंग की अनुमति दी जाएगी और उनके बीच 700 मीटर के गैप का क्या होगा?
  • कैसे सुनिश्चित किया जाए कि इकोलॉजिकल निरंतरता बनी रहे?
  • अगर कोई महत्वपूर्ण रेगुलेटरी कमी पाई जाती है, तो क्या रेंज की स्ट्रक्चरल अखंडता बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण मूल्यांकन की आवश्यकता होगी?

विशेषज्ञों का पैनल बनेगा

CJI  सूर्यकांत ने कहा है. हम प्रस्ताव देते हैं कि विशेषज्ञ समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट का विश्लेषण करने के लिए डोमेन विशेषज्ञों की एक उच्च-शक्ति वाली विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए.

20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट को किया था स्वीकार

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के तहत बनी समिति की सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को स्वीकार कर लिया था. इसके मुताबिक..

-अरावली पहाड़ियां: ऐसी कोई भी जमीन जिसकी ऊंचाई स्थानीय भू-भाग (जमीन) से 100 मीटर या उससे अधिक हो.
-अरावली रेंज (पर्वतमाला): यदि दो या उससे अधिक ऐसी पहाड़ियां 500 मीटर के दायरे में हैं, तो उन्हें एक ही पहाड़ियों का समूह माना जाएगा.
-इन पहाड़ियों और रेंज के भीतर आने वाले सभी लैंडफॉर्म, उनकी ऊंचाई या ढलान चाहे जो हो, खनन से बाहर रहेंगे.

कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

आज यानी सोमवार की सुनवाई में सीजेआई ने कहा कि हम इसे आवश्यक मानते हैं कि समिति की सिफारिशों और इस न्यायालय के निर्देशों को फिलहाल स्थगित रखा जाए. समिति के गठन तक यह स्थगन प्रभावी रहेगा. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा कि 21 जनवरी के लिए नोटिस जारी किया जाता है.

कोर्ट ने कहा, हम यह ज़रूरी समझते हैं कि कमेटी की सिफारिशों और इस कोर्ट के निर्देशों को अभी रोक दिया जाए. कमेटी बनने तक रोक जारी रहेगी. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट ने रिपोर्ट का पूरी तरह से आकलन करने और इन सवालों की जांच करने के लिए एक हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया है. इस प्रस्तावित प्रक्रिया में उन इलाकों की डिटेल में पहचान भी शामिल होगी जिन्हें अरावली क्षेत्र से बाहर रखा जाएगा और इस बात का आकलन भी किया जाएगा कि क्या इस तरह के बाहर रखने से अरावली रेंज को नुकसान और खतरा हो सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने लिया था स्वतः संज्ञान

बता दें कि अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर उठे विवाद के बीच उच्चतम न्यायालय ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया था. सीजीआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ इस मामले की सुनवाई की, जिसमें न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायामूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल हैं.

कांग्रेस रही है हमलावर

इस मुद्दे पर कांग्रेस मोदी सरकार के खिलाफ हमलावर रही है. कांग्रेस ने राजस्थान में बीजेपी सरकार पर आरोप लगाया कि वहां भ्रष्टाचार चरम पर है और खनन को सुविधाजनक बनाने के लिए अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा में बदलाव करने के प्रयास किए जा रहे हैं. पार्टी ने कहा कि अरावली पर्वतमाला को खनन कंपनियों के हवाले करने से राज्य का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ जाएगा. उन्होंने इसे राज्य के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक बताया.

सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) की एक समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए कहा था कि दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली की रक्षा के लिए स्पष्ट और वैज्ञानिक परिभाषा बेहद जरूरी है. समिति के अनुसार, अरावली जिलों में स्थित कोई भी भू-आकृति (landform), जिसकी ऊंचाई जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक हो, उसे अरावली पहाड़ी माना जाएगा. वहीं, 500 मीटर के दायरे में स्थित दो या उससे अधिक ऐसी पहाड़ियों को मिलाकर अरावली रेंज की श्रेणी में रखा जाएगा. समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि पहाड़ी के साथ उसकी सहायक ढलानें, आसपास की भूमि और संबंधित भू-आकृतियां, चाहे उनका ढाल कितना भी हो, अरावली का हिस्सा मानी जाएंगी. इसी तरह, दो पहाड़ियों के बीच का क्षेत्र भी निर्धारित मापदंडों के अनुसार अरावली रेंज में शामिल होगा.

लंबे समय से चल रहा है मामला

सुप्रीम कोर्ट ने इस स्वत: संज्ञान मामले में 29 पन्नों का विस्तृत फैसला सुनाया था, जो लंबे समय से चल रहे टीएन गोदावर्मन थिरुमुलपद मामले से जुड़ा है. फैसले में कहा गया कि कोर और अछूते (इनवायोलेट) क्षेत्रों में खनन पर प्रतिबंध रहेगा. हालांकि, समिति की रिपोर्ट में बताए गए कुछ अपवादों को स्वीकार किया गया है. अदालत ने सतत खनन (सस्टेनेबल माइनिंग) और अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए जरूरी कदम उठाने संबंधी सिफारिशों को भी मंजूरी दी. साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अरावली क्षेत्र में उन इलाकों की पहचान करें, जहां खनन पूरी तरह प्रतिबंधित होगा और किन क्षेत्रों में विशेष और वैज्ञानिक आधार पर ही इसकी अनुमति दी जा सकती है.

हितेंद्र गांधी ने सीजेआई सूर्यकांत को लिखी थी चिट्ठी, क्‍या थी मांग?

अरावली को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का लगातार विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है. सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली स्पेशल पीठ आज 29 दिसंबर को सुनवाई करेगी. इससे पहले इसको लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता एवं वकील हितेंद्र गांधी ने सीजेआई सूर्यकांत को लेटर लिखा था और लेटर की एक कॉपी राष्ट्रपति को भेजा था. हितेंद्र गांधी ने अपने पत्र में अरावली क्षेत्र के संरक्षण से जुड़े 100 मीटर के नियम की समीक्षा की मांग की है. उनका कहना है कि केवल ऊंचाई के आधार पर तय किया गया यह नियम अरावली की कई पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण इकाइयों को संरक्षण से बाहर कर सकता है, जो भले ही संख्यात्मक ऊंचाई की सीमा पूरी न करता हो, लेकिन पर्यावरणीय दृष्टि से काफी अहम है.

अरावली पर केंद्र ने राज्‍यों को क्‍या दिया है निर्देश?

अवैध खनन पर रोक लगाने और पर्यावरण सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़े कदम के तहत केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राज्य सरकारों को अरावली में किसी भी नई माइनिंग लीज देने पर पूरी तरह से रोक लगाने का निर्देश दिया है. मंत्रालय ने कहा कि यह रोक अरावली के पूरे इलाके में समान रूप से लागू होगी, जिसमें दिल्ली से गुजरात तक की पर्वत शृंखला शामिल है. मंत्रालय ने कहा कि इसका मकसद इस पर्वत शृंखला की अखंडता को बनाए रखना और बिना रोक-टोक वाली खनन गतिविधियों को खत्म करना है. संरक्षण फ्रेमवर्क को और मजबूत करते हुए मंत्रालय ने इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन को पूरे अरावली रेंज में ऐसे और इलाकों और जोन की पहचान करने का निर्देश दिया है, जहां खनन पर रोक लगनी चाहिए.

सरकार ने विवाद पर क्या कहा?

बता दें कि हाल ही में केन्‍द्र सरकार ने राज्य सरकारों को अरावली में किसी भी प्रकार के नए खनन पट्टे देने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए। यह प्रतिबंध पूरे अरावली भूभाग पर समान रूप से लागू होता है और इसका उद्देश्य पर्वत श्रृंखला की अखंडता को संरक्षित करना है। इन निर्देशों का लक्ष्य गुजरात से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तक फैली सतत भूवैज्ञानिक श्रृंखला के रूप में अरावली की रक्षा करना और सभी अनियमित खनन गतिविधियों को रोकना है।

इसके अलावा, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद को पूरे अरावली क्षेत्र में अतिरिक्त क्षेत्रों/जोनों की पहचान करने का निर्देश दिया है। केंद्र द्वारा पहले से ही खनन के लिए प्रतिबंधित क्षेत्रों के अलावा पारिस्थितिक, भूवैज्ञानिक और भू-भाग स्तर के विचारों के आधार पर इन जगहों पर खनन प्रतिबंधित किये जाने की आवश्यकता है।

तैयार की जाएगी व्यापक योजना

संपूर्ण अरावली क्षेत्र के लिए सतत खनन हेतु एक व्यापक, विज्ञान-आधारित प्रबंधन योजना तैयार करते समय भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद को यह कार्य करने का निर्देश दिया गया है। यह योजना, संचयी पर्यावरणीय प्रभाव और पारिस्थितिक वहन क्षमता का आकलन करने के साथ-साथ पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील और संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान करेगी और बहाली एवं पुनर्वास के उपाय निर्धारित करेगी। इस योजना को व्यापक हितधारक परामर्श के लिए सार्वजनिक किया जाएगा।

केंद्र द्वारा यह प्रयास स्थानीय स्थलाकृति (किसी जगह की ज़मीन की बनावट, सतह की विशेषताओं जैसे- पहाड़, नदियां, घाटियां और ऊंचाई-नीचाई का अध्ययन या विवरण), पारिस्थितिकी और जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए, संपूर्ण अरावली क्षेत्र में खनन से संरक्षित और प्रतिबंधित क्षेत्रों के दायरे को और अधिक बढ़ाएगा।

कड़ाई से करें पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का पालन

केंद्र सरकार ने यह निर्देश भी दिया है कि पहले से ही चालू खदानों के बारे में सम्बंधित राज्य सरकारें सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप सभी पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें। पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खनन पद्धतियों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए चल रही खनन गतिविधियों को अतिरिक्त प्रतिबंधों के साथ सख्ती से विनियमित किया जाना चाहिए। केन्द्र सरकार अरावली इकोसिस्टम के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सरकार का मानना है कि मरुस्थलीकरण को रोकने, जैव विविधता के संरक्षण, जलभंडारों के पुनर्भरण और क्षेत्र के लिए पर्यावरणीय सेवाओं में अरावली की भूमिका महत्वपूर्ण है।

 

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
क्या हिजाब इस्लाम का जरूरी हिस्सा है?
खास खबर

क्या हिजाब इस्लाम का जरूरी हिस्सा है?

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि हिजाब इस्लाम का जरूरी हिस्सा नहीं है. हाई कोर्ट ने यह फैसला एक मुस्लिम लड़की की याचिका को खारिज करते हुए दिया, जिसमें उसने अपनी स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की इजाजत मांगी थी. अदालत ने कहा कि वह यह साबित करने के लिए सबूत […]

UB India News25 अग॰
पटना हाईकोर्ट का महावीरी झंडा मेला पर सख्त फैसला..
अध्यात्म

पटना हाईकोर्ट का महावीरी झंडा मेला पर सख्त फैसला..

पटना हाईकोर्ट ने धार्मिक जुलूस को लेकर एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो आस्था और कानून-व्यवस्था के बीच की सीमा को साफ करता है. कोर्ट ने कहा कि धर्म मानने और धार्मिक गतिविधियां करने का अधिकार संविधान देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी भी जुलूस या धार्मिक आयोजन को बिना शर्त अनुमति […]

UB India News22 अग॰
अगर आरोप इतने गंभीर थे, तो सीबीआई ने अब तक स्वतः संज्ञान लेते हुए कोई कार्रवाई क्यों नहीं की…
खास खबर

अगर आरोप इतने गंभीर थे, तो सीबीआई ने अब तक स्वतः संज्ञान लेते हुए कोई कार्रवाई क्यों नहीं की…

आय से अधिक संपत्ति मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिली है. राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने याचिका की कॉपी शिकायतकर्ता को सौंपने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से कहा है कि वह 20 अगस्त को […]

UB India News17 अग॰
एक व्यापक ‘डिजिटल एथिक्स कोड’ और ‘डिजिटल पेशेवर आचरण संहिता’ बनाने की मांग……………….
कानून

एक व्यापक ‘डिजिटल एथिक्स कोड’ और ‘डिजिटल पेशेवर आचरण संहिता’ बनाने की मांग……………….

वकीलों द्वारा सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल, पेशेवर नैतिकता, विज्ञापन, क्लाइंट बनाने की कोशिश और कानूनी पेशे के व्यावसायीकरण से जुड़े अहम सवाल खड़े करता है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से प्रमोशनल रील्स, पैसे कमाने वाले कानूनी कंटेंट, इन्फ्लुएंसर के साथ मिलकर काम करने, पेड विज्ञापनों और क्लाइंट बनाने के लिए […]

UB India News17 अग॰
जस्टिस वर्मा घर में मिले नोटों पर नहीं दे पाए जवाब………………
खास खबर

जस्टिस वर्मा घर में मिले नोटों पर नहीं दे पाए जवाब………………

लोकसभा की जांच समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा को दोषी ठहराया है। उनके सरकारी आवास से बिना हिसाब-किताब वाला कैश मिलने के आरोपों के बाद उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। लोकसभा की जांच समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ रिपोर्ट में कई ऐसी बातें बताईं, जिनसे उन्हें दोषी ठहराया गया। […]

UB India News12 अग॰
जज वी. कामेश्वर राव पटना हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस बनेंगे
पटना

जज वी. कामेश्वर राव पटना हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस बनेंगे

पटना हाईकोर्ट को जल्द ही नया मुख्य न्यायाधीश मिल सकता है. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस वी. कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है. 6 अगस्त को भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता में हुई कॉलेजियम की बैठक में यह फैसला लिया […]

UB India News10 अग॰
दो दशक से लंबित प्रोन्नति और वेतन विसंगति पर न्यायिक कर्मचारियों का आक्रोश, गर्दनीबाग में जुटे राज्यभर के कर्मचारी…..
पटना

दो दशक से लंबित प्रोन्नति और वेतन विसंगति पर न्यायिक कर्मचारियों का आक्रोश, गर्दनीबाग में जुटे राज्यभर के कर्मचारी…..

बिहार के व्यवहार न्यायालयों में कार्यरत न्यायिक कर्मचारियों की वर्षों से लंबित सेवा संबंधी मांगों को लेकर रविवार को पटना के गर्दनीबाग में बिहार व्यवहार न्यायालय कर्मचारी संघ के बैनर तले महत्वपूर्ण सभा आयोजित की गई। सभा में राज्यभर से जुड़े न्यायिक कर्मचारियों ने हिस्सा लिया और करीब दो दशकों से लंबित प्रोन्नति, वेतन विसंगति, […]

UB India News9 अग॰
बापू सभागार में ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर पूर्वी जोन का सम्मेलन……….
पटना

बापू सभागार में ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर पूर्वी जोन का सम्मेलन……….

पटना के बापू सभागार में शनिवार को मानव तस्करी (Human Trafficking) को लेकर पूर्वी जोन का एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में बिहार के साथ झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों के पुनर्वास और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा […]

UB India News8 अग॰
कल जेन अल्फा, बीटा आ जाएगी…………..
खास खबर

कल जेन अल्फा, बीटा आ जाएगी…………..

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक याचिकाकर्ता ने कहा कि अगर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को किसी राजनीतिक फैसले के आधार पर वापस लिया गया, तो यह भविष्य के आंदोलनों के लिए खतरनाक मिसाल बन जाएगी। उन्होंने आगाह करते हुए कहा, कल जेनरेशन अल्फा, बीटा, डेल्टा भी आएगी। याचिका में सुप्रीम कोर्ट […]

UB India News5 अग॰