मिडिल ईस्ट से दोस्ती का दिखेगाअसर !

भारत की मिडिल ईस्ट के साथ बढ़ती नजदीकी अगले एक साल में अपना असर दिखा सकती है. जिसकी वजह से भारत का एक्सपोर्ट वित्त वर्ष 2027 में 950 अरब डॉलर या उससे भी पार सकता है. निर्यातकों का कहना है कि पश्चिम एशियाई देशों के साथ फ्री ट्रेड डील्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सर्विस एवं टेक […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 2 जनवरी 2026, 08:47 AM 4 मिनट read
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मिडिल ईस्ट से दोस्ती का दिखेगाअसर !
Photo: UB India News Archive

भारत की मिडिल ईस्ट के साथ बढ़ती नजदीकी अगले एक साल में अपना असर दिखा सकती है. जिसकी वजह से भारत का एक्सपोर्ट वित्त वर्ष 2027 में 950 अरब डॉलर या उससे भी पार सकता है. निर्यातकों का कहना है कि पश्चिम एशियाई देशों के साथ फ्री ट्रेड डील्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सर्विस एवं टेक बेस्ड सेक्टर्स की मजबूती की वजह से भारत का गुड्स एंड सर्विस एक्सपोर्ट वित्त वर्ष 2026 में 840-850 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है और 2026-27 में लगभग 950 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है. हालांकि, बढ़ते टैरिफ और जलवायु परिवर्तन से जुड़े व्यापार प्रतिबंधों से निर्यात वृद्धि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण चुनौतियां आने की आशंका है.

मिडिल ईस्ट से दोस्ती लाएगी रंग

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (एफआईईओ) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि भारतीय एक्सपोर्ट के लिए सबसे बुरा दौर बीत चुका है और हमें उम्मीद है कि टेक बेस्ड सेक्टर अच्छा प्रदर्शन करेंगे. 2025-26 में निर्यात 840-850 अरब डॉलर के बीच हो सकता है, जबकि वित्त वर्ष 2027 में कुल निर्यात 950 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. निर्यातकों ने कहा कि लाल सागर संकट लगभग हल हो चुका है और उद्योग ने अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 फीसदी के भारी टैरिफ को ध्यान में रखा है. केंद्र के एक्सपोर्ट इंसेंटिच मिशन के सपोर्ट से उद्योग सफलतापूर्वक अपने प्रोडक्ट्स और मार्केट को डायवर्सिफाई कर रहा है.

क्लोथ और अपैरल इंडस्ट्री को फायदा

टीटी लिमिटेड के एमडी संजय के जैन ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच एफटीए के लागू होने और जीएसटी रिफॉर्म, क्वालिटी कंट्रोल आदेशों को हटाने और ड्यूटी फ्री कॉटन जैसे घरेलू उपायों से उद्योग में मूलभूत सुधार होने की वजह से अगले वर्ष क्लोथ और अपैरल के ओवरऑल एक्सपोर्ट 10-20 फीसदी की ग्रोथ हो सकती है. इसी प्रकार, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, जो अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी एक्सपोर्ट कैटेगिरी है में अगले वर्ष एक्सपोर्ट में मजबूत वृद्धि दर्ज करने की संभावना है; वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल-नवंबर में भारत का कुल निर्यात (वस्तु और सेवाएं) 562.13 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो एक वर्ष पूर्व के 533.16 अरब डॉलर से 5.43 फीसदी अधिक है.

अमेरिका के साथ बाइलेटरल ट्रेड पर नजर

नई दिल्ली ने 2025 में तीन महत्वपूर्ण व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया, जिनमें ब्रिटेन और ओमान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करना और न्यूजीलैंड के साथ बातचीत पूरी करना शामिल है. भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) 2026 में लागू होने की उम्मीद है. निर्यातक की उनकी उम्मीदें अमेरिका के साथ जल्द बाइलेटरल ट्रेड डील और यूरोपीय यूनियन के साथ व्यापार समझौते में प्रगति पर टिकी हैं. जिसकी वजह से वो काफी सतर्क रुख अपना रहे हैं.

एक उद्योग विशेषज्ञ ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि विदेशी व्यापार समझौतों में एक निश्चित समय सीमा होती है जिसके परिणाम अगले साल दिखेंगे. हालांकि, श्रम प्रधान क्षेत्रों पर अमेरिकी टैरिफ का असर पड़ सकता है. यूरोपीय यूनियन का मार्केट बहुत तेजी से नहीं बढ़ रहा है. मिडिल ईस्ट से निर्यात में इजाफे की उम्मीद है.

अमेरिकी टैरिफ से क्या हो रहा नुकसान

टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनु गुप्ता ने कहा कि अगला साल काफी अनिश्चित लग रहा है, जब तक कि अमेरिकी टैरिफ के मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता. खिलौनों का निर्माण मुख्य रूप से ओईएम (ओईएम) द्वारा किया जाता है, इसलिए टैरिफ के चलते कुछ कंपनियों ने खिलौने बनाने के उपकरण, जैसे कि सांचे, भारत से वियतनाम और इंडोनेशिया में ट्रांसफर कर दिए हैं.

निर्यातकों का कहना है कि भारत पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ से वस्त्र उद्योग में नए कारोबार में रुकावट आएगी, लेकिन अमेरिका के साथ 50-60 फीसदी रेगुलर कारोबार जारी रहेगा और करेंसी के मजबूत होने की उम्मीद है. इसके अलावा, एफटीए (मुक्त व्यापार समझौता) लागू होने के बाद न्यूजीलैंड से सस्ते ऊन के इंपोर्ट से घरेलू वस्त्र उद्योग को मदद मिलेगी. जानकारों के अनुसार भारत अपने कई नए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) साझेदारों से कच्चा माल खरीदेगा, जिससे उलटे शुल्क ढांचे की चिंताएं दूर हो जाएंगी.

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