हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने सीबीआई से कहा है कि वह इस मामले में अपना जवाब दाखिल करे. इसके बाद अदालत मामले की अगली सुनवाई करेगी. आईआरसीटीसी घोटाले का मामला रेलवे से जुड़े एक टेंडर और होटलों के संचालन से संबंधित है. यह मामला उस समय का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे. सीबीआई ने इस मामले में जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया था.
अब इस केस की अगली सुनवाई 14 जनवरी को होगी. उस दिन हाईकोर्ट सीबीआई के जवाब और लालू यादव की दलीलों को सुनकर आगे का फैसला करेगा. इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजर बनी हुई है.
आरोप है कि रेलवे के होटल का ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया और बदले में लालू प्रसाद यादव के परिवार को सस्ती कीमत पर कीमती जमीन दिलाई गई. जांच एजेंसियों का मानना है कि इससे सरकार को नुकसान हुआ और कुछ निजी लोगों व एक राजनीतिक परिवार को फायदा मिला. इसी कारण सीबीआई और ईडी ने इसे भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला माना है.
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे.
रांची और पुरी के दो रेलवे होटल पहले आईआरसीटीसी को दिए गए, फिर इन्हें निजी कंपनी सुजाता होटल्स को लीज पर दिया गया.
एजेंसियों का आरोप है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव कर सुजाता होटल्स को फायदा पहुंचाया गया.
आरोप है कि पटना की एक कीमती जमीन राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को बाजार भाव से काफी कम कीमत पर दी गई.
लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, कुछ आईआरसीटीसी अधिकारी और निजी कारोबारी आरोपी हैं.
अक्टूबर 2025 में ट्रायल कोर्ट ने आरोप तय किए. लालू यादव ने इसे दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है और मामला अभी विचाराधीन है.








