मुंबई नगर निगम चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक साबित होने जा रहा ……………….

मुंबई नगर निगम चुनाव में मेयर पद को लेकर राज्य की सियासत गरमा गई है. महायुति जहां ‘हिंदू मेयर’ और महाविकास अघाड़ी-MNS ‘मराठी मेयर’ का दावा कर रही है, वहीं, अब एआईएमआईएम (AIMIM) नेता वारिस पठान ने ‘मुस्लिम महिला मेयर’ के पद का मुद्दा उठाया है. धारावी में एक पब्लिक मीटिंग में बोलते हुए उन्होंने […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 5 जनवरी 2026, 08:30 AM 5 मिनट read
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मुंबई नगर निगम चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक साबित होने जा रहा ……………….
Photo: UB India News Archive

मुंबई नगर निगम चुनाव में मेयर पद को लेकर राज्य की सियासत गरमा गई है. महायुति जहां ‘हिंदू मेयर’ और महाविकास अघाड़ी-MNS ‘मराठी मेयर’ का दावा कर रही है, वहीं, अब एआईएमआईएम (AIMIM) नेता वारिस पठान ने ‘मुस्लिम महिला मेयर’ के पद का मुद्दा उठाया है. धारावी में एक पब्लिक मीटिंग में बोलते हुए उन्होंने बीजेपी पर कड़े शब्दों में हमला बोला और कहा कि हमारा सपना है कि कलमा पढ़ने वाली मुस्लिम महिला मुंबई की मेयर बने. इस तरह से बीएमसी चुनाव में ‘उत्तर भारतीय बनाम मराठी’ से ‘आई लव महादेव’ या ‘आई लव मोहम्मद’ मेयर की लड़ाई तेज हो गई है.

राज्य में 29 नगर निगम के चुनाव का बिगुल बज चुका है और 15 जनवरी, 2026 को मतदान होगा. इस चुनाव में सबसे करीबी मुकाबला मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में देखने को मिल रहा है और चुनाव से पहले ही ‘मेयर’ पद को लेकर राजनीतिक लड़ाई अपने चरम पर पहुंच गई है.

मुंबई में क्या बना है कोई मुस्लिम मेयर?

मराठी, हिंदी भाषी और मुस्लिम मेयर को लेकर महाराष्ट्र की सियासत गरमाई हुई है. यदि हम मुंबई नगर निगम के इतिहास में झांकते हैं तो पाते हैं कि यहां छह मुस्लिम मेयर रह चुके हैं. प्रसिद्ध इतिहासकार रामचंद्र गुहा मुंबई के मुस्लिम सोशलिस्ट मेयर यूसुफ मेहरअली को याद करते हुए लिखते हैं कि यहां छह मुस्लिम मेयर रह चुके हैं, पहला मुस्लिम मेयर 1934 में बना था और आखिरी मुस्लिम मेयर 1963 में बना था, हालांकि उसके बाद कोई मुस्लिम मेयर नहीं बना है.

वह लिखते हैं कि यूसुफ मेहरअली अप्रैल 1942 में बॉम्बे के मेयर चुने गए. उसी साल अगस्त में महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया. मेयर के तौर पर, मेहरअली को महात्मा गांधी का औपचारिक स्वागत किया था.

मुंबई नगर निगम में ब्रिटिश काल के दौरान सबसे पहले मेयर 1931 से 1932 तक सर जेबी बोमन-बेहराम थे. देश जब स्वतंत्र हुआ था, उस समय 1946 से 1947 तक एमआईएम रौजी और 1947 से 1948 के दौरान एपी सबावाला मुंबई के मेयर थे. वहीं, 1948 से 1949 तक डॉ एमयू मस्कारेन्हास और 1949 से 1952 तक एसके पाटिल मेयर थे.

विधायक रईस शेख ने विधानसभा में बहस के दौरान मुंबई के मेयर पर कहा, “मुंबई किसी की नहीं है. सभी जातियों और धर्मों के लोगों ने इसकी ग्रोथ में योगदान दिया है. अगर हम 1931 से मेयरों की लिस्ट देखें, तो हमें जेबी बोमन, एचएम रहीमतुल्लाह, वाईजे मेहर अली, एसपी सबावाला, ईए बंदूकवाला, एयूमेमन और एसकेपाटिल जैसे नाम मिलते हैं, जिनका मुंबई के विकास में इतिहास में अहम योगदान रहा है.”

मुस्लिम महिला को मेयर बनने की वारिस पठान की मांग

वारिस पठान ने कहा कि अगर कोई मुस्लिम राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और चीफ जस्टिस बन सकता है, तो कोई मुस्लिम महिला मेयर क्यों नहीं बन सकती? वारिस पठान ने कहा कि यह बयान संविधान और लोकतंत्र दोनों के खिलाफ है. हमारा सपना है कि एक दिन कलमा पढ़ने वाली कोई मुस्लिम महिला मुंबई की मेयर बनेगी.

वारिस पठान ने कहा कि मुझे बताओ, जो व्यक्ति कहता है कि ‘मुझे महादेव’ पसंद हैं, वह मेयर बन सकता है, तो हिजाब पहनने वाली और कलमा पढ़ने वाली मुस्लिम महिला मेयर क्यों नहीं बन सकती? मेयर पद को लेकर जहां एमएनएस और बीजेपी के बीच पहले से ही विवाद चल रहा है. इस बीच वारिश पठान ने इस विवाद में कूट पड़ी है.

उत्तर भारतीय को मेयर बनाने की उठी थी मांग

इससे पहले बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री कृपाशंकर सिंह ने दावा किया था कि मुंबई का मेयर उत्तर भारतीय होगा. उन्होंनेे कहा था कि चुनाव में इतनी बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय नगरसेवक का निर्वाचन होगा कि महानगरपालिका में उत्तर भारतीय मेयर बनेगा.

इस बयान का शिवसेना (यूबीटी) और मनसे ने हमला बोला था और बीजेपी पर मराठी विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वह मुंबई में गैर-मराठी मेयर बनाने के पक्ष में है, हालांकि कृपाशंकर सिंह अपने बयान से पलट गए और अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया कि मंबई का मेयर मराठी होगा.

मेयर पद को लेकर मंत्री नितेश राणे का बयान काफी चर्चित हुआ था. उन्होंने दावा किया था कि ‘आई लव महादेव’ बोलने वाला ही मुंबई का मेयर बनेगा. राज्य की डेमोग्राफी में तेजी से बदलाव आ रहा है. उन्होंने सवाल किया कि ये ‘आई लव मोहम्मद’ बोलने वाले क्या पाकिस्तान के कराची या इस्लामाबाद में रहते हैं. यदि वे लोग ध्यान नहीं देंगे तो मुंबई में ‘आई लव मोहम्मद’ वाले को वे मेयर बना देंगे.

चुनाव का बदला हुआ समीकरण

इस बार का मुंबई नगर निगम चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हो रहा है. पहली बार, दोनों भाई राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक साथ आकर चुनाव लड़ रहे हैं. दूसरी ओर, बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना एक साथ मैदान में उतरी है.

जहां ‘मराठी मेयर’ और ‘हिंदू मेयर’ की लड़ाई चल रही है, वहीं अब वारिस पठान भी मैदान में कूद पड़े हैं और पूछा है कि कोई मुस्लिम मेयर क्यों नहीं बन सकता? मुंबई मेयर पद से शुरू हुआ यह विचारधारा और धार्मिक टकराव चुनाव तक किस हद तक पहुंचता है, इस पर पूरे राज्य की नजर है.

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