आवारा कुत्तों से सड़कें खाली रखनी होंगी,वे हादसों का कारण बनते हैं………………

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर सुनवाई जारी है। बहस में कुत्तों के मूड, कुत्तों की काउंसलिंग, कम्युनिटी डॉग्स और इंस्टीट्यूशनलाइज्ड डॉग्स जैसे शब्द सामने आए। जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, बात सिर्फ काटने की नहीं है, कुत्तों से खतरा भी होता है। दुर्घटनाओं का खतरा। आवारा कुत्तों से सड़कें […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 7 जनवरी 2026, 08:02 AM 8 मिनट read
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आवारा कुत्तों से सड़कें खाली रखनी होंगी,वे हादसों का कारण बनते हैं………………
Photo: UB India News Archive

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर सुनवाई जारी है। बहस में कुत्तों के मूड, कुत्तों की काउंसलिंग, कम्युनिटी डॉग्स और इंस्टीट्यूशनलाइज्ड डॉग्स जैसे शब्द सामने आए।

जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, बात सिर्फ काटने की नहीं है, कुत्तों से खतरा भी होता है। दुर्घटनाओं का खतरा। आवारा कुत्तों से सड़कें खाली रखनी होंगी। आप इसकी पहचान कैसे करेंगे? सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है, यह आप नहीं जान सकते।

बहस में आवारा कुत्तों के फेवर में पैरवी कर रहे कपिल सिब्बल ने कहा, जब भी मैं मंदिरों वगैरह में गया हूं, मुझे कभी किसी ने नहीं काटा। सुप्रीम कोर्ट ने जवाब दिया- ‘आप खुशकिस्मत हैं। लोगों को काटा जा रहा है, बच्चों को काटा जा रहा है। लोग मर रहे हैं।’

कपिल सिब्बल ने कहा कुत्ते ने किसी को काटा है, तो आप एक सेंटर को कॉल करें, उसे ले जाया जाएगा, उसकी नसबंदी की जाएगी और उसे वापस उसी इलाके में छोड़ दिया जाएगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बस एक ही चीज बाकी है, कुत्तों को भी काउंसलिंग देना। ताकि वापस छोड़े जाने पर वह काटे नहीं।

सीनियर एडवोकेट वेणुगोपाल ने बताया- देश में कुत्तों की आबादी 5 करोड़ से ज्यादा

सीनियर एडवोकेट केके वेणुगोपाल (NALSAR, हैदराबाद के लिए) ने कहा कि इस यूनिवर्सिटी में एक एनिमल लॉ सेंटर है। इसमें एनिमल प्रोटेक्शन में मास्टर्स कोर्स और पीजी डिप्लोमा भी है। एनिमल प्रोटेक्शन के संबंध में इसका हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साथ MoU है। हमारी जांच में ऐसे आंकड़े सामने आए हैं जो पहले कोर्ट के सामने नहीं रखे गए थे।

शिक्षण संस्थानों में आवारा कुत्तों पर डेटा –

  • भारत में कुत्तों की आबादी 5 करोड़ 25 लाख है, जरूरी शेल्टर की संख्या (प्रति सुविधा 200 कुत्ते) 77347 है।
  • प्रति कुत्ते के लिए जरूरी फंक्शनल शेल्टर 40 वर्ग फुट है।
  • एक कुत्ते को खिलाने का रोजाना का खर्च 40 रुपये है।
  • 1.54 करोड़ कुत्तों को खिलाने का खर्च 61 करोड़ 81 लाख रुपए होगा।
  • एक रिपोर्ट से पता चलता है कि 194,412 स्कूलों में बिजली का कनेक्शन काम नहीं कर रहा है।
  • खराब शौचालय की सुविधा, पीने के पानी की कमी, जब ऐसी खराब सुविधाएं हैं, यह मुमकिन नहीं है कि स्कूल बाड़ लगाने के लिए फंड दे पाएंगे।

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जस्टिस मेहता ने कहा- अदालत परिसरों, स्कूलों में कुत्तों की क्या जरूरत है

जस्टिस मेहता: जहां तक संस्थानों की बात है, वे सड़कें नहीं हैं। अदालत परिसरों, स्कूलों में कुत्तों की क्या जरूरत है? हम किस बारे में बात कर रहे हैं?

सिब्बल: अगर आप नियमों का पालन किए बिना इन सभी कुत्तों को शेल्टर होम्स में छोड़ देंगे तो… जस्टिस मेहता: नियमों के अनुसार उन्हें उसी क्षेत्र में वापस छोड़ना होगा। फिर संस्थाएं कुत्तों से मुक्त कैसे रहेंगी, क्या उन्हें सड़कों पर छोड़ देना चाहिए। सिब्बल: इस तरह से कुत्तों की आबादी खत्म नहीं की जा सकती। एक कुत्ता जाता है तो दूसरा उसकी जगह आ जाता है। अगर वैज्ञानिक मॉडल का पालन किया जाए तो एक दशक में ये खत्म हो जाएंगे। इनकी उम्र सिर्फ 10 साल होती है। पहले भी यह तरीका कारगर साबित हो चुका है। जिन इलाकों में आवारा कुत्तों को हटाया या मारा जाता है, वहां इंसान और कुत्ते के बीच संघर्ष बढ़ जाता है। हमारे बच्चों और लोगों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन समाधान ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे खतरा बढ़े।

सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल से कहा- ज्यादा उत्साहित मत होइए

सुप्रीम कोर्ट: हम आज सबकी बात ध्यान से सुन रहे हैं क्योंकि ऐसी शिकायतें आई हैं कि कई लोगों की बात नहीं सुनी जा रही है। सिब्बल: एक प्रक्रिया है जिसके तहत रेबीज के मुद्दे से निपटा जाना चाहिए। AWB ने एक SOP जारी की है जो ABC नियमों के खिलाफ है। राज्य उस SOP का पालन कर रहे हैं। उस SOP में कई निर्देश अवैज्ञानिक हैं।

सिब्बल: लोग कुत्तों को उसी जगह खाना खिलाते हैं जहां वे होते हैं। वे शेल्टर होम नहीं जाएंगे। कुत्तों को हटाने से काम नहीं चलेगा। सुप्रीम कोर्ट: कई NGO शेल्टर में जाकर खाना खिला सकते हैं।

जस्टिस मेहता: अगर वे इतने चिंतित हैं, तो उन्हें ऐसा करना चाहिए।

सिब्बल: अगर आपके पास पहले से ही समाधान हैं तो मुझे बहस करने की जरूरत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट: हम आपको मजबूर नहीं कर रहे हैं।

सिब्बल: मैं बस वैज्ञानिक सामग्री रिकॉर्ड पर रख रहा हूं। हटाने से काम नहीं चलता।

सुप्रीम कोर्ट (सिब्बल से): ठीक है, ज्यादा उत्साहित मत होइए।

सिब्बल: मैं उत्साहित नहीं हूं, मैं बस परेशान हूं।

सुप्रीम कोर्ट: परेशान होने की जरूरत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कुत्तों को सड़कों से हटाना होगा

सुप्रीम कोर्ट: कुत्ता काटेगा, किसी का पीछा करेगा, सिर्फ ऐसा ही नहीं है, एक्सीडेंट भी हो सकता है। जब वे सड़क पर दौड़ते हैं तो यह एक समस्या है। ऐसी सड़कें जहां गाड़ियां चलती हैं। यह सिर्फ काटने की बात नहीं है।

सिब्बल: लेकिन कुत्ते सड़कों पर नहीं होते, वे कंपाउंड में होते हैं।

सुप्रीम कोर्ट: क्या आप सीरियस हैं? आपकी जानकारी पुरानी लग रही है। रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होती है। सड़कों को कुत्तों से साफ और खाली रखना होगा। वे शायद काटें नहीं, लेकिन फिर भी वे एक्सीडेंट का कारण बनते हैं।

शेल्टर होम और स्टरलाइजेशन सेंटर का अभाव
एमिकस ने बताया कि राज्य कोर्ट के आदेश के पालन का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन शेल्टर होम और स्टरलाइजेशन सेंटर का अभाव है. उन्होंने बताया कि आदेश के अनुसार मवेशियों और आवारा कुत्तों को शेल्टर में रखने का निर्देश दिया गया है, जिसके लिए बुनियादी ढांचे का विकास किया जाना होगा. उन्होंने कहा कि AWB का कहना है कि मेल डॉग्स को पहले स्टरलाइज किया जाए, ताकि प्रजनन को रोका जा सके. उन्होंने यह भी बताया कि एबीसी सेंटर में भी मैन पावर की जरूरत होगी.  राज्यों को भी हलफनामे दाखिल करने थे और अभी तक 10 एफिडेविट मिले हैं. कोर्ट ने इस पर पूछा कि किन राज्यों ने हलफनामे दाखिल नहीं किए हैं, एमिकस क्यूरी ने बताया कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और पंजाब जैसे बड़े राज्यों ने दाखिल नहीं किए हैं, साथ ही सिक्किम जैसे छोटे राज्य भी इनमें शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- तो फिर कुत्तों की भी काउंसलिंग होना चाहिए

सिब्बल: हां, लेकिन कुछ दिन पहले एक हादसा हुआ था। अगर कोई ऐसा कुत्ता है जो शरारती है और किसी को काट सकता है, तो आप एक सेंटर को कॉल करें, उसे ले जाया जाएगा, उसकी नसबंदी की जाएगी और उसे वापस उसी इलाके में छोड़ दिया जाएगा।

कोर्ट: बस एक ही चीज बाकी है, कुत्तों को भी काउंसलिंग देना। ताकि वापस छोड़े जाने पर वह काटे नहीं।

सिब्बल: मुझे यकीन है कि यह हल्के-फुल्के अंदाज में कहा गया है। अगर दर्द है, तो इसका मतलब ये नहीं कि हमें क्रूर होना पड़ेगा।

जस्टिस नाथ: बात सिर्फ काटने की नहीं है, कुत्तों से खतरा भी होता है। दुर्घटनाओं का खतरा। आप इसकी पहचान कैसे करेंगे? सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है, यह आप नहीं जान सकते।

कपिल सिब्बल ने कहा– मुझे कभी किसी चीज ने नहीं काटा

कपिल सिब्बल ने कहा, यह कोई विरोधी मामला नहीं है। हम यहां कुत्ते प्रेमी के तौर पर हैं। अगर एक बाघ आदमखोर है तो हम सभी बाघों को नहीं मारते। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि स्टेरिलाइजेशन हो। इसके लिए एक प्रक्रिया है। इसे CSVR मॉडल कहा जाता है जो पूरी दुनिया में स्वीकार किया गया है। इसे कैप्चर, स्टेरिलाइज, वैक्सीनेट, रिलीज कहा जाता है। इसने यूपी जैसे राज्यों में कुत्तों की आबादी को लगभग शून्य कर दिया है। अगर हमारे पास रेबीज वाले कुत्ते और बिना रेबीज वाले कुत्ते एक ही शेल्टर में हैं तो उन सभी को रेबीज हो जाएगा। जब भी मैं मंदिरों वगैरह में गया हूं, मुझे कभी किसी चीज ने नहीं काटा।

कोर्ट: आप खुशकिस्मत हैं। लोगों को काटा जा रहा है, बच्चों को काटा जा रहा है।

सिब्बल: हमें जानवरों के साथ रहना होगा। अगर हम उनकी जगह पर जाएंगे, तो वे काटेंगे ही।

एक पीड़ित ने कहा- हाउसिंग सोसाइटियों से कुत्तों को हटा देना चाहिए

एक और पीड़ित याचिकाकर्ता: मेरी बेटी को 7-8 आवारा कुत्तों ने बुरी तरह काट लिया था।

सुप्रीम कोर्ट: हमें पता है कि ये चीजें हो रही हैं। बच्चे, बड़े काटे जा रहे हैं, लोग मर रहे हैं, क्या सुझाव हैं। खुद पेश हुआ व्यक्ति: RWA को फैसले लेने की इजाजत मिलनी चाहिए। मेरी बेटी बाहर जाने से डरती है। ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों से कुत्तों को हटा देना चाहिए। हमारे बच्चों को इस तरह बाहर नहीं जाने दिया जा सकता।

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