ईरान में बढ़ रहा असंतोष, खामेनेई शासन के खिलाफ भारी प्रदर्शन……..

ईरान में जनता का विरोध बड़ा रूप लेता जा रहा है और सामने आए वीडियो इसका सबूत दे रही हैं. प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ ईरान की राजधानी तेहरान और अन्य शहरों में मार्च कर रही है. इसे ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ पिछले कुछ सालों में सबसे बड़ा प्रदर्शन कहा […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 9 जनवरी 2026, 06:50 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
ईरान में बढ़ रहा असंतोष, खामेनेई शासन के खिलाफ भारी प्रदर्शन……..
Photo: UB India News Archive

ईरान में जनता का विरोध बड़ा रूप लेता जा रहा है और सामने आए वीडियो इसका सबूत दे रही हैं. प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ ईरान की राजधानी तेहरान और अन्य शहरों में मार्च कर रही है. इसे ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ पिछले कुछ सालों में सबसे बड़ा प्रदर्शन कहा जा रहा है. प्रदर्शनकारियों को खामेनेई की सत्ता उखाड़ फेंकने और दिवंगत शाह के निर्वासित बेटे रेजा पहलवी को वापस ईरान की गद्दी सौंपने के नारे लगाते हुए सुना जा सकता है. ईरान के हर उम्र और हर तबके के लोग इस आंदोलन में भाग ले रहे हैं. यह महंगाई के खिलाफ शुरू प्रदर्शन से कहीं बड़ा आकार और मतलब ले चुका है.

तेहरान में लोगों का जनसैलाब

गुरुवार की शाम ईरान के कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन हुए लेकिन तेहरान और दूसरे शहर मशहद में ऐसा नहीं था. यहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए, जिन्हें सुरक्षा बलों ने तितर-बितर नहीं किया. दरअसल निर्वासन में रह रहे ईरान के क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने तेहरान के अंदर रात को विरोध प्रदर्शन करने को कहा था. गुरुवार शात 8 बजे लोगों को बाहर निकलने के लिए कहा गया था और ठीक 8 बजे तेहरान की सड़कें लोगों से पट गईं. इस वायरल वीडियो में जहां तक देखों, लोग नजर आ रहे हैं.

खामेनेई की सत्ता उखाड़ने के लग रहे नारे

सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में प्रदर्शनकारियों की एक बड़ी भीड़ देश के उत्तर-पूर्व में मशहद में एक प्रमुख सड़क पर चलती नजर आई. यहां जो लोग नारे लगा रहे थे, वो अपने आप में एक बड़ा ऐलान था. यहां “शाह लंबे समय तक जीवित रहें” और “यह अंतिम लड़ाई है! पहलवी वापस आएगा” के नारे सुने जा सकते हैं. साथ ही कई लोगों को एक ओवरपास पर चढ़ते और वहां लगे CCTV कैमरों को हटाते हुए देखा गया.

ब्रॉडकास्टिंग भवन को किया आग के हवाले 

हिंसक प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने ईरान के मध्य जिले इस्फ़हान में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) भवन को आग के हवाले कर दिया. कई गाड़ियों को भी आग के हवाले किया गया है. यहां के एक वीडियो में प्रदर्शनकारियों को इस्फ़हान में “तानाशाह मुर्दाबाद” के नारे लगाते हुए देखा गया. प्रदर्शनकारी तो यहां तक दावा कर रहे हैं कि उन्होंने शहर अपने कंट्रोल में कर लिया है.

प्रदर्शनकारियों और सुप्रीम लीडर की सेना में गोलीबारी

ईरान के पश्चिमी शहर डेज़फुल से आए एक वीडियो में प्रदर्शनकारियों की एक बड़ी भीड़ और सुरक्षाकर्मियों के बीच एक चौराहे पर गोलीबारी होती दिख रही है.

ईरान के प्रदर्शन ने गुरुवार को एक अलग ही मोड़ दे लिया. यह प्रदर्शन पूरे ईरान में फैलने के साथ और उग्र रूप ले चुका है. अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी ने कहा कि अब तक, प्रदर्शनों के आसपास हुई हिंसा में कम से कम 42 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 2,270 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है.

लाइव अपडेट

प्रदर्शनकारियों ने ‘पहलावी वापस लौटेंगे’ के नारे लगाए

ईरान में सरकार विरोधी व्यापक प्रदर्शनों के बीच कुछ प्रदर्शनकारी देश में शाह वंश की वापसी की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी निर्वासित युवराज रजा पहलवी के आह्वान का समर्थन करते नजर आ रहे हैं। अशांत ईरान में प्रदर्शनकारियों ने ‘पहलावी वापस आएंगे’ के नारे लगाए।

रजा पहलवी अगले सप्ताह ट्रंप से मिलेंगे

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक निर्वासित युवराज रजा पहलवी अगले सप्ताह मार-ए-लागो में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि अभी तक इस मुलाकात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ट्रंप और पहलवी की मुलाकात यरुशलम प्रेयर ब्रेकफास्ट में होगी।

प्रदर्शनकारियों को अंतरराष्ट्रीय समर्थन

स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने कहा कि स्वीडन प्रदर्शनकारियों की आवाज सुनता है और उनकी ‘स्वतंत्रता के लिए साहसी लड़ाई’ का समर्थन करता है। उन्होंने एक्स पोस्ट में कहा, ‘ईरानी जनता एक बार फिर दमन के खिलाफ उठ खड़ी हुई है। हम उनकी आवाज सुनते हैं और स्वतंत्रता के लिए उनके साहसी संघर्ष का समर्थन करते हैं। स्वतंत्रता और बेहतर भविष्य की स्पष्ट मांगों को हिंसा और दमन से लंबे समय तक चुप नहीं कराया जा सकता।’

बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने भी ईरान के प्रदर्शनकारियों की प्रशंसा की। बेल्जियम पीएम ने कहा, ‘कई वर्षों के दमन और आर्थिक कठिनाइयों के बाद साहसी ईरानी स्वतंत्रता के लिए खड़े हो रहे हैं। वे हमारे पूर्ण समर्थन के पात्र हैं। हिंसा के माध्यम से उन्हें चुप कराना अस्वीकार्य है।’

पूर्वी तेहरान में सरकारी इमारत में लगाई आग
राजधानी तेहरान के पूर्वी हिस्से में एक हिंसक घटना सामने आई। एक सरकारी इमारत में आग लगा दी गई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में इमारत को आग की लपटों में घिरा हुआ दिखाया गया है, जबकि लोग सरकार विरोधी नारेबाजी करते नजर आ रहे हैं।

निर्वासित युवराज रजा पहलवी ने की राष्ट्रव्यापी इंटरनेटबंदी की निंदा

निर्वासित युवराज रजा पहलवी की ओर से प्रदर्शनों के आह्वान के बाद विरोध प्रदर्शन तेज होने पर ईरान ने गुरुवार रात को देशभर में इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन सेवाएं बंद कर दीं। इंटरनेट कंपनियां क्लाउडफ्लेयर और नेटब्लॉक्स ने कहा कि यह व्यवधान सरकारी हस्तक्षेप के कारण हुआ, हालांकि ईरानी सरकारी टेलीविजन ने इसकी पुष्टि नहीं की। वहीं रजा पहलवी ने ईरानी सरकार की निंदा की है। उन्होंने सभी यूरोपीय नेताओं से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का अनुसरण करते हुए “ईरान के लोगों का समर्थन करने” और “शासन को जवाबदेह ठहराने” का आह्वान किया।

ईरानी कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद की वैश्विक समर्थन की अपील

प्रमुख ईरानी कार्यकर्ता और पत्रकार मसीह अलीनेजाद ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करने का आग्रह किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अलीनेजाद ने जारी विरोध प्रदर्शनों और फॉक्स न्यूज पर कहा कि ईरानी जनता का संदेश स्पष्ट है। जनता इस शासन को नहीं चाहती।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा
खास खबर

ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के बीच बिश्केक में मुलाकात होने वाली है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार होगा, जब दोनों देशों के नेता आमने-सामने मिलने वाले हैं. ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस द्विपक्षीय वार्ता पर होगी.

UB India News31 अग॰
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰