सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को कहा कि भारत शक्सगाम घाटी पर पाकिस्तान और चीन के बीच 1963 के समझौते को अवैध मानता है। जनरल द्विवेदी की यह टिप्पणी शक्सगाम घाटी में चीन के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स की आलोचना करने के चार दिन बाद आई है।
हम घाटी में किसी भी गतिविधि को मंजूरी नहीं देते हैं। विदेश मंत्रालय पहले ही यह साफ कर चुका है। इसलिए, चीन में जारी किए गए संयुक्त बयान के बारे में, CPEC 2.0 के बारे में मैं जो समझता हूं, हम उसे स्वीकार नहीं करते हैं। हम इसे दोनों देशों द्वारा की जा रही एक अवैध कार्रवाई मानते हैं।
इसके पहले, लद्दाख LG कवींद्र गुप्ता ने भी चीन द्वारा शक्सगाम घाटी पर किए गए दावे को सख्ती से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाला पूरा कश्मीर (पीओके) भारत का हिस्सा है।
गुप्ता ने कहा, ‘हमें नहीं पता पाकिस्तान ने चीन से क्या सौदा किया है। चीन को समझना चाहिए कि उसकी विस्तारवादी नीति से कुछ हासिल नहीं होगा। भारत अब 1962 वाला नहीं, यह 2026 का भारत है। ऐसी किसी भी कोशिश को नाकाम किया जाएगा। विदेश मंत्रालय इस पर नजर रखे हुए है।’
शक्सगाम वैली के बारे में जरूरी बातें…
- शक्सगाम वैली जम्मू-कश्मीर के उत्तरी हिस्से में है। यह क्षेत्र काराकोरम पर्वत श्रृंखला में आता है और सियाचिन ग्लेशियर के उत्तर-पूर्व में है। इसे ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट भी कहा जाता है। यह भारत का हिस्सा है, लेकिन इस पर अभी चीन का नियंत्रण है।
- 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें पाकिस्तान ने शक्सगाम वैली का क्षेत्र चीन को सौंप दिया। भारत ने इस समझौते को अवैध बताया, क्योंकि यह इलाका भारत के जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है।
- भारत लगातार कहता रहा है कि पाकिस्तान का जम्मू-कश्मीर के किसी भी हिस्से पर कोई अधिकार नहीं था, इसलिए वह उसे किसी तीसरे देश को नहीं दे सकता।
- यह क्षेत्र भारत-चीन-पाकिस्तान त्रिकोणीय सीमा के पास है। काराकोरम दर्रे और चीन-पाकिस्तान रणनीतिक संपर्क के लिहाज से अहम है। सियाचिन और लद्दाख सुरक्षा समीकरण से जुड़ा है।
अभी यह मामला क्यों सामने आया
चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के तहत शक्सगाम घाटी में चीन बड़े पैमाने पर निर्माण किए जाने की खबरों के कारण भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं।
खबरों के मुताबिक बीजिंग इस क्षेत्र में एक ऑलवैदर रोड बना रहा है, जिसकी लगभग लंबाई 75 किमी और चौड़ाई 10 मीटर पहले ही पूरी हो चुकी है।
सरकार ने चेतावनी दी है कि ऐसे प्रोजेक्ट उस क्षेत्र की जमीनी हकीकत में बदलाव का खतरा है जिसे वह अपना संप्रभु क्षेत्र मानता है।
1950 में चीनी घुसपैठ बढ़ी तो पाकिस्तान ने चीन को दिया शक्सगाम
अक्टूबर 1947 में जम्मू और कश्मीर के भारत में विलय के बाद शक्सगाम घाटी कानूनी रूप से भारतीय क्षेत्र का हिस्सा बन गई। 1950 के दशक में पूर्वी हुंजा में चीनी घुसपैठ के कारण भारत-चीन संबंध बिगड़ने लगे।
तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान के नेतृत्व में पाकिस्तान ने बीजिंग के करीब आना शुरू कर दिया और भारत की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए 1963 में शक्सगाम घाटी और यारकंद नदी के किनारे के क्षेत्रों को औपचारिक रूप से चीन को सौंप दिया।
भारत के साथ डोकलाम विवाद के बाद से, चीन ने इस क्षेत्र में सैन्य और बुनियादी ढांचागत गतिविधियों को काफी हद तक बढ़ा दिया है, जिससे भारत से कानूनी रूप से संबंधित क्षेत्र दिल्ली के लिए एक बड़ी सुरक्षा चिंता का विषय बन गया है।
सेना प्रमुख ने टेरर कैंप्स पर क्या कहा?
पाकिस्तानी सरजमीं पर मौजूद आतंकी ठिकानों पर क्या भारतीय सेना एक और सर्जिकल स्ट्राइक करने की तैयारी में है. इंडियन आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी के ताजा बयान से बालाकोट एयर स्ट्राइक दोहराने की अटकलें तेज हो गई हैं. दरअसल जनरल द्विवेदी ने मंगलवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ-साफ कहा कि भारत न सिर्फ सीमा पार मौजूद आतंकी ढांचे पर पूरी नजर रखे हुए है, बल्कि जरूरत पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई के लिए भी पूरी तरह तैयार है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना प्रमुख ने पहली बार इतने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में अब भी आठ आतंकी कैंप एक्टिव हैं, जिनकी लोकेशन, गतिविधियों और वहां मौजूद आतंकियों की संख्या तक भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के पास मौजूद है. यही वजह है कि रणनीतिक हलकों में इसे ‘बालाकोट 2.0’ की पुख्ता आहट के तौर पर देखा जा रहा है.
सेना प्रमुख ने टेरर कैंप्स पर क्या कहा?
जनरल द्विवेदी ने बताया कि भारतीय सेना की जानकारी के मुताबिक सीमा पार कुल आठ आतंकी कैंप इस वक्त एक्टिवहैं. इनमें से छह कैंप्स लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के उस पार हैं, जबकि दो कैंप अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) की दूसरी स्थित हैं. सेना प्रमुख के मुताबिक इन कैंपों में अभी भी आतंकियों की मौजूदगी है और वहां ट्रेनिंग जैसी गतिविधियां चल रही हैं. उन्होंने साफ कहा कि भारतीय सेना इन सभी कैंप्स पर कड़ी नजर रखे हुए है और हर गतिविधि को बारीकी से मॉनिटर किया जा रहा है. अगर दोबारा किसी भी तरह की आतंकी हरकत होती है, तो भारत अपने इरादे को जरूर अंजाम देगा.
सेना प्रमुख के इस बयान को इसलिए भी बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने न सिर्फ आतंकी कैंप्स की संख्या बताई, बल्कि वहां मौजूद आतंकियों के आंकड़े भी सामने रख दिए. उनके मुताबिक, इन कैंप्स में करीब 100 से 150 आतंकी मौजूद हो सकते हैं. यानी भारतीय एजेंसियों के पास सिर्फ लोकेशन ही नहीं, बल्कि ग्राउंड रियलिटी की भी सटीक जानकारी है. यही वह स्थिति है, जिसे सैन्य रणनीति की भाषा में ‘एक्शन-रेडी इंटेलिजेंस’ कहा जाता है.
आसमान के बाद जमीन से हमले की तैयारी
ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने बड़े पैमाने पर मोबिलाइजेशन किया था और जमीनी हमले के लिए तैयार थी. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस मोबिलाइजेशन का पूरा ब्योरा क्लासिफाइड है, लेकिन इतना जरूर बताया कि सेना ने पर्याप्त स्तर तक अपनी तैयारियों को अंजाम दिया. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जो फॉरवर्ड मूवमेंट हुआ था, उसे डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) एग्रीमेंट के तहत चरणबद्ध तरीके से कम किया गया. यह प्रक्रिया अचानक नहीं, बल्कि एक तय समय-सीमा के भीतर पूरी की गई, जिसे मई के अंत तक पूरा करने की योजना थी.
जनरल द्विवेदी ने दो टूक शब्दों में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी ‘जारी’ है. इसका सीधा मतलब है कि भारतीय सेना की ‘आंख और कान’ यानी खुफिया निगरानी पूरी तरह एक्टिव है. लाइन ऑफ कंट्रोल से लेकर अंतरराष्ट्रीय सीमा तक हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत जो भी कार्रवाई करनी है, उसकी पूरी तैयारी पहले से कर रखी गई है. यानी अगर हालात बिगड़ते हैं, तो भारत को किसी तरह की तात्कालिक तैयारी की जरूरत नहीं पड़ेगी.
बालाकोट 2.0 की क्यों अटकलें?
ऑपरेशन सिंदूर के असर पर बात करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि इसके बाद से जम्मू-कश्मीर में आतंकियों द्वारा शुरू किए जाने वाले हमलों में लगभग कमी आ चुकी है. उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकी इनिशिएटेड इंसिडेंट्स लगभग खत्म हो गए हैं और कुल मिलाकर आतंकी गतिविधियां काफी कम हुई हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका यह मतलब नहीं है कि जम्मू-कश्मीर में सेना की तैनाती या दबाव में कोई कमी की गई है. भारतीय सेना ने उतना ही दबाव बनाए रखा है, जितना पहले था.
सेना प्रमुख ने यह भी संकेत दिए कि पाकिस्तान की तरफ से राजनीतिक बयानबाजी और कट्टरपंथी संगठनों को शह देने की प्रक्रिया अब भी जारी है. उन्होंने कहा कि उनके हिसाब से पाकिस्तान पूरी तैयारी कर रहा है. जनरल द्विवेदी ने साफ तौर पर कहा कि पाकिस्तान उन लोगों को शह दे रहा है, जो भारत में घुसपैठ कर आतंक फैलाने और स्थानीय युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिश करते हैं.
इन तमाम बयानों से तस्वीर बिल्कुल साफ हो जाती है कि भारत के पास आज वह स्थिति है, जो बालाकोट एयर स्ट्राइक से पहले बनी थी, बल्कि उससे भी ज्यादा मजबूत. तब भी भारत के पास आतंकियों के ठिकानों की पुख्ता जानकारी थी, और अब तो सेना प्रमुख खुद यह कह रहे हैं कि कैंप्स की संख्या, लोकेशन और वहां मौजूद आतंकियों का अनुमान तक मौजूद है. यही वजह है कि रक्षा विशेषज्ञ इसे ‘बालाकोट 2.0’ की तैयारी मान रहे हैं.
बालाकोट एयर स्ट्राइक में क्या हुआ था?
बालाकोट एयर स्ट्राइक में भारत ने पाकिस्तान को दिखा दिया था कि वह सीमा पार जाकर आतंक के अड्डों पर वार कर सकता है. यह एयर स्ट्राइक जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 जनवरी 2019 को हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें CRPF के 40 जवान शहीद हो गए थे. पुलवामा हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने ली थी. इस हमले के ठीक 12 दिन बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर आतंकियों के ठिकानों पर सटीक हमला किया और उनके लॉन्च पैड तबाह कर दिए.
26 फरवरी 2019 को तड़के करीब 3:30 बजे भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 लड़ाकू विमान LoC पार कर बालाकोट इलाके में पहुंचे. यह इलाका पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से आगे पाकिस्तान के मुख्य भूभाग में स्थित था, जो इस स्ट्राइक को और भी अहम बनाता है.
भारतीय वायुसेना ने यहां स्थित जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े आतंकी ट्रेनिंग कैंप को निशाना बनाया. इस हमले में स्पाइस-2000 प्रिसिजन गाइडेड बमों का इस्तेमाल किया गया, जो बेहद सटीक माने जाते हैं और तय लक्ष्य को न्यूनतम कोलेटरल डैमेज के साथ तबाह करने में सक्षम होते हैं.
इस एयर स्ट्राइक में जैश-ए-मोहम्मद का सबसे बड़ा ट्रेनिंग कैंप पूरी तरह तबाह कर दिया गया. वहीं बड़ी संख्या में आतंकी, ट्रेनर और उनके सीनियर कमांडर मारे गए. यह कार्रवाई पूरी तरह नॉन-मिलिट्री टारगेट पर केंद्रित थी, ताकि आम नागरिकों को कोई नुकसान न पहुंचे. अब, जनरल उपेंद्र द्विवेदी के बयानों से यह संकेत भी मिल रहा है कि अगर पाकिस्तान की तरफ से एक और उकसावे की कोशिश हुई, तो भारत सिर्फ जवाब ही नहीं देगा, बल्कि ऐसा जवाब देगा जो आतंक के पूरे इकोसिस्टम को तबाह कर सकता है.








