महाश्मशान मणिकर्णिका पर इतना हंगामा क्यों बरप रहा ?

काशी के प्रसिद्ध महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर चल रहे विकास और पुनरुद्धार कार्य विवादों की आग में घिर गया है. सोशल मीडिया पर बुलडोजर से तोड़फोड़ की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय निवासियों, पाल समाज और धार्मिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए. विपक्षी दल जैसे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसे सनातन […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 19 जनवरी 2026, 06:51 AM 5 मिनट read
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महाश्मशान मणिकर्णिका पर इतना हंगामा क्यों बरप रहा ?
Photo: UB India News Archive
काशी के प्रसिद्ध महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर चल रहे विकास और पुनरुद्धार कार्य विवादों की आग में घिर गया है. सोशल मीडिया पर बुलडोजर से तोड़फोड़ की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय निवासियों, पाल समाज और धार्मिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए. विपक्षी दल जैसे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसे सनातन धरोहर पर हमला करार देते हुए सरकार पर निशाना साधा है.
यह विवाद मुख्य रूप से घाट पर एक प्राचीन चबूतरा और उससे जुड़ी मूर्तियों, खासकर रानी अहिल्याबाई होल्कर से संबंधित प्रतिमाओं के कथित क्षतिग्रस्त होने के आरोपों से जुड़ा है. कुछ लोगों का दावा है कि विकास के नाम पर सदियों पुरानी धार्मिक संरचनाओं और मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिससे घाट का मूल आध्यात्मिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है.

क्या है प्रोजेक्ट का उद्देश्य

मणिकर्णिका तीर्थ कॉरिडोर का यह पुनर्विकास कार्य श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की सफलता के बाद शुरू किया गया है. इसका मुख्य मकसद घाट पर भीड़भाड़ कम करना, श्रद्धालुओं और अंतिम संस्कार करने वालों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना, स्वच्छता सुधारना, सीढ़ियां मजबूत करना और मानसून में आने वाली बाढ़ की समस्याओं से निजात दिलाना है. प्रोजेक्ट में मल्टी-लेवल प्लेटफॉर्म, बेहतर एक्सेस, वुड प्लाजा और अन्य आधुनिक सुविधाओं का प्रस्ताव है, ताकि 24×7 जलने वाली चिताओं के बीच भी श्रद्धालुओं को सुविधा मिले. यह काम नगर निगम और संबंधित एजेंसियों की देखरेख में चल रहा है, और इसकी कुल लागत करोड़ों में बताई जा रही है.

विवाद और राजनीतिक घमासान

विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कोई भी मंदिर या पूजनीय मूर्ति क्षतिग्रस्त नहीं हुई है. खुदाई के दौरान मिली कलाकृतियां और मूर्तियां संस्कृति विभाग के संरक्षण में हैं, जिन्हें पुनर्निर्माण के बाद उसी स्थान पर या उपयुक्त जगह पर पुनः स्थापित किया जाएगा. कई वायरल तस्वीरों को एआई जनरेटेड या पुरानी/गुमराह करने वाली बताया गया है, जिसके खिलाफ पुलिस ने कई मुकदमे दर्ज किए हैं.

CM योगी का कांग्रेस पर आरोप

इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं वाराणसी पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव मंदिर में दर्शन किए, फिर प्रोजेक्ट साइट ऑफिस से विकास कार्यों का निरीक्षण किया. सीएम ने कहा कि कुछ तत्व काशी को बदनाम करने और विकास कार्यों में बाधा डालने की साजिश रच रहे हैं. उन्होंने कांग्रेस पर पुरानी तस्वीरों और फर्जी वीडियो से भ्रम फैलाने का आरोप लगाया, और याद दिलाया कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के समय भी इसी तरह की अफवाहें फैलाई गई थीं, लेकिन अब श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ गई है.

कांग्रेस नेता सतनाम सिंह बोले- विकास के नाम पर धार्मिक धरोहर को नष्ट किया जा रहा है

मणिकर्णिका घाट पर कांग्रेस नेता सतनाम सिंह कुछ लोगों के साथ मिले. सतनाम सिंह ने कहा कि जो तोड़-फोड़ हुई, उसमें अहिल्या बाई की मूर्ति भी तोड़ी गई है. साथ ही कई मूर्ति और शिवलिंग भी तोड़ दिए गए. विकास के नाम पर धार्मिक, सांस्कृतिक धरोहर को नष्ट किया जा रहा है. एआई तस्वीरें-वीडियो के बारे में उन्होंने कहा कि ये लोग प्रशासन और सरकार के लोग कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अगर तोड़-फोड़ के आरोप गलत हैं तो योगी जी सफाई क्यों दे रहे हैं?

स्थानीय पुरोहित बोले- ये सब अनर्गल हो रहा है, एक बाढ़ नहीं सह पाएगा

एक स्थानीय तीर्थ पुरोहित ने कहा, “ये सब अनर्गल हो रहा है. पुराना सामान सब तोड़ कर नया आर्टिफिशियल सामान लगाएंगे. एक बाढ़ नहीं सह पाएगा ये सब. एक बाढ़ में सब 62 हो जाएगा.” हालांकि मौके पर मिट्टी के ढेर के अतिरिक्त कुछ भी नहीं दिख रहा था. लेकिन इस बात से इनकार करना मुश्किल है कि कोई तोड़फोड़ नहीं हुई है. अहिल्या बाई की मढ़ी तोड़ दी गयी है, प्रशासन का कहना है कि अहिल्या बाई की मूर्ति सुरक्षित और संरक्षित है.

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स्थानीय सुरेंद्र सिंह बोले- किसकी मूर्ति टूटी ये तो पता नहीं चल रहा है

स्थानीय सुरेंद्र सिंह ने कहा कि दो महीने पहले हम यहां आए थे, यहां पक्का घाट था. यही आकर हम लोगों बैठे थे. यहां छोटे-छोटे कई मंदिर थे. सैकड़ों साल पुरानी मोटे-मोटे पत्थरों से बना था. सब तोड़ दिया गया. वहीं यह पूछने पर कि किसकी मूर्ति टूटी है तो सुरेंद्र सिंह ने ये तो पता नहीं चल रहा है कि कौन भगवान थे. उन्होंने यह भी कहा कि ये तोड़फोड़ एआई जेनरेटेड तो हैं नहीं.

चक्र पुष्करिणी कुंड सुरक्षित, कांग्रेस का आरोप- वो भी टूटा

मणिकर्णिका घाट पर मौजूद कुछ दूसरे तीर्थ पुरोहितों और घाट पर रहने वालों ने इस बात से इनकार किया कि घाट पर कोई मंदिर टूटा है या कोई भी स्थापित देवता की मूर्ति. हालांकि वहां स्थित मढ़ी के दीवारों मे उकेरी गई मूर्ति और कुछ अन्य मूर्ति के टूटने की बात लोगों ने की. मणिकर्णिका घाट स्थित चक्र पुष्करिणी कुंड, जो भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से बनाया गया था, वो सुरक्षित निकला.  उससे कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है. हालांकि कांग्रेस ने इसे तोड़ने का आरोप लगाया है.

माता सती के कान के कुंडल यही गिरे थे

मणिकर्णिका घाट के सांस्कृतिक-धार्मिक मान्यता के बारे में वैदिक विद्वान श्रीधर पाण्डेय ने कहा कि यहाँ माता सती के कान के कुंडल गिरे थे. इसीलिए इसका नाम मनिकर्णिका पड़ा.  यहां अंतिम संस्कार करने से भगवान विश्वनाथ शव के कान मे तर्क मंत्र देते है और फिर उसको मोक्ष मिल जाता है. ढाई सौ साल पहले होल्कर वंश की लोकमाता अहिल्या बाई ने मणिकर्णिका घाट का जीर्णोद्धार करवाया था.

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