डोनाल्ड ट्रंप के गाजा पीस बोर्ड में भारत के एक नहीं 2 मेंबर होंगे…

गाजा के पूरे परिदृश्य को बदलने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पीस बोर्ड की स्थापना की है. इस बोर्ड का मुख्य काम विकास और शांति बहाल करना है. राष्ट्रपति ट्रंप खुद इस बोर्ड के चेयरमैन होंगे. बोर्ड में 60 से ज्यादा सदस्यों को शामिल कराने की तैयारी है. बोर्ड में शामिल होने […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 19 जनवरी 2026, 07:23 AM 11 मिनट read
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डोनाल्ड ट्रंप के गाजा पीस बोर्ड में भारत के एक नहीं 2 मेंबर होंगे…
Photo: UB India News Archive

गाजा के पूरे परिदृश्य को बदलने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पीस बोर्ड की स्थापना की है. इस बोर्ड का मुख्य काम विकास और शांति बहाल करना है. राष्ट्रपति ट्रंप खुद इस बोर्ड के चेयरमैन होंगे. बोर्ड में 60 से ज्यादा सदस्यों को शामिल कराने की तैयारी है. बोर्ड में शामिल होने के लिए भारत सरकार को भी आमंत्रण भेजा गया है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गाजा के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (शांति बोर्ड) में शामिल होने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को न्योता दिया है। भारत में US के एम्बेसडर सर्जियो गोर ने ट्वीट कर जानकारी दी। इसके साथ ही पाकिस्तान को भी इस बोर्ड में शामिल होने का बुलावा दिया गया है। पाकिस्तान सरकार ने रविवार को इसे कंफर्म किया।

दरअसल गाजा पीस प्लान दूसरे चरण में पहुंच चुका है। ट्रम्प ने गाजा के प्रशासन और पुनर्निर्माण के लिए नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) के गठन का ऐलान किया है।

इस कमेटी की देखरेख करने, फंड जुटाने जैसे कामों के लिए ट्रम्प ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (शांति बोर्ड) का गठन किया गया है। ट्रम्प खुद इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं। इसके अलावा गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी बनाया गया है।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने शनिवार को कहा कि गाजा के लिए बनाए गए नए प्रशासनिक बोर्ड की घोषणा अमेरिका ने इजराइल से बिना बातचीत करे की है। इजराइल का कहना है कि यह फैसला उसकी सरकारी नीति के खिलाफ है।

पाकिस्तान को भी पीस बोर्ड में शामिल होने का न्योता

पाकिस्तान ने रविवार को बताया कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को राष्ट्रपति ट्रम्प ने गाजा के लिए बनाए गए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने मीडिया से बातचीत में पुष्टि की कि पाकिस्तान को औपचारिक रूप से यह निमंत्रण मिला है।

ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान गाजा में शांति और सुरक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में हिस्सा लेता रहेगा और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के मुताबिक फिलिस्तीन मुद्दे का स्थायी समाधान चाहता है। हालांकि, उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी।

इजराइल को ट्रम्प के पीस बोर्ड से क्या नाराजगी

नेतन्याहू के ऑफिस के मुताबिक, विदेश मंत्री गिदोन सार इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाएंगे। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि बोर्ड का कौन सा हिस्सा इजराइल को आपत्तिजनक लग रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य समस्या तुर्किए विदेश मंत्री हाकान फिदान को शामिल करने से है। तुर्किए को हमास का समर्थक माना जाता है और इजराइल के साथ इसका संबंध तनावपूर्ण हैं।

तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगन ने इजराइल की गाजा कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। इजराइल का कहना है कि ऐसे देशों को गाजा के प्रशासन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

इजराइली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने नेतन्याहू के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि गाजा को ‘कार्यकारी बोर्ड’ की जरूरत नहीं, बल्कि हमास को पूरी तरह खत्म करने और बड़े पैमाने पर खुद से पलायन की जरूरत है।

ट्रम्प अक्टूबर 2025 में इजराइल पहुंचे थे, इस दौरान उन्होंने नेतन्याहू से मुलाकात की थी।
ट्रम्प अक्टूबर 2025 में इजराइल पहुंचे थे, इस दौरान उन्होंने नेतन्याहू से मुलाकात की थी।

पीस बोर्ड के हर सदस्य की अपनी तय जिम्मेदारी होगी

व्हाइट हाउस ने कहा कि एग्जीक्यूटिव बोर्ड का हर सदस्य गाजा की स्थिरता और लंबे समय की सफलता से जुड़े एक तय पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी संभालेगा।

इसमें शासन क्षमता बढ़ाना, क्षेत्रीय संबंध, पुनर्निर्माण, फंडिंग और पूंजी जुटाना शामिल है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, आने वाले हफ्तों में बोर्ड ऑफ पीस और गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड के और सदस्यों की घोषणा की जाएगी।

NCAG डॉ. अली शाथ के नेतृत्व में काम करेगी। डॉ. शा’थ एक तकनीकी विशेषज्ञ (टेक्नोक्रेट) हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अली शाथ गाजा में बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं (जैसे पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा) को बहाल करने, नागरिक संस्थाओं को मजबूत करने और रोजमर्रा की जिंदगी को स्थिर करने की जिम्मेदारी संभालेंगे।

रिपोर्ट- परमानेंट सदस्यता पाने के लिए देशों को एक अरब डॉलर देने होंगे

ट्रम्प की प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में सदस्यता को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। ब्लूमबर्ग न्यूज ने शनिवार को रिपोर्ट किया कि बोर्ड के ड्राफ्ट चार्टर में कहा गया है कि देशों को परमानेंट सदस्यता पाने के लिए पहले साल में $1 बिलियन (एक अरब डॉलर) की फीस देनी होगी।

ट्रम्प तय करेंगे कि किस देश को सदस्य बनने का निमंत्रण मिलेगा। सामान्य सदस्यता 3 साल की होगी, जिसे बाद में रिन्यू किया जा सकता है।

अगर कोई देश चार्टर लागू होने के पहले साल में $1 बिलियन से ज्यादा (एक अरब डॉलर) कैश फंड देता है, तो उसकी 3 साल की समय सीमा लागू नहीं होगी यानी स्थायी सदस्यता मिल जाएगी। फंड का इस्तेमाल बोर्ड के खर्चों के लिए होगा, लेकिन कहां-कैसे खर्च होगा, इसकी स्पष्ट डिटेल नहीं है।

व्हाइट हाउस ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को गुमराह करने वाला बताया है। व्हाइट हाउस ने कहा, ‘यह गुमराह करने वाली रिपोर्ट है। बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए कोई न्यूनतम सदस्यता फीस नहीं है। यह सिर्फ उन पार्टनर देशों को स्थायी सदस्यता का ऑफर है जो शांति, सुरक्षा और समृद्धि के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखाते हैं।’

बोर्ड के सदस्यों में भारतवंशी अजय बंगा भी

व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को बोर्ड के सदस्यों की सूची जारी की। इस बोर्ड में 7 लोग शामिल हैं, जिनमें भारतवंशी अजय बंगा भी हैं। बंगा फिलहाल वर्ल्ड बैंक ग्रुप के अध्यक्ष हैं। बोर्ड के दूसरे सदस्यों में मार्को रुबियो (विदेश मंत्री), स्टीव विटकॉफ (विशेष राजदूत) समेत कई लीडर शामिल हैं।

भारतवंशी अजय बंगा का जन्म पुणे में हुआ था

1959 में भारत के पुणे में अजयपाल सिंह बंगा का जन्म हुआ। पिता हरभजन सिंह बंगा भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल थे, इसलिए बचपन में पूरे भारत में घूमना पड़ा। बंगा 2007 में अमेरिकी नागरिक बने।

फिलहाल वे विश्व बैंक समूह के 14वें अध्यक्ष हैं। बंगा को 3 मई, 2023 को वर्ल्ड बैंक का प्रेसिडेंट चुना गया था। उन्हें फरवरी 2023 में जो बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा इस पद के लिए नॉमिनेट किया गया था। बंगा इससे पहले भी कई अहम पद संभाल चुके हैं। वह मास्टरकार्ड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन रह चुके हैं। वर्ल्ड बैंक के लिए नॉमिनेट होने से पहले वह एक्सोर के चेयरमैन थे।

बंगा पूर्व अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट कमला हैरिस के साथ सेंट्रल अमेरिका के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के चेयरमैन भी थे। अजय बंगा ने विश्व बैंक समूह के 14वें अध्यक्ष का पद संभालने के बाद कई सुधार वाले काम शुरू किए हैं।

1. गाजा पीस बोर्ड में अमेरिका के बाद भारत मूल के सबसे ज्यादा 2 सदस्य होंगे. वर्ल्ड बैंक के प्रमुख अजय बंगा इसके मेंबर बन चुके हैं. बंगा भारतीय मूल के हैं.

सवाल- कौन हैं अजय बंगा?

महाराष्ट्र के पुणे में जन्मे अजय बंगा वर्तमान में वर्ल्ड बैंक के प्रमुख हैं. बंगा ने शुरुआती पढ़ाई लिखाई हिमाचल प्रदेश के सेंट एडवर्ड्स स्कूल से की है. इसके बाद बंगा दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज आ गए. बंगा आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए की डिग्री हासिल करने के बाद नेस्ले कंपनी में शामिल हो गए.

साल 2023 में बंगा को वर्ल्ड बैंक का प्रमुख नियुक्त किया गया था. बंगा को भारत में पद्मश्री पुरस्कार भी मिल चुका है. हालांकि, 2007 में अजय बंगा ने अमेरिकी नागरिकता ले ली. अजय बंगा के पिता हरभजन सिंह बंगा भारतीय सेना के अधिकारी रह चुके हैं. बंगा को अब ट्रंप ने गाजा में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है.

गाजा पीस बोर्ड की स्थापना क्यों?

गाजा में अमेरिका और इजराइल के बीच युद्धविराम कराते वक्त डोनाल्ड ट्रंप ने यहां पर विकास करने की घोषणा की थी. ट्रंप ने कहा था कि अगर यहां जंग थमता है तो एक शांति बोर्ड की स्थापना की जाएगी, जो गाजा में चुनाव तक यहां के विकास कामों को देखेगा. गाजा पीस बोर्ड की स्थापना इसी मकसद से की गई है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक ट्रंप ने इस बोर्ड में शामिल होने के लिए मिडिल ईस्ट के जॉर्डन, तुर्की, दक्षिण एशिया के भारत, पाकिस्तान जैसे देशों को ऑफर दिया है. व्हाइट हाउस प्रशासन ने गाजा पीस बोर्ड को लेकर अभी ज्यादा जानकारी शेयर नहीं की है.

तुर्किए के विदेश मंत्री गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड में शामिल

पीस बोर्ड के अलावा, हाई रिप्रेजेंटेटिव और NCAG की मदद के लिए गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी बनाया जा रहा है।

इसके शुरुआती सदस्यों में स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुश्नर, तुर्किए के विदेश मंत्री हकान फिदान, अली अल-थावादी, जनरल हसन राशाद, टोनी ब्लेयर, मार्क रोवन, यूएई की मंत्री रीम अल-हाशिमी, बल्गेरियाई राजनेता निकोलाय म्लाडेनोव शामिल हैं। निकोलाई म्लाडेनोव एग्जीक्यूटिव बोर्ड के प्रतिनिधि होंगे।

गाजा में आतंकवाद खत्म करने की जिम्मेदारी अमेरिकी जनरल को सौंपी

गाजा में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और आतंकवाद खत्म करने के लिए अमेरिकी सेना के मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स को इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) का कमांडर बनाया गया है।

व्हाइट हाउस ने कहा कि जैस्पर जेफर्स सुरक्षा अभियानों का नेतृत्व करेंगे। डी-मिलिट्राइजेशन में मदद करेंगे, मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण में इस्तेमाल हो रही जरूरी चीजों की सुरक्षा करेंगे।

ट्रम्प गाजा सीजफायर प्लान पर साइन करने के बाद मीडिया को दिखाते हुए।
ट्रम्प गाजा सीजफायर प्लान पर साइन करने के बाद मीडिया को दिखाते हुए।

अमेरिका ने इजराइल और अरब देशों के साथ साझेदारी की बात कही व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया है कि अमेरिका इस ट्रांजिशनल फ्रेमवर्क को पूरी तरह समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

इसके तहत इजराइल, प्रमुख अरब देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर इस योजना को पूरा किया जाएगा।

डोनाल्ड ट्रम्प ने सभी पक्षों से गाजा के प्रशासन के लिए बनाए गए नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG), बोर्ड ऑफ पीस और ISF के साथ पूरा सहयोग करने की अपील की है, ताकि योजना को तेजी से लागू किया जा सके।

अमेरिकी प्रशासन बोली- NCAG का मकसद गाजा में स्थायी शांति लाना

अमेरिकी प्रशासन ने NCAG को ट्रम्प की योजना के दूसरे चरण को लागू करने की अहम कड़ी बताया गया है। यह योजना 20 प्वाइंट रोडमैप पर आधारित है, जिसका मकसद गाजा में स्थायी शांति, स्थिरता, पुनर्निर्माण और समृद्धि लाना है।

योजना के मुताबिक, अगर दोनों पक्ष सहमत होते हैं तो युद्ध तुरंत खत्म हो जाएगा। इसके तहत इजराइली सेना तय लाइन तक पीछे हटेगी, ताकि बंधकों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू हो सके। सभी सैन्य गतिविधियां, जिनमें हवाई और तोपखाने हमले शामिल हैं, रोक दी जाएंगी।

अक्टूबर 2025 में हुए गाजा पीस डील पर साइन करते समय 20 देशों के नेता मिस्र में मौजूद थे।
अक्टूबर 2025 में हुए गाजा पीस डील पर साइन करते समय 20 देशों के नेता मिस्र में मौजूद थे।

गाजा में पैनल बनाकर विकास की तैयारी

इस पहल में ‘ट्रम्प इकोनॉमिक डेवलपमेंट प्लान’ भी शामिल है। इसके तहत मिडिल ईस्ट में आधुनिक ‘मिरेकल सिटीज’ विकसित करने से जुड़े विशेषज्ञों का पैनल बनाकर गाजा के पुनर्निर्माण और विकास की योजना तैयार की जाएगी।

योजना के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समूहों से निवेश और विकास से जुड़े प्रस्ताव लिए जाएंगे। इनका मकसद सुरक्षा और शासन व्यवस्था को मजबूत करते हुए निवेश आकर्षित करना और रोजगार के मौके पैदा करना है।

इसके साथ ही एक विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव भी है, जिसमें भाग लेने वाले देशों के साथ टैरिफ और एक्सेस रेट तय किए जाएंगे।

योजना में साफ कहा गया है कि गाजा से किसी को जबरन नहीं निकाला जाएगा। जो लोग जाना चाहें, वे जा सकेंगे और लौटना चाहें तो उन्हें लौटने की आजादी होगी। योजना के मुताबिक, लोगों को गाजा में ही रहने और बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

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