आखिर बड़े लोग क्यों खेलते हैं विक्टिम कार्ड !

स्लमडॉग मिलियनेयर के संगीत से दुनिया भर में धूम मचाने वाले एआर रहमान अब अपने एक बयान से विवादों से घिर गये हैं. 14 जनवरी को BBC के मंच पर दिये अपने एक इंटरव्यू में उन्होंने कह दिया कि पिछले आठ सालों से उन्हें बॉलीवुड में काम नहीं मिल रहा, शायद इसका कारण कम्युनल हो. […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 19 जनवरी 2026, 07:28 AM 8 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
आखिर बड़े लोग क्यों खेलते हैं विक्टिम कार्ड !
Photo: UB India News Archive

स्लमडॉग मिलियनेयर के संगीत से दुनिया भर में धूम मचाने वाले एआर रहमान अब अपने एक बयान से विवादों से घिर गये हैं. 14 जनवरी को BBC के मंच पर दिये अपने एक इंटरव्यू में उन्होंने कह दिया कि पिछले आठ सालों से उन्हें बॉलीवुड में काम नहीं मिल रहा, शायद इसका कारण कम्युनल हो. भारत का सबसे चर्चित और सबसे अमीर संगीतकार यदि इस तरह की बात करता है तो किसी को भी यह लगना स्वाभाविक है कि मुसलमान सदैव कम्युनल कार्ड क्यों खेलता है! क्यों वह यह रोना रोता है कि उसके साथ ऐसा इसलिए हो रहा कि वह मुसलमान है.

क्रिकेट स्टार अजहरुद्दीन जब मैच फिक्सिंग में फंसे तो फौरन उन्होंने ताना मारा कि उन्हें मुसलमान होने के कारण लपेटा जा रहा है. यह कोई बहुत अच्छी बात नहीं है. ये सब सफलता के उच्चतम शिखर पर पहुंचे हुए लोग हैं. पर जब भी ये ढलान पर होते हैं, फौरन यह रोना रोने लगते हैं.

ओछे बयान से पूरे समुदाय को शर्मसार किया

उनकी इन हरकतों के कारण मुसलमान कौम बदनाम होती है. जिस शो बिजिनेस में एआर रहमान हैं, वहां प्रतिभा की ही पूछ होती है. उम्र ढलने के साथ परफॉरमेंस में धीमापन आता है और कलाकार की त्वरा समाप्त होने लगती है. मगर कलाकार चाहता है, सदैव वह ही शिखर पर रहे. अरे भाई नई पीढ़ी आ रही है, उसे रास्ता दो.

यह सच है कलाकार की कला में भी निखार आता है परंतु बाजार की डिमांड बदलती रहती है और टॉप का कलाकार भी पिछड़ने लगता है. बॉलीवुड में आज न तो अमिताभ बच्चन की पहले जैसी मांग है न शाहरुख खान की, लेकिन इन लोगों ने यह रोना नहीं रोया कि उन्हें किसी जाति विशेष का होने अथवा एक खास मजहब का होने के कारण निर्माता-निर्देशक काम नहीं दे रहे. इन्होंने अपने सम्मान को बनाए रखा और काम की दौड़ में नहीं भागे. शाहरुख खान अब हीरो बन कर भले न आएं किंतु किंग खान का रुतबा बरकरार है.

अपने ईगो को हम पर न लादो मिस्टर अल्लारक्ख़ा रहमान!

इसमें कोई शक नहीं कि पिछले एक डेढ़ दशक से समाज में हिंदू-मुसलमान बहुत होने लगा है. हमारा समाज कम्युनल आधार पर विभाजित भी हुआ है, लेकिन शिखर पर बैठे लोगों या जमीनी स्तर पर काम करने वालों का विभाजन इस तरह नहीं होता क्योंकि सांप्रदायिकता और सेकुलरिज्म मध्य वर्ग के ईगो हैं. इनके लपेटे में कभी भी टॉप पर बैठे लोग नहीं आते न जमीन के लोग.

अजीम प्रेम जी जैसे उद्योगपति निरंतर तरक्की कर रहे हैं और वे अकेले नहीं देश के लाखों मुस्लिम उद्यमी नई-नई ऊंचाइयां छू रहे हैं. अभी इंडिगो संकट के बाद जिन तीन एयर लाइन कंपनियों को जहाज उड़ाने की अनुमति मिली है, उनमें से एक अल हिंद एयर लाइन है, जो केरल के एक मुस्लिम उद्यमी की है. लखनऊ का लू लू मॉल के मालिक भी मुसलमान हैं. ऐसे असंख्य मुसलमान देश में मजे से व्यापार कर रहे हैं. किसी भी मुस्लिम कारीगर को काम की कमी नहीं है.

सिनेमा में खान बंधुओं का दबदबा तो आदिकाल से

बॉलीवुड में दर्जनों कलाकार मुस्लिम हैं. खासकर हीरो का या फिल्मों में अहम किरदार निभाने वाले मुस्लिम हैं, आज तक किसी ने नहीं कहा कि मुसलमान होने के कारण उन्हें काम नहीं मिल रहा. नवाजुद्दीन सिद्दीकी, अरशद वारसी आज भी हिंदी सिनेमा में अहम रोल में आते हैं. शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान तो पिछले तीन दशकों से हिंदी सिनेमा के पर्याय रहे.

इनके पहले के कलाकारों में भी फिरोज खान, संजय खान, अमजद खान हर सिनेमा दर्शक के लाड़ले थे. महमूद को भला किसने नहीं पसंद किया. सबसे बड़ी बात कि हिंदी सिनेमा को विश्व मंच पर लाने वाली तिकड़ी- दिलीप कुमार, राज कपूर और देव आनंद में से दिलीप कुमार का असली नाम यूसुफ खान था. परदे पर भले उन्हें दिलीप कुमार बताया गया पर पूरे मुंबई फिल्म उद्योग के लोग उन्हें यूसुफ साहब ही कहते थे. वे भी खुद को यूसुफ कहलाना पसंद करते थे.

आखिर पुरस्कृत भी तो आप ही हुए

हमारा बॉलीवुड इस मामले में अव्वल रहा कि कभी भी वहां सांप्रदायिकता की बू नहीं आई. कबीर खान द्वारा निर्देशित बजरंगी भाईजान को भला कौन भूल सकता है. संगीतकारों में खय्याम और नौशाद साहब की कद्र सदैव रही. तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन, सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान, शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खान को तो भारत रत्न मिला, वह भी अटल बिहारी वाजपेयी की NDA सरकार के समय.

उस्ताद अलाउद्दीन खान की वीणा देश में कभी विस्मृत नहीं की गई, वह आज भी झंकृत हो रही है. पंडित रवि शंकर उन्हीं के शिष्य थे. संगीत का कोई मजहब नहीं होता और संगीतकार का. उसका खुदा संगीत है. फिल्म रोज़ा से हिट होने वाले एआर रहमान भूल गए कि उनको 2002, 2003, 2018 और 2024 में संगीत के राष्ट्रीय पुरस्कार NDA शासन के समय मिले. 2018 में उन्हें दो राष्ट्रीय पुरस्कार मिला.

खुद को विक्टिम बताने का अहंकार

सच तो यह है कि अहंकारी और आत्म मुग्ध व्यक्ति खुद को पीड़ित बता कर दूसरों का ध्यान अपनी तरफ आकृष्ट करने की कोशिश करता है. एआर रहमान की इस कोशिश ने उनकी प्रतिभा को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. उनके बयान से देश की सेकुलर जमात भी खिन्न है. सोशल मीडिया पर आज वे अपनी इस हरकत से ट्रोल हो रहे हैं. देश के तमाम मुसलमान भी उनके इस बयान को ले कर पशोपेश में हैं. वे खुल कर सामने नहीं आ रहे किंतु अंदर से उन्हें भी निराशा हुई है, क्योंकि इस बयान से पूरी मुस्लिम कम्युनिटी बदनाम हो रही है.

फिल्मी स्तंभकार शोभा डे जैसी हस्तियों ने भी X पर ट्वीट कर रहमान को आड़े हाथों लिया है. कभी भी बॉलीवुड ने सांप्रदयिकता ने प्रवेश नहीं किया. अगर किसी ने कोई अनर्गल टिप्पणी की तो फौरन उसे बाहर किया गया. आज कंगना रनौत भले लोकसभा में पहुंच गई हों किंतु बॉलीवुड में उनकी प्रतिष्ठा खत्म हो गई.

जावेद अख्तर ने भी निंदा की

यही कारण है कि फिल्म जगत में भी उनके इस बयान पर आक्रोश है. जावेद अख्तर ने कहा है कि उन्हें काम मिलना बंद हो गया है, इसमें सांप्रदायिक कोण कहां है? गीतकार शान ने कहा है कि हिंदी सिनेमा में कभी भी कोई कम्युनल नजरिए से कलाकार को नहीं देखा गया.

कंगना रनौत ने तो यह भी दावा किया है कि मैं एआर रहमान को अपनी फिल्म इमरजेंसी के लिए म्यूजिक एआर रहमान से दिलवाना चाहती थी पर मेरे भगवा पार्टी (भाजपा) में होने के कारण उन्होंने मेरी कहानी सुनने से इनकार कर दिया. ट्रोल होने के चलते बाद में रहमान ने सफाई दी कि उनके बयान को गलत तरीके से लिया गया. वे काम की कमी के बाबत बात कर रहे थे. उन्होंने यह भी कहा कि भारत तो उनका घर है. उन्हें खुशी है कि वे एक ऐसे देश में रह रहे हैं जो बहुलतावादी है और तमाम संस्कृतियां यहां फलती-फूलती हैं.

शेखर दिलीप कुमार से अल्लारक्ख़ा बनने का सफर

मजे की बात कि एआर रहमान एक हिंदू परिवार में जन्मे. उनका नाम शेखर दिलीप कुमार था. 23 वर्ष की उम्र में उन्होंने एक सूफ़ी के प्रभाव में मुस्लिम धर्म अपना लिया. उनके पिता की बीमारी में उस सूफी संत की संगत से काफी सहारा मिला था. उनके पिता को कैंसर की असाध्य बीमारी थी. उनके पिता हालांकि जीवित बचे नहीं. इस तरह के लोगों को धर्म जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बोलने से पहले खूब सोच-विचार करना चाहिए.

धर्म का फलक बहुत बड़ा होता है. उसका सरलीकरण करने से कई तरह की भ्रांतियां फैलती हैं. जाने-अनजाने में अल्लारक्खा रहमान पूरे एक समुदाय को कठघरे में खड़ा कर गये. वे एक सफल संगीतकार हैं, उन्हें संगीत पर बोलना चाहिए. एक राजनीतिक की तरह की उनकी बयानबाजी से मुस्लिम समाज को धक्का लगा है. अल्लारक्ख़ा की छवि कोई वितंडा खड़ा करने की नहीं रही है.

यहां तो मां तुझे सलाम को भी सबने स्वीकार किया

भारत में हिंदुओं ने कभी भी मां तुझे सलाम! जैसे गीत पर कोई सांप्रदायिक नजरिया नहीं अपनाया. वे कह सकते थे कि देश के बहुसंख्यक हिंदुओं, सिखों, जैनियों, बौद्धों और यहां तक कि ईसाइयों व पारसियों में भी मां को सलाम करने का रिवाज नहीं रहा है. मां को प्रणाम ही किया जाता है किंतु चूंकि कुछ कट्टर मुसलमानों का कहना है कि वे किसी को भी प्रणाम या वन्दे नहीं करेंगे इसलिए सलाम ही चलेगा और हिंदुओं ने उनके विचारों तथा उनके मजहब का सम्मान किया. इसे मुद्दा नहीं बनाया. अब उन्हें सांप्रदायिक बता कर किस तरह की धर्म निरपेक्षता को लाने के इच्छुक हो श्रीमान अल्लारक्खा रहमान!

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰