चिकन नेक पर चीन संग नई खिचड़ी पका रहा बांग्लादेश, यूनुस सरकार ने चीनी राजदूत को दिखाया सिलीगुड़ी कॉरिडोर

भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में चल रहे तनाव के बीच सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’के पास चीन की बढ़ती सक्रियता ने नई हलचल पैदा कर दी है. बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन ने सोमवार को तीस्ता नदी परियोजना क्षेत्र का दौरा किया, जो भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 20 जनवरी 2026, 05:24 AM 4 मिनट read
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चिकन नेक पर चीन संग नई खिचड़ी पका रहा बांग्लादेश, यूनुस सरकार ने चीनी राजदूत को दिखाया सिलीगुड़ी कॉरिडोर
Photo: UB India News Archive
भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में चल रहे तनाव के बीच सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’के पास चीन की बढ़ती सक्रियता ने नई हलचल पैदा कर दी है. बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन ने सोमवार को तीस्ता नदी परियोजना क्षेत्र का दौरा किया, जो भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बेहद नजदीक स्थित है. यह वही 22 किलोमीटर चौड़ा भूभाग है, जो भारत के मुख्य भूभाग को उसके पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है.
यह दौरा तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना के तहत चल रहे तकनीकी आकलन से जुड़ा बताया जा रहा है. बांग्लादेश की काम चलाऊ मुहम्मद यूनुस सरकार ने कहा है कि चीन इस परियोजना के तहत तीस्ता मास्टर प्लान को जल्द से जल्द लागू करने में रुचि दिखा रहा है. जल संसाधन मामलों की सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन भी चीनी राजदूत के साथ रंगपुर के तेपामधुपुर तालुक शाहबाजपुर स्थित परियोजना क्षेत्र में मौजूद थीं. टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और चीन दोनों ही तीस्ता मास्टर प्लान को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि परियोजना की जांच प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए फिलहाल काम शुरू करना संभव नहीं है.

बांग्लादेश के लिए लाइफलाइन है तीस्ता

तीस्ता नदी बांग्लादेश के उत्तरी जिलों में कृषि और आजीविका के लिए जीवनरेखा मानी जाती है. वहीं भारत के लिए भी, खासकर पश्चिम बंगाल के लिहाज से इसका महत्व कम नहीं है. यही वजह है कि भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारे को लेकर दशकों से बातचीत चल रही है, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार की आपत्तियों के चलते अब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका है.
चीनी राजदूत के इस दौरे से पहले रविवार को उनकी मुलाकात बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान से हुई थी. इस बैठक के बाद यूनुस सरकार के प्रेस विंग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि दोनों पक्षों के बीच आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा हुई और बांग्लादेश-चीन के बीच लंबे समय से चली आ रही मित्रता और विकास सहयोग को दोहराया गया. बातचीत में तीस्ता नदी परियोजना के अलावा प्रस्तावित बांग्लादेश-चीन फ्रेंडशिप हॉस्पिटल का मुद्दा भी शामिल रहा. इसी दौरान चीनी राजदूत ने परियोजना क्षेत्र के दौरे की जानकारी दी और तकनीकी आकलन को तेजी से पूरा करने के लिए चीन की प्रतिबद्धता दोहराई.
प्रेस विंग के अनुसार, चीनी राजदूत ने बांग्लादेश में जारी लोकतांत्रिक परिवर्तन के लिए अपने देश के समर्थन की भी पुष्टि की और आने वाले राष्ट्रीय चुनावों के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं.

चीन से गलबहियां कर रहे यूनुस

गौरतलब है कि मुहम्मद यूनुस ने 2025 में चीन दौरे के दौरान एक इंटरव्यू में बीजिंग से बांग्लादेश में मजबूत आर्थिक ढांचा खड़ा करने की अपील की थी. उस समय उन्होंने बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति को क्षेत्र में ‘समुद्र का एकमात्र संरक्षक’ बताते हुए चीन के लिए रणनीतिक रूप से अहम करार दिया था. यूनुस के इन्हीं बयानों और चीन की बढ़ती मौजूदगी को लेकर भारत में पहले से ही चिंता जताई जाती रही है.
ऐसे में सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास चीनी राजदूत का यह दौरा केवल एक तकनीकी निरीक्षण भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारत-बांग्लादेश-चीन के त्रिकोणीय समीकरण में एक नई रणनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है, जिसने ‘चिकन नेक’ की सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन को लेकर बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है.
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