नोबेल नहीं मिला, अब शांति पर भरोसा नहीं……………….

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें नोबेल न मिलने की शिकायत की गई है। पोलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने लिखा कि 8 जंग रुकवाने के बावजूद उन्हें नोबेल नहीं मिला। इसलिए अब उन्होंने शांति के बारे में सोचना छोड़ दिया है। ट्रम्प […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 20 जनवरी 2026, 05:31 AM 7 मिनट read
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नोबेल नहीं मिला, अब शांति पर भरोसा नहीं……………….
Photo: UB India News Archive

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें नोबेल न मिलने की शिकायत की गई है। पोलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने लिखा कि 8 जंग रुकवाने के बावजूद उन्हें नोबेल नहीं मिला। इसलिए अब उन्होंने शांति के बारे में सोचना छोड़ दिया है। ट्रम्प ने आगे लिखा-

शांति जरूरी है, लेकिन अब वह यह भी सोचेंगे कि अमेरिका के हित में क्या सही है। ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की उनकी कोशिश की एक वजह नोबेल शांति पुरस्कार न मिलना भी है। इसकी वजह से उनके फैसले पर भी असर पड़ रहा है।

नॉर्वे के पीएम ने ट्रम्प की चिट्ठी मिलने की पुष्टि की है। दरअसल, उन्होंने और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने मिलकर ट्रम्प को टैरिफ बढ़ाने के फैसले के विरोध में एक चिट्ठी भेजी थी। इसके जवाब में ट्रम्प ने नोबेल न मिलने की शिकायत कर दी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अप्रैल 2025 में व्हाइट हाउस में नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अप्रैल 2025 में व्हाइट हाउस में नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी।

ट्रम्प बोले- ग्रीनलैंड पर हमारा पूरा कंट्रोल होने तक दुनिया सुरक्षित नहीं

ट्रम्प ने चिट्ठी में आगे लिखा-

डेनमार्क उस जमीन (ग्रीनलैंड) को रूस या चीन से बचा नहीं सकता। फिर सवाल यह है कि उनका उस पर मालिकाना हक आखिर क्यों है? ऐसा कोई लिखित दस्तावेज नहीं है। बस इतना है कि सैकड़ों साल पहले वहां उनकी एक नाव पहुंची थी, लेकिन हमारी नावें भी वहां पहुंची थीं।

ट्रम्प ने आगे लिखा कि NATO की स्थापना के बाद से उन्होंने किसी से भी ज्यादा NATO के लिए काम किया है। अब NATO को भी अमेरिका के लिए कुछ करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दुनिया तब तक सुरक्षित नहीं है, जब तक ग्रीनलैंड पर अमेरिका का पूरा कब्जा नहीं हो जाता। उन्होंने दावा किया कि ग्रीनलैंड अमेरिका के हाथ में होने से NATO और ज्यादा मजबूत और प्रभावी हो जाएगा।

ट्रम्प को मांगने पर भी नोबेल पीस प्राइज नहीं मिला था

ट्रम्प हमेशा नोबेल शांति पुरस्कार लेने की इच्छा जताते रहे हैं। ट्रम्प ने सबसे पहले नोबेल लेने की इच्छा भारत-पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए संघर्ष को रुकवाने के दावे की साथ जताई थी।

उन्होंने कहा था कि उनके कारण न्यूक्लियर देशों के बीच जंग की स्थिति टली। पाकिस्तान ने ट्रम्प को धन्यवाद देते हुए उन्हें नोबेल के लिए नॉमिनेट भी किया था। हालांकि, भारत हमेशा ट्रम्प के इस दावे को खारिज करता आया है।

अक्टूबर 2025 में वेनेजुएलाई नेता मारिया मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें ‘वेनेजुएला के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए उनके प्रयासों और तानाशाही से शांतिपूर्ण लड़ाई’ के लिए यह सम्मान मिला था। जब यह मचाडो को मिला तो ट्रम्प ने नाराजगी जताई थी।

उन्होंने कहा था कि जिमी कार्टर के बाद वह पहले राष्ट्रपति हैं जिन्होंने कोई नया युद्ध शुरू नहीं किया।

माचाडो ने अपना नोबेल ट्रम्प को सौंपा

माचाडो ने हाल ही में अपने नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल ट्रम्प को गिफ्ट कर दिया था। ट्रम्प ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो से मुलाकात की।

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा करने के बाद यह उनकी किसी भी वेनेजुएलाई नेता से पहली आमने-सामने की मुलाकात थी।

मुलाकात के बाद माचाडो ने कहा, ‘मुझे लगता है कि आज हम वेनेजुएलावासियों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। हम ट्रम्प पर भरोसा कर रहे।’

मारिया ने ट्रम्प को अपना नोबेल शांति पुरस्कार दिया। इस पर लिखा था कि ट्रम्प को वेनेजुएला के लोगों की तरफ से यह भेंट किया जा रहा है। ट्रम्प ने वेनेजुएला की आजादी के लिए जो किया उसे वेनेजुएला के लोग कभी नहीं भूलेंगे।
मारिया ने ट्रम्प को अपना नोबेल शांति पुरस्कार दिया। इस पर लिखा था कि ट्रम्प को वेनेजुएला के लोगों की तरफ से यह भेंट किया जा रहा है। ट्रम्प ने वेनेजुएला की आजादी के लिए जो किया उसे वेनेजुएला के लोग कभी नहीं भूलेंगे।

फोटो के जरिए ग्रीनलैंड को अमेरिका ने चेतावनी दी थी

व्हाइट हाउस में 14 जनवरी को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन और ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्जफेल्ट ने बैठक की थी। इस बैठक में कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ।

बैठक के बाद व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण को बढ़ावा दिया गया। तस्वीर में सड़क पर ग्रीनलैंड का झंडा लगे दो स्लेज दिखाई दे रही हैं।

एक रास्ता व्हाइट हाउस और अमेरिकी झंडे की ओर जाता है, जबकि दूसरा रास्ता अंधेरे और बिजली की ओर जाता है। जहां चीन और रूस का झंडा लगा है। तस्वीर के साथ कैप्शन लिखा है, “ग्रीनलैंड किस तरफ जाओगे?”

तस्वीर के जरिए ट्रम्प ग्रीनलैंड पर दबाव बनाना चाहते हैं कि अगर चीन-रूस की तरह गए तो अंजाम बुरा हो सकता है। जबकि अमेरिका की तरफ आने से शांति रहेगी।

तस्वीर व्हाइट हाउस ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट की।
तस्वीर व्हाइट हाउस ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट की।

ट्रम्प ने 8 यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाया

डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोप के 8 देशों पर 10% टैरिफ लगा दिया है। ये देश ग्रीनलैंड पर अमेरिका के कब्जे की धमकी का विरोध कर रहे थे।

ट्रम्प ने शनिवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड टैरिफ के दायरे में आएंगे। इन पर 1 फरवरी से टैरिफ लागू होगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के साथ कोई समझौता नहीं होता है, तो 1 जून से यह टैरिफ बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा। इससे पहले ट्रम्प ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में एक बैठक के दौरान इन देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी।

  • खास भौगोलिक स्थिति: ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति बहुत खास है। यह उत्तर अमेरिका और यूरोप के बीच, यानी अटलांटिक महासागर के बीचों-बीच के पास स्थित है। इसी वजह से इसे मिड-अटलांटिक क्षेत्र में एक बेहद अहम ठिकाना माना जाता है।
  • रणनीतिक सैन्य महत्व: ग्रीनलैंड यूरोप और रूस के बीच सैन्य और मिसाइल निगरानी के लिए बेहद अहम है। यहां अमेरिका का थुले एयर बेस पहले से है, जो मिसाइल चेतावनी और रूसी/चीनी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जरूरी है।
  • चीन और रूस पर नजर: आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की गतिविधियां बढ़ रही हैं। ग्रीनलैंड पर प्रभाव होने से अमेरिका इस इलाके में अपनी भू-राजनीतिक पकड़ मजबूत रखना चाहता है।
  • प्राकृतिक संसाधन: ग्रीनलैंड में दुर्लभ खनिज, तेल, गैस और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के बड़े भंडार माने जाते हैं, जिनका भविष्य में आर्थिक और तकनीकी महत्व बहुत ज्यादा है। चीन इनका 70-90% उत्पादन नियंत्रित करता है, इसलिए अमेरिका अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।
  • नई समुद्री व्यापारिक राहें: ग्लोबल वार्मिंग के कारण आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है, जिससे नई शिपिंग रूट्स खुल रही हैं। ग्रीनलैंड का नियंत्रण अमेरिका को इन रूटों पर प्रभुत्व और आर्कटिक क्षेत्र में रूस-चीन की बढ़त रोकने में मदद करेगा।
  • अमेरिकी सुरक्षा नीति: अमेरिका ग्रीनलैंड को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की “फ्रंट लाइन” मानता है। वहां प्रभाव बढ़ाकर वह भविष्य के संभावित खतरों को पहले ही रोकना चाहता है।
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