गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि उर्सुला वॉन डेर लेयेन को क्यों कहा जाता है आयरन लेडी…………

भारत के लिए 77वां गणतंत्र दिवस बेहद खास साबित होने वाला है। दरअसल, इस मौके पर भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुफ्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर मुहर लगने की संभावना है। इसके लिए यूरोपीय आयोग (यूरोपियन कमीशन) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन और यूरोपीय परिषद (यूरोपियन काउंसिल) के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा गणतंत्र […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 26 जनवरी 2026, 06:41 AM 9 मिनट read
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गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि उर्सुला वॉन डेर लेयेन को क्यों कहा जाता है आयरन लेडी…………
Photo: UB India News Archive

भारत के लिए 77वां गणतंत्र दिवस बेहद खास साबित होने वाला है। दरअसल, इस मौके पर भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुफ्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर मुहर लगने की संभावना है। इसके लिए यूरोपीय आयोग (यूरोपियन कमीशन) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन और यूरोपीय परिषद (यूरोपियन काउंसिल) के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य अतिथि के तौर पर भारत भी पहुंच चुके हैं। उनके साथ यूरोप के दर्जनभर अधिकारी भी भारत आए हैं। माना जा रहा है कि परेड के ठीक बाद भारत और यूरोप के अफसर भारत-ईयू के बीच एफटीए पर हस्ताक्षर कर दोनों पक्षों के रिश्तों को नई दिशाएं देंगे।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर गणतंत्र दिवस पर इस बार मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित- यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन कौन हैं? उनका शुरुआती जीवन कैसा रहा है? कैसे वे शिक्षा जगत में नाम बनाने के बाद अपने करियर में आगे बढ़ते हुए राजनीति में दाखिल हुईं और फिर 27 देशों के संगठन यूरोपीय संघ (ईयू) की प्रतिनिधि के तौर पर स्थापित हुईं? उनके साथ क्या विवाद जुड़े हैं? इसके अलावा उनका निजी जीवन और उनकी अमीरी से जुड़े क्या किस्से हैं?  
कौन हैं गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि- उर्सुला वॉन डेर लेयन?

उर्सुला वॉन डेर लेयन मौजूदा समय में यूरोपीय संघ (ईयू) के मामलों को संभालने वाले केंद्रीय आयोग- यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष हैं। इसलिए उन्हें कई बार यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष भी कहा जाता है। इस पद के लिए हर पांच साल में यूरोप में चुनाव होते हैं और यूरोपीय देशों (फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, हंगरी समेत 27 देश) के अलग-अलग राजनीतिक दल इस चुनाव में उम्मीदवारी पेश करते हैं और चुनाव में हिस्सा लेते हैं।

उर्सुला वॉन डेर लेयन 2019 में पहली बार ईयू के चुनाव में खड़ी हुई थीं और इसमें जीती भीं। उन्हें जर्मनी के सत्तासीन दल- क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) की तरफ से नामित किया गया था, जो कि जर्मनी का प्रमुख दल है। जर्मनी की तत्कालीन चांसलर एंजेला मर्केल भी इसी पार्टी से थीं और उनकी सरकार में वॉन डेर लेयन रक्षा मंत्री रही थीं।

उर्सुला ने 2024 में हुए ईयू के चुनाव में लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष के तौर पर वे दुनिया के सामने 27 देशों के संगठन का नेतृत्व करती हैं और यूरोप की बहुमत वाली एक सम्मिलित आवाज के तौर पर काम करती हैं।

क्या है उर्सुला की पृष्ठभूमि, कहां से आईं; कैसे बीता बचपन?

पिता थे यूरोपीय आयोग के अधिकारी, बचपन में ही हुई वैश्विक राजनीति से पहचान
उर्सुला वॉन डेर लेयन का जन्म 8 अक्तूबर 1958 को बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में हुआ था, जो कि यूरोपीय संघ की राजधानी है। मूलतः उर्सुला का परिवार जर्मनी से नाता रखता है, लेकिन उनका जन्म ब्रसेल्स में क्यों हुआ, इसका नाता उनके पिता अर्न्स्ट आलरेक से है, जो कि खुद यूरोपीय संघ (ईयू) के बड़े नेता रहे और लंबे समय तक ब्रसेल्स में ही तैनात रहे।उर्सुला के पिता यूरोपीय आयोग की सेवाओं से हटने के बाद जर्मनी में लोअर सैक्सनी के प्रमुख (मुख्यमंत्री के बराबर पद) बने। उर्सुला की मां, हाइडी-एडेल आलरेक भी शिक्षाविद् रहीं। उनके पास डॉक्टरेट की उपाधि थी और वह बच्चों को पढ़ाई के लिए बहुत प्रोत्साहित करती थीं। ऐसे में उर्सुला को भी पढ़ाई और कूटनीति समझने के लिए जबरदस्त माहौल मिला।

शुरुआती वर्षों में वह ब्रसेल्स में पली-बढ़ीं और बचपन से ही जर्मन और फ्रेंच (यूरोप की दो प्रमुख भाषाएं) दोनों भाषाएं धाराप्रवाह बोलती थीं। हालांकि, जब वह 13 वर्ष की थीं, तब उनका परिवार जर्मनी लौट गया। उनका परिवार हैनोवर के पास एक बड़े फार्म हाउस में रहता था, जहां उर्सुला को घुड़सवारी का शौक हुआ।

उर्सुला की शिक्षा यूरोप के कुछ सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में हुई। उन्होंने ब्रसेल्स के यूरोपियन स्कूल में पढ़ाई की, जो राजनयिकों और यूरोपीय नौकरशाहों के बच्चों के लिए एक बेहतरीन स्कूल है। बाद में उन्होंने गोटिंगेन विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स  से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की। उनके जीवन का एक अहम पहलू यह है कि लंदन में पढ़ाई के दौरान सुरक्षा कारणों से उन्होंने अपना नाम बदलकर रोज लैडसन रख लिया था। इसकी वजह यह थी कि उस दौरान यूरोप के वामपंथी उग्रवादी अलग-अलग जगहों पर जर्मन नेताओं और उनके परिवारवालों को निशाना बना रहे थे।

अर्थशास्त्र पढ़ा, फिर चिकित्सा को करियर के लिए चुना
शुरुआत में अर्थशास्त्र पढ़ने के बाद उर्सुला ने आगे चिकित्सा के क्षेत्र को चुन लिया। उन्होंने जर्मनी के हैनोवर मेडिकल स्कूल से पढ़ाई पूरी की। वह एक प्रशिक्षित मेडिकल डॉक्टर बनीं और हैनोवर मेडिकल स्कूल के महिला क्लिनिक में सहायक डॉक्टर के रूप में भी कार्य किया।जर्मनी में डॉक्टर के तौर पर काम करते हुए ही उर्सुला की मुलाकात हाइको वॉन डेर लेयन से हुई, जो कि खुद मेडिकल स्कूल में डॉक्टर थे। दोनों ने 1986 में शादी कर ली। हालांकि, कुछ साल बाद ही हाइको को शोध कार्यों के लिए अमेरिका जाने का मौका मिला। उर्सुला ने तब पति का साथ चुना और 1990 के दशक में अमेरिका के टॉप विश्वविद्यालय- स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में अध्ययन किया। यहां उन्होंने वैश्विक मामलों पर अमेरिकी परिप्रेक्ष्य को भी गहराई से समझा।

राजनीति में एंट्री की क्या है कहानी, कैसे बनाया नाम?

उर्सुला वॉन डेर लेयन ने अपने करियर की शुरुआत एक डॉक्टर के रूप में की थी, लेकिन अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए उन्होंने **40 के दशक की उम्र** में राजनीति में कदम रखा। वह जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल की **सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाली कैबिनेट सदस्य** रहीं, जिन्होंने 2005 से 2019 तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।

ऐसे शुरू हुआ राजनीतिक उभार
1990 में उर्सुला ने जर्मनी की प्रमुख पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) की सदस्यता ले ली। हालांकि, इसके बाद वे अमेरिका चली गईं और 1992 से 1996 के बीच घरेलू राजनीति से दूर रहीं। जर्मनी लौटने के बाद उन्होंने अपने राजनीतिक करियर को फिर शुरू करने की कोशिशें शुरू कर दीं। उर्सुला को एक अच्छे वक्ता के तौर पर जाना जाता था। साथ ही उनके पिता की सियासी पृष्ठभूमि भी थी। इन दोनों ही बातों का उन्हें फायदा मिला और वे पार्टी में धीरे-धीरे आगे बढ़ती रहीं। उनके सियासी जीवन में परिवर्तन 2003 में आया, जब उन्हें लोअर सैक्सनी में राज्य मामलों की सामाजिक मंत्री का पद मिला।

जर्मनी की राजनीति में कैसा रहा उर्सुला का सियासी सफर? 

सामाजिक सुधार: श्रम और सामाजिक मामलों का मंत्रालय संभालने के दौरान उन्होंने परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाने के लिए क्रांतिकारी सुधार किए। उनके कार्यकाल के दौरान जर्मनी में यह संदेश गूंजा था कि परिवार को पालना मां की नहीं, बल्कि दोनों माता-पिता की साझा जिम्मेदारी है।

सेना में सुधार: रक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने सेना में लैंगिक समानता और आधुनिकीकरण पर जोर दिया। इसमें उन्हें चांसलर एंजेला मर्केल का भी जबरदस्त समर्थन मिला।

विवाद से जुड़ा नाता: रक्षा मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान बाहरी सलाहकारों को दिए गए अनुबंधों में अनियमितताओं के मामले सामने आए। इसे लेकर उनकी आलोचना भी हुई और इसकी संसदीय जांच की गई।

काम के प्रति समर्पित नेता के तौर पर पहचान: उर्सुला वॉन डेर लेयन को उनकी कार्यक्षमता के कारण वर्कऑहलिक (काम के प्रति अत्यधिक समर्पित) के तौर पर पहचाना गया। 2019 में वह यूरोपीय आयोग की पहली महिला अध्यक्ष बनीं। बताया जाता है कि वह ब्रसेल्स में अपने कार्यालय के साथ लगे एक छोटे से स्टूडियो में ही रहती हैं।

यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष के तौर पर कैसा रहा सफर?

कैसा रहा है उर्सुला का निजी जीवन, अमीरी के क्या किस्से?

एक संपन्न और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार में जन्म होने के बावजूद उर्सुला ने खुद की अलग पहचान बनाई। न सिर्फ एक कुशल डॉक्टर, बल्कि राजनीतिज्ञ और निजी जीवन में भी वे बेहद समर्पित रही हैं। खासकर अपने सात बच्चों को संभालते हुए उन्होंने निजी जीवन में भी कई उपलब्धियां पाईं।

  • उर्सुला के पति हाइको चिकित्सा के प्रोफेसर और एक मेडिकल इंजीनियरिंग कंपनी के सीईओ हैं। उनकी मुलाकात तब हुई थी जब वे दोनों विश्वविद्यालय के बैंड का हिस्सा थे।
  • उनके सात बच्चे हैं- डेविड, सोफी, डोनाटा, जुड़वां बच्चे विक्टोरिया और जोहाना; एग्मोंट और ग्रासिया। उर्सुला ने कई महीने एक मां के तौर पर राजनीति से दूरी भी बनाई है।
  • उन्हें घुड़सवारी का शौक है और वह अक्सर वीकेंड्स में अपने जर्मनी वाले घर पर घोड़े की सवारी करती हैं। वह पियानो बजाती हैं और उन्हें शास्त्रीय संगीत में भी रुचि रखती हैं।

क्या है उर्सुला की आय-नेटवर्थ?

  • 2025 तक उनकी अनुमानित कुल संपत्ति करीब 3.5 से 4 मिलियन डॉलर के बीच आंकी गई। ईयू की अध्यक्ष के रूप में उनका वार्षिक वेतन और भत्ते मिलाकर 4 लाख यूरो (लगभग 3.6 करोड़ रुपये) से ज्यादा है।
  • उनका मूल घर जर्मनी के हैनोवर के पास एक 200 साल पुराना ऐतिहासिक फार्महाउस है। इसमें लाइब्रेरी के साथ कई आलीशान व्यवस्थाएं हैं। इसके अलावा, स्विट्जरलैंड में उनका एक हॉलिडे शैलेट भी है।आधिकारिक तौर पर वह मर्सिडीज-बेंज एस-क्लास (बख्तरबंद) में यात्रा करती हैं, जिसकी कीमत 140,000 डॉलर से ज्यादा है। निजी उपयोग के लिए उनके पास ऑडी ई-ट्रॉन और बीएमडब्ल्यू आईएक्स जैसी प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारें हैं।
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