एक देश या दो देश पूरी दुनिया के फैसले तय नहीं कर सकते…………..

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने कहा है कि दुनिया की बड़ी समस्याओं का समाधान किसी एक देश के फैसले थोपने से या दुनिया को ताकतों के गुटों में बांटने से नहीं होगा. उनके ये बयान अमेरिका और चीन की भूमिका की ओर इशारा करते हैं. गुटेरेस ने यह बात अपने कार्यकाल के आखिरी, […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 30 जनवरी 2026, 08:47 AM 4 मिनट read
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एक देश या दो देश पूरी दुनिया के फैसले तय नहीं कर सकते…………..
Photo: UB India News Archive

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने कहा है कि दुनिया की बड़ी समस्याओं का समाधान किसी एक देश के फैसले थोपने से या दुनिया को ताकतों के गुटों में बांटने से नहीं होगा. उनके ये बयान अमेरिका और चीन की भूमिका की ओर इशारा करते हैं. गुटेरेस ने यह बात अपने कार्यकाल के आखिरी, यानी दसवें साल की शुरुआत पर पत्रकारों से बातचीत में कही.

एक देश या दो देश दुनिया तय नहीं कर सकते
गुटेरेस ने साफ कहा कि न तो एक देश पूरी दुनिया के फैसले कर सकता है और न ही दो बड़ी ताकतें दुनिया को अपने-अपने प्रभाव वाले इलाकों में बांट सकती हैं. उन्होंने कहा कि अगर दुनिया को स्थिर, शांत और विकासशील बनाना है तो कई देशों की भागीदारी जरूरी है. इसे उन्होंने ‘बहुध्रुवीय दुनिया’ (मल्टीपोलर वर्ल्ड) का समर्थन बताया.

अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती खाई पर चिंता
गुटेरेस ने कहा कि आज दुनिया में यह सोच बढ़ रही है कि भविष्य दो ध्रुवों पर टिका होगा- एक अमेरिका और दूसरा चीन. लेकिन यह सोच खतरनाक हो सकती है. उन्होंने कहा कि शांति और विकास के लिए सभी देशों को साथ लेकर चलना जरूरी है. उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत सारी पॉजिटिव उम्मीदों के साथ हाल के ट्रेड एग्रीमेंट देख रहा हूं. जैसे भारत और EU के बीच हाल ही में हुआ समझौता.’

संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और सुरक्षा परिषद सुधार
गुटेरेस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद की है. उन्होंने जोर देकर कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार बेहद जरूरी है. उनका कहना था कि जो देश संयुक्त राष्ट्र को कमजोर बताते हैं, वही इसके सुधार का विरोध भी करते हैं, इसी वजह से कई बार संयुक्त राष्ट्र उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पाता.

ट्रंप की नीतियों पर टिप्पणी
गुटेरेस के बयान ऐसे समय आए हैं जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिर से ‘प्रभाव क्षेत्र’ की नीति को आगे बढ़ा रहे हैं. ट्रंप पश्चिमी क्षेत्र में अमेरिका की ताकत बढ़ाने की बात कर चुके हैं. हाल ही में उन्होंने एक ‘शांति बोर्ड’ भी शुरू किया है, जिसकी भूमिका को लेकर कुछ देश चिंतित हैं.

दुनिया में बढ़ते संघर्ष और कानून की अनदेखी
गुटेरेस ने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय कानून की अनदेखी हो रही है, देशों के बीच सहयोग कम हो रहा है और बहुपक्षीय संस्थाएं दबाव में हैं. उन्होंने कहा कि सजा न मिलने की सोच ने कई संघर्षों को बढ़ावा दिया है और हालात और खराब किए हैं.

संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक परेशानी
संयुक्त राष्ट्र इस समय पैसों की कमी से भी जूझ रहा है. अमेरिका ने कई यूएन एजेंसियों को मिलने वाला फंड कम कर दिया है और कुछ जरूरी भुगतान भी नहीं किए हैं. इसके चलते गुटेरेस ने खर्च घटाने और कामकाज सुधारने के लिए एक सुधार समूह बनाया है.

संघर्षों से भरा रहा दूसरा कार्यकाल
गुटेरेस के दूसरे कार्यकाल में यूक्रेन युद्ध, अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी, सूडान संघर्ष, गाजा युद्ध, सीरिया संकट का अंत और वेनेजुएला से जुड़ी घटनाएं शामिल रहीं.

शांति के लिए संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबद्धता
अंत में गुटेरेस ने कहा कि तमाम मुश्किलों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र साझा मूल्यों को जिंदा रखने के लिए काम करता रहेगा. उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य ऐसी शांति है जो न्यायपूर्ण हो, लंबे समय तक टिके और समस्याओं की जड़ पर काम करे.

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