पीड़ित छात्रा पटना में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी और एक गर्ल्स हॉस्टल में रह रही थी. 26 दिसंबर को छात्रा का पूरा परिवार अचानक हॉस्टल पहुंचा और उसे जहानाबाद स्थित घर ले गया. इस दौरान CCTV फुटेज में छात्रा और परिजनों का व्यवहार जांच के दायरे में आया. छात्रा 26 दिसंबर से 5 जनवरी तक घर पर रही. इस दौरान उसकी मानसिक स्थिति, मोबाइल सर्च हिस्ट्री और संपर्कों की जांच की जा रही है. 5 जनवरी को छात्रा पटना लौटी. इसी दिन रात 9:30 बजे से घटनाक्रम को सबसे अहम माना जा रहा है. 5 जनवरी रात 9:30 बजे से 6 जनवरी दोपहर 2 बजे तक हॉस्टल में गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं. इस दौरान 17 घंटे का CCTV फुटेज गायब या उपलब्ध न होने का सवाल उठा. 6 जनवरी को छात्रा की हालत गंभीर हुई और बाद में उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. पोस्टमार्टम और FSL जांच में छात्रा के कपड़ों पर स्पर्म मिलने के बाद रेप की आशंका सामने आई. इसके बाद मामला दर्ज हुआ.
मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई. CID ने SIT की जांच पर सवाल उठाते हुए 59 बिंदुओं की विशेष गाइडलाइन जारी की. CID ने आशंका जताई कि छात्रा को हॉस्टल में एंटी-डिप्रेसेंट या सेडेटिव दवाएं दी गईं. कमरे से तीन खाली दवा स्ट्रिप मिलने और केवल एक स्ट्रिप पुलिस को सौंपे जाने से संदेह गहराया. CCTV कैमरे की कमी, वार्डेन की भूमिका, हॉस्टल मालिक और उसके परिजनों की गतिविधियां जांच के दायरे में आईं. FSL रिपोर्ट में स्पर्म की उम्र 18–21 वर्ष के युवक से मेल खाने के बाद 4–5 युवकों को सबसे संदिग्ध माना गया. अब तक 25 लोगों के DNA सैंपल लिए गए हैं. 18–21 वर्ष आयु वर्ग के युवकों के कॉल डिटेल, लोकेशन और टावर डंप खंगाले जा रहे हैं. डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मामले की CBI जांच की सिफारिश की. राज्य सरकार की ओर से केंद्र से CBI जांच का आग्रह किया गया. अब केंद्र के फैसले का इंतजार है. यह मामला फिलहाल जांच के अहम मोड़ पर है और कई एंगल से पड़ताल जारी है.








