वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि ISM 1.0 की सफलता के आधार पर हम ISM 2.0 लॉन्च करेंगे, जिससे उपकरण और मटेरियल का उत्पादन, फुल-स्टैक भारतीय IP का डिजाइन और सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा. उन्होंने वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव के बीच सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता की रणनीतिक अहमियत को भी रेखांकित किया. वित्तमंत्री ने कहा कि अप्रैल 2025 में 22,919 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू की गई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है.
इस स्कीम के तहत निवेश के वादे उसकी मूल लक्ष्य से लगभग दोगुने हो चुके हैं, जो भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है. इस रफ्तार को बरकरार रखने के लिए वित्तमंत्री ने स्कीम के बजट को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है. उम्मीद है कि इस बढ़ी हुई राशि से देश में इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में वैल्यू एडिशन बढ़ेगा, जरूरी कंपोनेंट्स के आयात पर निर्भरता कम होगी और भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को वैश्विक सप्लाई चेन में और मजबूती मिलेगी.
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) प्रदाताओं ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है. उनका कहना है कि यह सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के लिए पूरा इकोसिस्टम बनाने और स्थानीय मूल्य संवर्धन बढ़ाने की गंभीर मंशा को दर्शाता है. ऑप्टिमस इंफ्राकॉम के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अशोक गुप्ता ने कहा कि सरकार मजबूत स्थानीय सप्लाई चेन बनाने के लिए हर संभव कदम उठा रही है, जिसे उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री और इससे जुड़े क्षेत्रों की जीवनरेखा बताया. अब समय आ गया है कि इंडस्ट्री लीडर्स मिलकर इसे बड़ी सफलता बनाएं. जनवरी में केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तीसरे चरण के तहत 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी थी, जिसमें 41,863 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है. इन यूनिट्स से 2.58 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन और करीब 34,000 प्रत्यक्ष नौकरियों की उम्मीद है.








