‘घूसखोर पंडित’ फिल्म पर बढ़ा विवाद..

अभिनेता मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के नाम को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। भोपाल, लखनऊ सहित देश में विरोध के स्वर तेज हो रहे हैं। फिल्म के नाम को लेकर पनपे विरोध के बीच भाजपा सांसद व सूचना प्रौद्योगिकी मामले की समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने अपने […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 6 फरवरी 2026, 07:11 AM 6 मिनट read
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‘घूसखोर पंडित’ फिल्म पर बढ़ा विवाद..
Photo: UB India News Archive

अभिनेता मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के नाम को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। भोपाल, लखनऊ सहित देश में विरोध के स्वर तेज हो रहे हैं। फिल्म के नाम को लेकर पनपे विरोध के बीच भाजपा सांसद व सूचना प्रौद्योगिकी मामले की समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि मैं आईटी कमेटी का चेयरमैन। मैं इस बारे में आपको चर्चा करने के बाद ही बता सकता हूं।

झारखंड के गोड्डा से चार बार के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे संचार और सूचना प्रौद्योगिकी की स्थायी समिति के अध्यक्ष है। ऐसे में जब इस पूरे विवाद पर उनसे प्रतिक्रिया जाननी चाही तो उन्होंने कहा कि, ‘देखिए, मैं उस कमेटी का चेयरमैन हूं, मैं आईटी कमेटी का चेयरमैन हूं। मैं इस बारे में आपको चर्चा करने के बाद ही बता सकता हूं।’
एफएमसी ने मेकर्स को टाइटल को लेकर भेजा नोटिस
फिल्म निर्माता संघ (एफएमसी) ने भी ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर मेकर्स को नोटिस जारी किया है। एफएमसी का कहना है कि मेकर्स ने नियमों के अनुसार शीर्षक के लिए अनिवार्य अनुमति प्राप्त नहीं की थी। नोटिस में कहा गया कि फिल्म निर्माता नीरज पांडे, जो इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के सदस्य हैं, उन्होंने ‘घुसखोर पंडित’ शीर्षक के उपयोग के लिए अनुमति लेने के लिए आवेदन नहीं किया था। ऐसे में बिना अनुमति के इसका उपयोग अनुशासनात्मक कार्रवाई का कारण बन सकता है।

विवाद पर मेकर्स और एक्टर की सफाई
विरोध बढ़ने के बाद फिल्म के निर्माता नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी ने एक बयान जारी कर पूरे मामले पर स्पष्टीकरण दिया है। दोनों ने फिल्म के उद्देश्य और शीर्षक को लेकर भी सफाई दी। साथ ही प्रचार सामग्री चीजें हटाने की भी बात कही है।

अभिनेता मनोज बाजपेयी ने पोस्ट क्या लिखा?
मनोज बाजपेयी ने अपनी बयान में कहा कि, ‘लोगों द्वारा साझा की गई भावनाओं और चिंताओं का मैं सम्मान करता हूं और उन्हें गंभीरता से लेता हूं। जब आप जिस चीज का हिस्सा होते हैं, उससे कुछ लोगों को ठेस पहुंचती है, तो यह आपको रुककर उनकी बात सुनने के लिए मजबूर कर देता है। एक अभिनेता के रूप में, मैं किसी फिल्म में अपने द्वारा निभाए जा रहे किरदार और कहानी के माध्यम से ही प्रवेश करता हूं। मेरे लिए यह एक गलत व्यक्ति और उसकी आत्म-साक्षात्कार की यात्रा के बारे में था।’

उन्होंने आगे कहा कि इसका उद्देश्य किसी भी समुदाय के बारे में कोई टिप्पणी करना नहीं था। नीरज पांडे के साथ काम करने के अपने अनुभव में मैंने देखा है कि वो अपनी फिल्मों के प्रति हमेशा गंभीरता और सावधानी बरतते हैं। जनता की भावनाओं को देखते हुए फिल्म निर्माताओं ने प्रचार सामग्री को हटाने का निर्णय लिया है। यह इस बात को दर्शाता है कि चिंताओं को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।

एफएमसी ने मेकर्स को टाइटल को लेकर भेजा नोटिस
फिल्म निर्माता संघ (एफएमसी) ने भी ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर मेकर्स को नोटिस जारी किया है। एफएमसी का कहना है कि मेकर्स ने नियमों के अनुसार शीर्षक के लिए अनिवार्य अनुमति प्राप्त नहीं की थी। नोटिस में कहा गया कि फिल्म निर्माता नीरज पांडे, जो इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के सदस्य हैं, उन्होंने ‘घुसखोर पंडित’ शीर्षक के उपयोग के लिए अनुमति लेने के लिए आवेदन नहीं किया था। ऐसे में बिना अनुमति के इसका उपयोग अनुशासनात्मक कार्रवाई का कारण बन सकता है।

विवाद पर मेकर्स और एक्टर की सफाई
विरोध बढ़ने के बाद फिल्म के निर्माता नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी ने एक बयान जारी कर पूरे मामले पर स्पष्टीकरण दिया है। दोनों ने फिल्म के उद्देश्य और शीर्षक को लेकर भी सफाई दी। साथ ही प्रचार सामग्री चीजें हटाने की भी बात कही है।

अभिनेता मनोज बाजपेयी ने पोस्ट क्या लिखा?
मनोज बाजपेयी ने अपनी बयान में कहा कि, ‘लोगों द्वारा साझा की गई भावनाओं और चिंताओं का मैं सम्मान करता हूं और उन्हें गंभीरता से लेता हूं। जब आप जिस चीज का हिस्सा होते हैं, उससे कुछ लोगों को ठेस पहुंचती है, तो यह आपको रुककर उनकी बात सुनने के लिए मजबूर कर देता है। एक अभिनेता के रूप में, मैं किसी फिल्म में अपने द्वारा निभाए जा रहे किरदार और कहानी के माध्यम से ही प्रवेश करता हूं। मेरे लिए यह एक गलत व्यक्ति और उसकी आत्म-साक्षात्कार की यात्रा के बारे में था।’

उन्होंने आगे कहा कि इसका उद्देश्य किसी भी समुदाय के बारे में कोई टिप्पणी करना नहीं था। नीरज पांडे के साथ काम करने के अपने अनुभव में मैंने देखा है कि वो अपनी फिल्मों के प्रति हमेशा गंभीरता और सावधानी बरतते हैं। जनता की भावनाओं को देखते हुए फिल्म निर्माताओं ने प्रचार सामग्री को हटाने का निर्णय लिया है। यह इस बात को दर्शाता है कि चिंताओं को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।

ब्राह्मणों के अपमान वाली फिल्म पर लगे प्रतिबंध”, मायावती

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने ब्राह्मणों के अपमान पर चिंता जताते हुए ‘घूसखोर पंडित’ फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

बसपा सुप्रीमो ने शुक्रवार को जारी अपने बयान में कहा कि यह दुख व चिंता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यूपी में ही नहीं, बल्कि अब फिल्मों में भी ‘पंडित’ को घूसखोर बताकर पूरे देश में इनका अपमान और अनादर किया जा रहा है। इससे समूचे ब्राह्मण समाज में जबरदस्त रोष व्याप्त है। बसपा इसकी कड़े शब्दों में निंदा करती है। ऐसी जातिसूचक फिल्म पर केंद्र सरकार को तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए।

निर्देशक के खिलाफ एफआईआर दर्ज
इसके पहले, हजरतगंज कोतवाली में फिल्म घूसखोर पंडित के निर्देशक व उनकी टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। निर्देशक के खिलाफ जातिगत भावनाएं आहत करने व सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।

लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि समाज में सौहार्द बिगाड़ने और धार्मिक व जातिगत भावनाओं को आहत करने के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की गई है। फिल्म का शीर्षक एक विशेष जाति (ब्राह्मण) को लक्षित कर अपमानित करने के उद्देश्य से रखा गया है जिसे लेकर समाज में भारी रोष एवं आक्रोश व्याप्त है।

जारी किए गए बयान में कहा गया है कि ऐसा लगता है कि डायरेक्टर व उनकी टीम द्वारा समाज में वैमनस्यता फैलाने, शांति व्यवस्था भंग करने और सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से इस सामग्री को प्रकाशित किया गया है। किसी भी समुदाय की भावनाओं को आहत करने और शांति व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी

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