‘चिकन्स नेक’ में बनेगा अंडरग्राउंड रेल कॉरिडोर, चीन और बांग्लादेश को ऐसे मात देगा भारत……….

“चिकन्स नेक” यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर, भारत में जमीन की एक पतली, स्ट्रेटेजिक रूप से जरूरी पट्टी है, जो इसके नॉर्थ-ईस्ट राज्यों को मेनलैंड से जोड़ती है और इंटरनेशनल बॉर्डर के पास होने की वजह रणनीतिक रूप से काफी अहम है. बांग्लादेश में यूनुस सरकार के शासनकाल में “चिकन्स नेक” को लेकर लगातार बयानबाजी हुई है और चीन […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 9 फरवरी 2026, 05:36 AM 5 मिनट read
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‘चिकन्स नेक’ में बनेगा अंडरग्राउंड रेल कॉरिडोर, चीन और बांग्लादेश को ऐसे मात देगा भारत……….
Photo: UB India News Archive

“चिकन्स नेक” यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर, भारत में जमीन की एक पतली, स्ट्रेटेजिक रूप से जरूरी पट्टी है, जो इसके नॉर्थ-ईस्ट राज्यों को मेनलैंड से जोड़ती है और इंटरनेशनल बॉर्डर के पास होने की वजह रणनीतिक रूप से काफी अहम है.

बांग्लादेश में यूनुस सरकार के शासनकाल में “चिकन्स नेक” को लेकर लगातार बयानबाजी हुई है और चीन की इस पर नजर है, लेकिन अब भारत ने “चिकन्स नेक” के आसपास मूलभूत सुविधाओं को विकसित करने का फैसला किया है और एक अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर बनाने के प्लान का खुलासा किया है.

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को कहा कि कि चिकन्स नेक एरिया नॉर्दन पार्ट ऑफ बंगाल में है, वहां एक अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर भी बनाया जाएगा, जिससे किसी भी स्ट्रैटेजिक समय में सुरक्षित तरीके से ट्रांसपोर्टेशन हो सके.

अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर क्यों है खास?

नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे यह अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर बनाएगा. प्रस्तावित अंडरग्राउंड लाइन टिन माइल हाट से रंगापानी और फिर बागडोगरा तक जाएगी. यह डुमडांगी और बागडोगरा के बीच कुल 35.8 किलोमीटर की लंबाई तय करेगी, जिसमें डुमडांगी-रंगपानी सेक्शन 33.4 किलोमीटर का होगा.

इस अलाइनमेंट को मुख्य रूप से एक अंडरग्राउंड कॉरिडोर के तौर पर प्लान किया गया है, ताकि स्ट्रेटेजिक रूप से संवेदशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर में सुरक्षित और बिना रुकावट कनेक्टिविटी पक्की हो सके, जो मुख्य भारत और उत्तर-पूर्वी राज्यों के बीच जमीन के एक पतले हिस्से से होकर एक जरूरी कनेक्शन है, जो हिस्सों में लगभग 22 किलोमीटर चौड़ा है.

कॉरिडोर से होकर गुजरने वाली अंडरग्राउंड रेलवे लाइन, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के साथ इंटरनेशनल बॉर्डर के पास होने की वजह से, सिक्योरिटी से जुड़ी दिक्कतों, प्राकृतिक आपदाओं और भीड़भाड़ के दौरान बिना रुकावट कनेक्टिविटी पक्का करेगी.

अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर में क्या-क्या सुविधाएं?

अंडरग्राउंड अलाइनमेंट एक सुरक्षित और दिखाई न देने वाला दूसरा रास्ता देगा, जिससे जरूरत के समय डिफेंस के लोगों, मिलिट्री के सामान और इमरजेंसी राहत सामग्री की बिना रुकावट आवाजाही हो सकेगी.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने कहा, “यह प्रोजेक्ट बागडोगरा एयर फ़ोर्स स्टेशन और इंडियन आर्मी की 33 कोर के बेंगडुबी आर्मी कैंटोनमेंट के पास होने की वजह से एयर-रेल लॉजिस्टिक्स इंटीग्रेशन को भी सपोर्ट करेगा.

प्रोजेक्ट में 2×25 kV AC इलेक्ट्रिफिकेशन सिस्टम, OFC और क्वाड केबल पर VOIP-बेस्ड कम्युनिकेशन के साथ ऑटोमैटिक सिग्नलिंग (स्टैंडर्ड-IV), RDSO 25-टन एक्सल लोड स्टैंडर्ड के हिसाब से डिज़ाइन किए गए पुल, और टनल बोरिंग मशीन (TBM) मेथडोलॉजी का इस्तेमाल करके ट्विन टनल, क्रॉसओवर के लिए NATM टनल का प्रस्ताव है.

रेलवे मालदा और डिब्रूगढ़ के बीच एक और जोड़ी ट्रैक बिछाने का भी प्लान बना रहा है, जिसका FLS लगभग पूरा हो चुका है. इसके बन जाने के बाद, इस इलाके में कनेक्टिविटी और भी आसान हो जाएगी.

बांग्लादेश से केवल 68 किलोमीटर दूर

दार्जिलिंग के टिन मिल्ली हाट से रंगापानी तक एक अंडरग्राउंड टनल रेलवे बनाया जाएगा. रेल मंत्री ने यह भी बताया कि इन दो स्टेशनों को क्यों चुना गया है. टिन मिल्ली हाट दार्जिलिंग जिले में है. यह सिलीगुड़ी से 10 किलोमीटर दूर है. इसके अलावा, यह बांग्लादेश के पंचगढ़ से सिर्फ 68 किलोमीटर दूर है.

“चिकन्स नेक” में निगरानी और सुरक्षा बढ़ाने के लिए यह रेलवे अब बहुत जरूरी हो जाएगा. “चिकन्स नेक” के जरिए नॉर्थईस्ट इंडिया से कनेक्शन बनाया जा सकता है. मिलिट्री हथियारों से लेकर फ्यूल तक सब कुछ इसी रास्ते से भेजा जाता है. चिकन्स नेक के दक्षिण में बांग्लादेश, पश्चिम में नेपाल और उत्तर में चीन की चुम्बी वैली है. अगर इस “चिकन्स नेक” में थोड़ी सी भी गड़बड़ी हुई तो पूरा नॉर्थईस्ट इंडिया अलग-थलग पड़ जाएगा. सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश को भी खतरा होगा.

अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर क्यों बनाया जा रहा?

केंद्र इस बार अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर क्यों बना रहा है? क्योंकि रेलवे सामान या कार्गो ट्रांसपोर्ट करने का सबसे तेज और सबसे सस्ता तरीका है. उदाहरण के लिए, एक मालगाड़ी में 300 ट्रकों के बराबर सामान ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है. चिकन्स नेक में सारा इंफ्रास्ट्रक्चर ज़मीन से ऊपर है. हमले या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में नुकसान का खतरा रहता है. अगर वहां अंडरग्राउंड टनल हो, तो इन सभी खतरों से बचा जा सकता है.

इसके साथ ही अंडरग्राउंड रेलवे हवाई हमलों या ड्रोन या मिसाइल हमलों से बचाएगा. युद्ध की स्थिति में, अंडरग्राउंड कॉरिडोर सैनिकों की आवाजाही और फ्यूल और दूसरे जरूरी सामानों के ट्रांसपोर्टेशन में मदद करेगा. इसके अलावा, बागडोगरा में एयरफोर्स बेस और बेंगडूबी में इंडियन आर्मी की 33 कोर की छावनी के साथ भी कम्युनिकेशन स्थापित किया जाएगा.

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