बांग्लादेश में चुनावी माहौल गरम है, लेकिन इस बार बहस का केंद्र सिर्फ सत्ता और विपक्ष नहीं, बल्कि मेनिफेस्टो की कॉपी-पेस्ट राजनीति भी बन गई है. बांग्लादेश प्रमुख राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणा पत्र पढ़ने के बाद आपको ऐसा एहसास होगा है कि आप बांग्लादेश की पार्टियों का नहीं, बल्कि भारत सरकार का घोषणा पत्र […]
By UB India News • Patna, Bihar मंगलवार, 10 फरवरी 2026, 08:31 AM • 3 मिनट read
बांग्लादेश में चुनावी माहौल गरम है, लेकिन इस बार बहस का केंद्र सिर्फ सत्ता और विपक्ष नहीं, बल्कि मेनिफेस्टो की कॉपी-पेस्ट राजनीति भी बन गई है. बांग्लादेश प्रमुख राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणा पत्र पढ़ने के बाद आपको ऐसा एहसास होगा है कि आप बांग्लादेश की पार्टियों का नहीं, बल्कि भारत सरकार का घोषणा पत्र देख रहे हैं. दरअसल ऐसा इसलिए है क्योंकि ये पूरा नकलची घोषणा पत्र है. बीएनपी से लेकर जमात और दूसरी पार्टियों के घोषणा पत्र में भी ऐसा ही दिखाई दे रहा है.
बांग्लादेश की कई पार्टियों ने अपने मेनिफेस्टो में जिन योजनाओं का वादा किया है, वे भारत में पहले से लागू और चर्चित योजनाओं की हूबहू नकल जैसी लगती हैं. इनमें बच्चों के लिए मिड डे मील जैसी स्कूल पोषण योजना, किसानों के लिए किसान कार्ड के तर्ज पर सब्सिडी और क्रेडिट स्कीम, युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम, और महिलाओं के लिए मातृ वंदना जैसी मातृत्व सहायता योजना- ये सभी वादे भारतीय मॉडल से सीधे प्रेरित दिखते हैं.
हमीं से मोहब्बत, हमीं से लड़ाई?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह संयोग नहीं है.पिछले एक दशक में भारत की सामाजिक कल्याण योजनाओं ने न सिर्फ घरेलू राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि पड़ोसी देशों के नीति-निर्माताओं का भी ध्यान खींचा है. बांग्लादेश की चुनावी राजनीति में इन्हें डिलीवरी मॉडल के रूप में पेश किया गया, जो साफ-साफ दिखाई दे रहा है. बांग्लादेश की पार्टियां इन योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढाला गया मॉडल बताती हैं, लेकिन नाम, उद्देश्य और संरचना इतनी मिलती-जुलती है कि फर्क करना मुश्किल हो जाता है. अगर आप इन योजनाओं के नाम बदल दें, तो यह घोषणा पत्र नई दिल्ली से जारी किसी चुनावी दस्तावेज जैसा ही लगेगा.
कौन-कौन सी योजनाएं भारतीय स्कीम जैसी?
- बांग्लादेश की सबसे मजबूत पार्टी बीएनपी के घोषणा पत्र में परिवार कार्ड की योजना है, जिसमें वो भारतीय स्कीम्स की तरह ही सत्ता में आने पर गरीब और निम्न आय वाले परिवारों को 2500 टका नगद या जरूरी सामान देने का वादा करती है.
- इसके अलावा किसान कार्ड के वादे के तहत उन्हें सब्सिडी, आसान लोन, फसल बीमा, उचित मूल्य जैसी सुविधा देगी. इसी तरह मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर फोकस करने वाली भारत सरकार की मातृ वंदना जैसी स्कीम की नकल की गई है.
- भारत की कौशल विकास योजना की तरह बीएनपी ने कौशल आधारित फ्री पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षा का वादा किया है. इसके साथ ही 1 करोड़ नौकरियां, स्टार्टअप सपोर्ट और मेरिट बेस्ड नौकरियों का वादा किया है.
- बच्चों के लिए मिड डे मील जैसी योजना का वादा किया गया है और उनके घोषणा पत्र में बांग्लादेश फर्स्ट की नीति का दावा किया गया है.
- वहीं कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी ने अपने मेनिफेस्टो में कहा है कि वो अपने पड़ोसी देशों से सम्मानजनक रिश्ते रखना चाहता है, जिसमें भारत भी शामिल है.