भारत-अमेरिका ट्रेड डील में अब दाल नहीं, व्हाइट हाउस ने फैक्ट शीट में किया बदलाव

व्हाइट हाउस ने इंडिया-US ट्रेड डील पर अपनी फैक्ट शीट में बदलाव किया है. उसने शीट से दाल का जिक्र हटा दिया है और भारत की 500 बिलियन डॉलर की प्रस्तावित खरीद को लेकर शब्दों में भी बदलाव किया है. अमेरिका ने इसे कमिटमेंट (प्रतिबद्ध) से बदलकर इंटेंड (इरादा रखता है) कर दिया है. बता […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 11 फरवरी 2026, 05:02 AM 6 मिनट read
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भारत-अमेरिका ट्रेड डील में अब दाल नहीं, व्हाइट हाउस ने फैक्ट शीट में किया बदलाव
Photo: UB India News Archive

व्हाइट हाउस ने इंडिया-US ट्रेड डील पर अपनी फैक्ट शीट में बदलाव किया है. उसने शीट से दाल का जिक्र हटा दिया है और भारत की 500 बिलियन डॉलर की प्रस्तावित खरीद को लेकर शब्दों में भी बदलाव किया है. अमेरिका ने इसे कमिटमेंट (प्रतिबद्ध) से बदलकर इंटेंड (इरादा रखता है) कर दिया है.

बता दें कि डील में दाल को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को सरकार पर निशाना साधा था. पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, दाल को 9 फरवरी को जारी व्हाइट हाउस की नई फैक्ट शीट में चुपचाप जोड़ दिया गया है, जो 6 फरवरी, 2026 को जारी भारत-अमेरिका जॉइंट स्टेटमेंट का हिस्सा नहीं था.

फैक्ट शीट में क्या-क्या?

व्हाइट हाउस ने मंगलवार को ट्रेड डील पर फैक्ट शीट जारी किया था. इसमें समझौते की प्रमुख शर्तों को बताया गया जैसे कि भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं एवं अमेरिकी खाद्य व कृषि उत्पादों की एक श्रृंखला पर शुल्क समाप्त करेगा या घटाएगा. इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड सोरघम, ट्री नट्स, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं.

साथ ही भारत ने अधिक अमेरिकी उत्पाद खरीदने तथा ऊर्जा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य क्षेत्रों में 500 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है.

शीट में कहा गया, भारत ने दुनिया की किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तुलना में अमेरिका पर सबसे अधिक शुल्क बनाए रखे हैं, जहां कृषि उत्पादों पर औसतन 37 प्रतिशत तक और कुछ वाहनों पर 100 प्रतिशत से अधिक शुल्क है. भारत का इतिहास अत्यधिक संरक्षणवादी गैर-शुल्क बाधाएं लगाने का भी रहा है जिनके कारण अमेरिका के कई निर्यात भारत में प्रतिबंधित रहे हैं.

दस्तावेज के अनुसार, आने वाले हफ्तों में अमेरिका और भारत इस ढांचे को शीघ्र लागू करेंगे और अमेरिकी श्रमिकों तथा कारोबार के लिए लाभ सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पारस्परिक रूप से लाभकारी BTA को अंतिम रूप देने की दिशा में अंतरिम समझौते पर काम करेंगे.

इसमें कहा गया कि भारत प्राथमिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करेगा. अमेरिका और भारत उत्पत्ति नियमों पर बातचीत करेंगे ताकि सहमत लाभ मुख्य रूप से दोनों देशों को ही मिलें.

कांग्रेस ने क्या कहा?

फैक्ट शीट सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए. कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार के झूठ का पर्दाफाश हो गया है. व्हाइट हाउस यानि अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप के ऑफिस ने भारत-अमरीका डील की फैक्टशीट जारी की. इसमें साफ कहा गया है कि भारत अमेरीका से कुछ दालें भी ख़रीदेगा. साथ ही जो 500 बिलियन डॉलर का सामान भारत ने अमेरीका से ख़रीदने का वादा किया है, उसमें कृषि उत्पाद भी शामिल हैं. ये दोनों बातें अभी तक देशवासियों से छुपायी गई थी. क्यों.

वहीं, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने साफ-साफ कहा है कि डील में किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि ट्रेड डील के तहत कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टर के हितों की रक्षा की जाएगी. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ऐसा कोई भी प्रोडक्ट जो भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचा सकता है, उसे एग्रीमेंट में शामिल नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज, पोल्ट्री, डेयरी, केला, खट्टे फल, हरी मटर, छोले, मूंग, तिलहन वगैरह जैसे प्रोडक्ट पर कोई भारतीय टैरिफ रियायत नहीं दी गई है.

बांग्लादेश और अमेरिका की डील से क्या भारत की बढ़ेगी चिंता ?

बांग्लादेश और अमेरिका के बीच ट्रेड एग्रीमेंट हुआ है. विपक्षी पार्टियां और कई एक्टिविस्ट दोनों देशों के बीच हुए इस एग्रीमेंट को भारत के कपड़ा कारोबारियों के लिए एक खतरा बता रहे हैं. बांग्लादेशी कपड़ों पर अमेरिकी टैरिफ 19 फीसद है, लेकिन Zero Access Clause के साथ, जो भारत के पास नहीं है. यानी एक ऐसा सिस्टम, जिससे बांग्लादेश से आने वाले कुछ टेक्सटाइल और कपड़ों के सामान पर ज़ीरो रेसिप्रोकल टैरिफ रेट लगाया जाएगा.

इसी क्लॉज़ की वजह से इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री में चिंता बढ़ गई है, जो पिछले हफ़्ते तक इंडिया-US ट्रेड डील के तहत बांग्लादेश से एक फीसद कम टैरिफ रेट मिलने पर खुश थी. हालांकि ट्रेड एग्रीमेंट पर बांग्लादेश में भारत की पूर्व हाई कमिश्नर वीना सीकरी ने कहा कि भारत को चिंता नहीं करनी चाहिए. सीकरी ने कहा कि बांग्लादेश ने बोइंग जेट खरीदने का वादा किया था, लेकिन उसके पास उनके लिए पैसे नहीं हैं.

भारत को चिंता नहीं होनी चाहिए
उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि हमें दो वजहों से बिल्कुल भी चिंता करनी चाहिए. पहली बात जिन जगहों पर बांग्लादेश को अमेरिकी मार्केट में एंट्री के लिए ज़ीरो टैरिफ मिलने की संभावना है, वे बांग्लादेश की मैन-मेड यार्न, कॉटन यार्न और शायद USA से कॉटन की खरीद से जुड़ी हैं. दूसरी बात ये आइटम भारत ने बहुत कॉम्पिटिटिव कीमतों पर और बहुत कम टर्नअराउंड टाइम के साथ सप्लाई किए थे.

इसलिए बांग्लादेश का एक एक्सपोर्टर असल में एक हफ्ते के अंदर भारत से ये सामान ले सकता था. उन्होंने आगे कहा, “वे (बांग्लादेश) इतनी बड़ी मात्रा में बोइंग जेट खरीद रहे हैं, लेकिन इसका पेमेंट कौन करेगा? उन्हें इसके पेमेंट के लिए IMF से लोन लेना होगा या कुछ और. अगर वे इन सभी कर्ज़ों में डूब गए तो उनकी इकॉनमी कमजोर हो जाएगी.”

बांग्लादेश और अमेरिका के बीच ट्रेड एग्रीमेंट
US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के ऑफिस के एक बयान के मुताबिक अमेरिका और बांग्लादेश ने सोमवार को रेसिप्रोकल ट्रेड पर यूनाइटेड स्टेट्स-बांग्लादेश एग्रीमेंट पर साइन किए. यह आपसी आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. इस एग्रीमेंट पर US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर और बांग्लादेश के कॉमर्स, टेक्सटाइल और जूट और सिविल एविएशन और टूरिज्म के सलाहकार शेख बशीर उद्दीन ने साइन किए.

इस साइन के समय बांग्लादेश के कॉमर्स सेक्रेटरी महबूबुर रहमान और असिस्टेंट US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ब्रेंडन लिंच भी मौजूद थे. US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के ऑफिस के एक बयान में कहा गया कि US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर, बांग्लादेश के कॉमर्स, टेक्सटाइल और जूट, और सिविल एविएशन और टूरिज्म के सलाहकार शेख बशीर उद्दीन के साथ रेसिप्रोकल ट्रेड पर यूनाइटेड स्टेट्स-बांग्लादेश एग्रीमेंट पर साइन करने में शामिल हुए.

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