नई का सरकार बनना बांग्लादेश के लिए कितनी बड़ी उपलब्धि ?

बांग्लादेश में शेख हसीना के बगैर हुए आम चुनाव 2026 ने कई राजनीतिक मिथकों को तोड़ दिया। अवामी लीग के बायकॉट के बावजूद 60 प्रतिशत वोटिंग होना क्या बांग्लादेश की सियासत में एक नए चैप्टर की शुरुआत है? और सबसे बड़ा सवाल- ढाका में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई BNP सरकार के साथ भारत […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 13 फरवरी 2026, 10:30 AM 4 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram

बांग्लादेश में शेख हसीना के बगैर हुए आम चुनाव 2026 ने कई राजनीतिक मिथकों को तोड़ दिया। अवामी लीग के बायकॉट के बावजूद 60 प्रतिशत वोटिंग होना क्या बांग्लादेश की सियासत में एक नए चैप्टर की शुरुआत है? और सबसे बड़ा सवाल- ढाका में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई BNP सरकार के साथ भारत के रिश्ते अब क्या करवट लेंगे?

बांग्लादेश की राजनीति में यह शायद दूसरी या तीसरी बार है जब किसी बड़ी पार्टी ने चुनाव का बहिष्कार किया है या उसे लड़ने नहीं दिया गया है। अगर हम पिछले ऐसे चुनावों से तुलना करें, तो आप जो वोटिंग प्रतिशत बता रहे हैं, वह अब तक का सबसे बेहतरीन आंकड़ा माना जाएगा। इसमें Gen-Z की भागीदारी एक सकारात्मक पहलू है, हालांकि वहां छात्र राजनीति हमेशा से सक्रिय रही है। अगर वोटिंग ऊपर रहा है, तो यह माना जाना चाहिए कि एक बड़े हिस्से ने इसमें भाग लिया है।

हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि यह केवल आम चुनाव नहीं था, बल्कि एक तरह का जनमत संग्रह भी था, जिस वजह से शायद वोटिंग प्रतिशत बढ़ा हो। छिटपुट हिंसा को छोड़ दें, तो युवाओं के नेतृत्व में चुनाव का शांतिपूर्ण होना सराहनीय है। हालांकि, अभी बहुत ज्यादा सकारात्मक होने की जरूरत नहीं है , लेकिन आज जिस तरह चुनाव हुए हैं, उसकी तारीफ करनी होगी।’

चुनाव हमेशा ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ नहीं होते। पार्टियों के अपने वोट बैंक होते हैं, लेकिन दुनिया भर में ‘स्विंग वोटर्स’ भी होते हैं जो किसी एक पार्टी के पक्के समर्थक नहीं होते। इसलिए, जो 20% लोग वोट देने नहीं आए, जरूरी नहीं कि वे सभी अवामी लीग के ही समर्थक हों। हो सकता है कि उन्होंने बस वोट न देने का फैसला किया हो। जिन्होंने वोट दिया, वे शायद नई व्यवस्था के साथ जाना चाहते हैं। वास्तविक वोटिंग व्यवहार तो परिणाम की घोषणा के कुछ हफ्तों बाद ही समझ आएगा। रही बात खतरे की, तो यह इस पर निर्भर करेगा कि सरकार का स्वरूप कैसा बनता है।

1996 में जब अवामी लीग ने बहिष्कार किया था, तब वोटिंग प्रतिशत लगभग 21 प्रतिशत ही था। बीएनपी के साथ यह हुआ कि उनकी ‘सेकेंड जनरेशन’ को जमीन तैयार मिली और वे मौजूदा माहौल के साथ तालमेल बिठा पाए। लेकिन इस बार अवामी लीग की सेकेंड जनरेशन को खड़े होने का मौका ही नहीं मिला। जब नेता और पार्टी दोनों ही गायब हैं, तो यह कहना मुश्किल है कि उनका जनाधार बचा है या नहीं। अगर हम यह मान लें कि उनका समर्थन पूरी तरह खत्म हो गया है, तो यह जल्दबाजी होगी, क्योंकि नेतृत्व की अनुपस्थिति में समर्थकों का आकलन करना कठिन है।

2024 की घटना के बाद बांग्लादेश पर सबसे बड़ा दबाव अंतरराष्ट्रीय निगरानी का है। पूरी दुनिया और खास तौर पर भारत, जो अल्पसंख्यकों के मुद्दों को सही उठाता रहा है, की नजर उन पर है। सरकार की तरफ से कोई भी चूक स्थिति को बिगाड़ सकती थी। इस तनाव और दबाव के बावजूद, अगर चुनाव बिना बड़ी हिंसा के संपन्न हुए हैं, तो यह वास्तव में बांग्लादेश के लिए एक उपलब्धि है। भारत भी एक पड़ोसी के तौर पर शांतिपूर्ण चुनावों की सराहना कर रहा है।

बांग्लादेश में BNP की सरकार बनने जा रही है, इसका भारत से रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा? भारत को इस घटनाक्रम पर लगातार नजर क्यों रखनी चाहिए?
भारतीय कूटनीति अब काफी परिपक्व हो चुकी है। भारत ने बदलते हालातों को समझा है और आज भी दोनों देशों के बीच ‘ट्रैक-1’ या ‘ट्रैक-2’ के जरिए संवाद जारी है। भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि बांग्लादेश भारत को नजर अंदाज नहीं कर सकता, चाहे वहां किसी भी विचारधारा की सरकार हो। यही भारत के लिए सबसे बड़ा पक्ष है। भारत ने भी कोई सख्त रवैया नहीं अपनाया है और न ही संवाद तोड़ा है। हमने यह सीख लिया है कि हमें किसी एक ‘प्रो-इंडिया’ सरकार के भरोसे नहीं रहना है, बल्कि जो भी सत्ता में आए, उसके साथ कूटनीतिक रिश्ते रखने हैं। इसलिए, मुझे नहीं लगता कि भारत की तरफ से अब कोई चूक होगी।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰