बजट सत्र का पहला हिस्सा कई वजहों से किया जाएगा याद………………….

संसद के बजट सत्र के पहले भाग का आज आखिरी दिन है, बजट सत्र का दूसरा भाग अब 9 मार्च से लेकर 2 अप्रैल तक होगा.इस सत्र को कई मायनों से याद किया जाएगा. ये सत्र इस वजह से भी खास रहा क्योंकि 1999 के बाद पहली बार रविवार के दिन आम बजट पेश किया […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 13 फरवरी 2026, 11:09 AM 4 मिनट read
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बजट सत्र का पहला हिस्सा कई वजहों से किया जाएगा याद………………….
Photo: UB India News Archive

संसद के बजट सत्र के पहले भाग का आज आखिरी दिन है, बजट सत्र का दूसरा भाग अब 9 मार्च से लेकर 2 अप्रैल तक होगा.इस सत्र को कई मायनों से याद किया जाएगा. ये सत्र इस वजह से भी खास रहा क्योंकि 1999 के बाद पहली बार रविवार के दिन आम बजट पेश किया गया.यही नहीं यह सत्र विपक्ष के हंगामे को लेकर भी याद किया जाएगा.खासकर तब जब विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया.भारतीय संसद के इतिहास में यह चौथा मौका होगा है जब लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है.इसके पहले 1954 में जी वी मावलंकर,1966 में सरदार हुकुम सिंह और 1987 में बलराम जाखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया थ.

मगर कोई भी प्रस्ताव पास नहीं हो पाया और लोकसभा अध्यक्ष अपने पद पर बने रहे.इस बार भी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष ने 118 सांसदों के हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव पेश किया है. इस प्रस्ताव का भी वही हाल होगा जो पिछले प्रस्तावों का हुआ है. मगर इस बार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने यह निर्णय लिया है कि जब तक उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर कोई फैसला नहीं हो जाता वो अध्यक्ष की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे. यह सत्र इसके लिए भी याद रखा जाएगा. लोकसभा में रविवार को बजट पेश होने के बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा शुरू हुई और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व जनरल नरवणे की एक किताब का जिक्र किया.यह किताब भारत में छपी ही नहीं थी और इस बात पर इतना विवाद बढ़ा कि लोकसभा की कार्यवाही पूरे हफ्ते तक नहीं चल पाई.

ये सत्र इसके लिए भी याद किया जाएगा जब प्रधानमंत्री करीब दो दशक बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर नहीं बोल पाए.प्रधानमंत्री लोकसभा में नहीं आए बाद में लोकसभा अध्यक्ष ने सदन को बताया कि महिला सांसदों ने उनका रास्ता रोक रखा था और प्रधानमंत्री की जान को खतरा था.विपक्ष के हंगामे की गाज आठ सांसदों पर भी गिरी और उन्हें पूरे बजट सत्र से निलंबित कर दिया गया.तब से लेकर अंतिम दिन तक ये सांसद संसद भवन परिसर में धरना करते नजर आए.

इस सत्र में बजट पर चर्चा हुई सभी सदस्य जो राष्ट्रपति के अभिभाषण पर नहीं बोल पाए थे ने इस बहस में भाग लिया.इसी बीच भारत अमेरिका ट्रेड डील की खबर आ गई,सरकार ने इसे फादर ऑफ द डील की संज्ञा दी और वाणिज्य मंत्री ने सदन में बयान भी दिया मगर विपक्ष की तरफ से राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने सरकार को आड़े हाथों लिया और कृषि क्षेत्र को विदेशी बाजार के लिए खोलने का आरोप सरकार पर लगाया.

बजट सत्र के पहले भाग का अंतिम कुछ दिन याद रखा जाएगा राहुल गांधी के खिलाफ कई तरह के प्रस्ताव लाने की कोशिश.सबसे पहले कहा गया कि राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाया जाएगा मगर ऐन मौके पर सरकार ने इससे मना कर दिया. हालांकि इसी तरह के प्रस्ताव के बाद 1978 में इंदिरा गांधी की सदस्यता जा चुकी है.फिर बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ ठोस प्रस्ताव लाने की कोशिश की मगर उसे सदन में अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है.

ये सत्र संसद से बाहर हुए एक विवाद के लिए भी याद किया जाएगा.किस्सा ये है कि सदन से निष्कासित सांसद संसद परिसर में धरने पर बैठे थे,वहां से गुजर रहे केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने उनको कहा कि बैठे तो ऐसे हो जैसे कारगिल जीत कर आए हो,तभी वहां राहुल गांधी भी पहुंच गए और बिट्टू को कहा हाउ आर यू मॉय ट्रेटर फ्रैंड.इसी बात पर विवाद हो गया.हांलांकि ये विवाद ज्यादा दिन नहीं चला.

कुल मिला कर बजट सत्र के पहले भाग का लेखा जोखा निकाला जाए तो आप कह सकते हैं कि जहां राज्यसभा में सुचारू ढंग से सभी मुद्दों पर चर्चा हुई.प्रधानमंत्री भी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राज्यसभा में ही बेले वहीं लोकसभा कमोबेश हंगामे के भेंट चढ़ गया.एक ही संसद में दो अलग सदन अलग-अलग ढंग से व्यवहार करते हैं.कौन सा सदन कैसे चलेगा यह मुद्दे,सदस्यों और सरकार और विपक्ष के रूख की वजह से चलता है.

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