ट्रम्प ने दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोत को मिडिल-ईस्ट क्यों भेजा ………….

अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। अमेरिका अब अपना सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड वहां भेज रहा है। यह एक न्यूक्लियर-पावर्ड कैरियर एयरक्राफ्ट है। रॉयटर्स को दो अमेरिकी अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब अमेरिका और ईरान के […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 14 फरवरी 2026, 07:13 AM 8 मिनट read
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ट्रम्प ने दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोत को मिडिल-ईस्ट क्यों भेजा ………….
Photo: UB India News Archive

अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। अमेरिका अब अपना सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड वहां भेज रहा है। यह एक न्यूक्लियर-पावर्ड कैरियर एयरक्राफ्ट है। रॉयटर्स को दो अमेरिकी अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है। अधिकारी के मुताबिक, जेराल्ड को मिडिल ईस्ट पहुंचने में एक हफ्ता लगेगा। वहां पहले से अब्राहम लिंकन कैरियर और दूसरे युद्धपोत तैनात हैं।

जेराल्ड अपने साथी जहाजों के साथ कैरिबियन सागर में तैनात था। यह इस साल वेनेजुएला में हुए अमेरिकी अभियानों में हिस्सा ले चुका है। इसके अलावा हाल के हफ्तों में कई गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर, फाइटर जेट और निगरानी विमान भी मिडिल ईस्ट में भेजे गए हैं।

अमेरिका का USS जेराल्ड आर. फोर्ड दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट है।
अमेरिका का USS जेराल्ड आर. फोर्ड दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट है।

क्यों अहम है यह तैनाती

अमेरिकी नौसेना के पास कुल सिर्फ 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, इसलिए ये बहुत कीमती संसाधन हैं और इनकी तैनाती का कार्यक्रम पहले से तय होता है।

पिछले साल जून में ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमलों के समय भी अमेरिका के पास क्षेत्र में दो कैरियर थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस हफ्ते कहा था कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हुआ तो वे दूसरा कैरियर भेजने पर विचार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अगले एक महीने में ईरान के साथ समझौता हो सकता है, नहीं तो स्थिति बहुत गंभीर और दर्दनाक हो सकती है।

2025 से समुद्र में तैनात है जेराल्ड आर. फोर्ड

जेराल्ड आर. फोर्ड पिछले साल जून से लगातार समुद्र में तैनात है। इसे पहले यूरोप में तैनात होना था, लेकिन नवंबर में अचानक इसे कैरेबियन सागर में भेज दिया गया।

आमतौर पर एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती नौ महीने की होती है, लेकिन सैन्य गतिविधि बढ़ने पर इसे बढ़ाया भी जाता है। फोर्ड परमाणु रिएक्टर से संचालित है और इसमें 75 से ज्यादा सैन्य विमान तैनात किए जा सकते हैं।

इनमें एफ-18 सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट और ई-2 हॉकआई जैसे अर्ली वार्निंग विमान शामिल हैं। इसमें अत्याधुनिक रडार सिस्टम भी लगा है, जो हवाई यातायात और नेविगेशन को नियंत्रित करने में मदद करता है।

अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन ने बुश एयरक्राफ्ट कैरियर को भेजने पर भी विचार किया था। हालांकि वह अभी सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में है और उसे मिडिल ईस्ट पहुंचने में एक महीने से ज्यादा समय लग जाता।

ट्रम्प बोले-ईरान में सत्ता परिवर्तन सबसे अच्छी बात

ट्रम्प ने ईरान में सत्ता परिवर्तन की संभावना का खुलकर जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि अगर तेहरान में सत्ता बदलती है तो “यह सबसे अच्छी बात होगी”।

नॉर्थ कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग में सैनिकों से मिलने के बाद ट्रम्प ने पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। उनसे पूछा गया था कि क्या अमेरिका ईरान की इस्लामिक धार्मिक नेतृत्व को हटाने के लिए दबाव बनाएगा।

इस पर ट्रम्प ने कहा, “ऐसा लगता है कि यही सबसे अच्छा हो सकता है।” उन्होंने कहा कि ईरान का धार्मिक शासन 47 साल से सिर्फ बात कर रहा है।

अमेरिका ने ईरान के आगे 4 शर्तें रखी

ट्रम्प ने फरवरी की शुरुआत में एक अलग इंटरव्यू में कहा था कि ईरान के साथ स्थिति अभी बदल रही है। उन्होंने दावा किया कि ईरान अब बातचीत के लिए तैयार हो सकता है। ट्रम्प ने कहा, ‘ईरान के पास वेनेजुएला से बड़ा आर्मडा (बेड़ा) है।’

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के अधिकारी कई बार संपर्क कर चुके हैं और वे डील करना चाहते हैं। ट्रम्प का मानना है कि ईरान बात करने के लिए उत्सुक है।

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है। अगर ईरान संपर्क करता है और शर्तें मानता है तो बात होगी। इस महीने अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने समझौते के लिए शर्तें बताई हैं-

  • यूरेनियम एनरिचमेंट पर पूर्ण प्रतिबंध
  • पहले से संवर्धित यूरेनियम को हटाना
  • लंबी दूरी की मिसाइलों की संख्या सीमित करना
  • क्षेत्रीय प्रॉक्सी बलों को मदद देना बंद करना।

ईरान बोला था- डराकर हमसे कुछ नहीं करवा सकते

अमेरिका के यूरेनियम इनरिचमेंट रोकने की मांग का जवाब देते हुए ईरान ने 8 फरवरी को कहा था कि वह प्रोग्राम किसी भी हाल में नहीं छोड़ेगा, चाहे उसे सैन्य धमकियां मिलें या नए प्रतिबंध लगाए जाएं।

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था- ईरान को डराकर उसकी परमाणु नीति नहीं बदली जा सकती और अमेरिका की मंशा पर हमें भरोसा नहीं है। अराघची ने साफ कहा था कि यूरेनियम संवर्धन ईरान के लिए किसी भी हालत में समझौते का मुद्दा नहीं है।

उन्होंने कहा कि किसी देश को यह अधिकार नहीं है कि वह ईरान को बताए कि उसे क्या करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती ईरान को डराने में नाकाम रहेगी।

उन्होंने दोहराया कि ईरान ऐसा कोई समझौता नहीं करेगा जो उसकी आजादी और सम्मान के खिलाफ हो। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर प्रतिबंधों में राहत मिलती है तो ईरान भरोसा बढ़ाने वाले कुछ कदमों पर विचार कर सकता है, लेकिन यह सब आपसी सम्मान पर निर्भर करेगा।

अरब सागर में USS अब्राहम लिंकन पहले से तैनात

अमेरिकी जंगी जहाज USS अब्राहम लिंकन अरब सागर में ईरान पहुंच चुका है। ईरान के कई शहर इसकी स्ट्राइक रेंज में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह अरब सागर में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENCOM) की जोन में आ चुका है। साथ ही अमेरिका का C 37-B एयरक्राफ्ट भी ईरान पहुंच गया है।

USS अब्राहम लिंकन पहले साउथ चाइना सी में तैनात था। 18 जनवरी को यह मलक्का स्ट्रेट पार कर हिंद महासागर में दाखिल हुआ। इसके अलावा अमेरिका ने USS थियोडोर रूजवेल्ट और कई मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत तैनात किए हैं।

अमेरिका अब ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य अड्डों व कमांड सेंटरों पर समुद्र और आसमान दोनों से हमले की स्थिति में आ गया है।

अमेरिकी सेना ने कतर बेस पर ट्रकों पर मिसाइल सिस्टम तैनात किए

इस बीच सैटेलाइट तस्वीरों में सामने आया है कि अमेरिका ने कतर के अल-उदीद बेस पर पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को स्थायी लॉन्चर की जगह ट्रकों पर तैनात किया गया है। यह मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अलग-अलग बेस पर विमानों की संख्या भी बढ़ी है।

फोरेंसिक इमेजरी एनालिस्ट विलियम गुडहाइंड के मुताबिक, जनवरी की तुलना में फरवरी की सैटेलाइट तस्वीरों में क्षेत्र में सैन्य गतिविधि बढ़ी हुई नजर आ रही है। उन्होंने बताया कि फरवरी की शुरुआत में अल-उदीद बेस पर पैट्रियट मिसाइलें ट्रकों पर लगी नजर आईं।

उनके अनुसार, मिसाइलों को ट्रकों पर रखने से उन्हें जल्दी एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है या हमले की स्थिति में नई पोजिशन पर तैनात किया जा सकता है।

कतर के अल-उदीद बेस पर फरवरी की तस्वीर में पैट्रियट मिसाइल सिस्टम ट्रकों पर तैनात नजर आ रहा है।
कतर के अल-उदीद बेस पर फरवरी की तस्वीर में पैट्रियट मिसाइल सिस्टम ट्रकों पर तैनात नजर आ रहा है।

ट्रम्प पहले ही ईरान को चेतावनी दे चुके

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमको लेकर पहले ही बमबारी की चेतावनी दे चुके हैं। हालांकि तनाव कम करने के लिए दोनों पक्षों के बातचीत जारी है।

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि अगर उसके क्षेत्र पर हमला हुआ तो वह किसी भी अमेरिकी बेस को निशाना बना सकती है।

मिडिल-ईस्ट में इराक, जॉर्डन, कुवैत, सऊदी अरब, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और तुर्की में अमेरिका के सैन्य अड्डे मौजूद हैं।

ईरान में सत्ता परिवर्तन की वकालत कर चुके ट्रम्प

डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान में सत्ता परिवर्तन की खुलकर वकालत कर चुके हैं। उन्होंने पिछले हफ्ते पोलिटिको से कहा, ‘ईरान में नए नेतृत्व के बारे में सोचने का वक्त आ गया है।’

ट्रम्प ने खामेनेई पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि ईरान की तबाही के लिए वही जिम्मेदार हैं और वहां डर और हिंसा के जरिए शासन चलाया जा रहा है।

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