पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़े एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. एजेंसी ने अपने जवाबी हलफनामे में दावा किया है कि मुख्यमंत्री ने जांच को प्रभावित करने के इरादे से सबूतों से छेड़छाड़ करवाई और अहम डिजिटल साक्ष्य नष्ट कराए. सुप्रीम कोर्ट में […]
By UB India News • Patna, Bihar बुधवार, 18 फरवरी 2026, 10:18 AM • 2 मिनट read
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़े एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. एजेंसी ने अपने जवाबी हलफनामे में दावा किया है कि मुख्यमंत्री ने जांच को प्रभावित करने के इरादे से सबूतों से छेड़छाड़ करवाई और अहम डिजिटल साक्ष्य नष्ट कराए. सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि एजेंसी को ‘हथियार’ की तरह इस्तेमाल नहीं किया गया, बल्कि उसे ‘आतंकित’ किया गया है.
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच के समक्ष दायर हलफनामे में ईडी ने आरोप लगाया कि, मुख्यमंत्री के निर्देश पर IPAC ऑफिस में कंप्यूटर डेटा के बैकअप की प्रक्रिया रुकवाई गई. इसके साथ ही, जांच से जुड़े महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज का स्टोरेज भी हटवा दिया गया. एजेंसी का कहना है कि यह सारी कार्रवाई जांच में बाधा डालने और साक्ष्यों को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई.
Z+ सुरक्षा का दुरुपयोग करने का आरोप
ईडी ने अपने हलफनामे में यह भी आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी ने अपने Z+ सुरक्षा कवर का इस्तेमाल दबाव बनाने और जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के लिए किया. एजेंसी का दावा है कि इससे जांच एजेंसियों के कामकाज पर असर पड़ा और निष्पक्ष जांच में बाधा उत्पन्न हुई.
CBI को जांच सौंपने की मांग
इन आरोपों के आधार पर ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि पश्चिम बंगाल में कथित ‘कानूनहीनता’ की स्थिति को देखते हुए मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए, ताकि निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित हो सके.
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई के लिए 18 मार्च की तारीख दी है. ऐसे में कोर्ट की अगली सुनवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है.