सेना की फाइनल स्ट्राइक में जैश का पूरा खेल खत्म………………

जम्मू-कश्मीर के जम्मू मंडल में पिछले तीन वर्षों से सक्रिय आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक खतरनाक मॉड्यूल को भारतीय सेना ने खुफिया विभाग की पुख्ता जानकारी के आधार पर पूरी तरह खत्म कर दिया. जम्मू के किश्तवाड़ जिले के त्राशी इलाके में भारतीय सेना ने जैश-ए-मोहम्मद के जिन तीन आतंकियों को मार गिराया, उनकी पहचान […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 23 फरवरी 2026, 09:08 AM 5 मिनट read
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सेना की फाइनल स्ट्राइक में जैश का पूरा खेल खत्म………………
Photo: UB India News Archive

जम्मू-कश्मीर के जम्मू मंडल में पिछले तीन वर्षों से सक्रिय आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक खतरनाक मॉड्यूल को भारतीय सेना ने खुफिया विभाग की पुख्ता जानकारी के आधार पर पूरी तरह खत्म कर दिया. जम्मू के किश्तवाड़ जिले के त्राशी इलाके में भारतीय सेना ने जैश-ए-मोहम्मद के जिन तीन आतंकियों को मार गिराया, उनकी पहचान संगठन के टॉप कमांडर सैफुल्लाह बलूच, फरमान अली और बाशा उर्फ हुरैरा के रूप में हुई है. इन तीनों आतंकियों पर पिछले वर्ष किश्तवाड़ पुलिस ने पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया था. पिछले एक साल से ये आतंकी बार-बार सेना को चकमा देकर फरार हो रहे थे.

भारतीय सेना ने आतंकियों को पकड़ने के लिए पिछले वर्ष दिसंबर से कठुआ, डोडा और किश्तवाड़ जिलों से लगातार घेराबंदी अभियान चला रही थी. इस दौरान 23 जनवरी को सेना ने पाकिस्तान के मुल्तान निवासी आतंकी जुबैर अली को बिलावर में मार गिराया. इसके बाद 4 फरवरी को जैश के टॉप आतंकी उस्मान अख्तर उर्फ निक्कू और पाकिस्तान के जफरवाल निवासी लुकमान बशीर उर्फ अबू माविया को उधमपुर की बसंतगढ़ तहसील के जोफर जंगल में ढेर कर दिया गया. 4 फरवरी के दिन ही शाम को खुफिया विभाग से मिली ठोस सूचना के आधार पर सेना ने सैफुल्लाह के समूह को त्राशी के जंगलों में घेर लिया. इस मुठभेड़ में पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत के कोहाट निवासी पांच लाख के इनामी आतंकी स्वरुद्दीन उर्फ आदिल खान को मार गिराया गया, जबकि सैफुल्लाह, फरमान और बाशा वहां से भागने में सफल हो गए थे.

भारतीय सेना और इंटेलिजेंस ब्यूरो ने मिलकर किया काम

भारतीय सेना और इंटेलिजेंस ब्यूरो ने अपने सूत्रों के माध्यम से इन तीनों आतंकियों की तलाश जारी रखी. कल शाम इन आतंकियों की सटीक लोकेशन खुफिया विभाग को मिली, जिसे सेना के साथ साझा किया गया. रविवार  (22 फरवरी 2026) की सुबह लगभग 11 बजे भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उस इलाके को घेर लिया, जहां ये आतंकी एक लकड़ी के घर में छिपे हुए थे. यह पुष्टि करने के लिए कि घर के भीतर आतंकी मौजूद हैं या नहीं, सेना ने अपने प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड ‘टायसन’ को घर के पास भेजा. टायसन के भौंकने पर आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी. इसके बाद आतंकियों की मौजूदगी पक्की होने पर सेना ने उस लकड़ी के घर को रॉकेट लॉन्चर से ध्वस्त कर दिया.

करीब एक घंटे तक चली कार्रवाई

करीब एक घंटे तक चली कार्रवाई के बाद जब कोई जवाबी फायरिंग नहीं हुई तो सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के जवान ध्वस्त घर के पास पहुंचे. वहां सबसे पहले सैफुल्लाह बलूच और आतंकी बाशा की जली हुई लाश मिली. सैफुल्लाह का चेहरा पहचाना जा सका, जबकि बाशा का सिर धड़ से अलग हो चुका था. बाद में मलबा हटाने पर तीसरी जली हुई लाश बरामद हुई, जिसकी पहचान पाकिस्तानी आतंकी फरमान अली के रूप में की गई. इस प्रकार केवल 30 दिनों के भीतर भारतीय सेना और खुफिया एजेंसियों ने जैश-ए-मोहम्मद के उधमपुर-कठुआ और डोडा-किश्तवाड़ मॉड्यूल को पूरी तरह समाप्त कर दिया और कुल 7 आतंकियों को मार गिराया.

भारतीय सेना का साल 2019 का ऑपरेशन

साल 2019 में भारतीय सेना ने ऑपरेशन बंदर के तहत जैश-ए-मोहम्मद के बालाकोट स्थित ट्रेनिंग कैंप मदरसा तालीम-उल-कुरान को नष्ट किया था. इसके बाद जैश ने अपनी रणनीति बदलते हुए खैबर पख्तूनख्वाह के हांगू इलाके में सामना रोड पर सामना पहाड़ी के पास नया प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया, जिसे जैश का टॉप कमांडर मुराद अज़हर और ओमर शेख संचालित करता था. इसी ट्रेनिंग कैंप में लगभग 31 आतंकियों को प्रशिक्षित किया गया और फिर उन्हें पांच समूहों में बांटकर वर्ष 2023 में आईएसआई और कासिम लाला की मदद से जम्मू क्षेत्र में घुसपैठ कराई गई. घुसपैठ के बाद इन आतंकियों को चार समूहों में बांटा गया, जिनकी कमान क्रमशः सैफुल्लाह, उस्मान अख्तर उर्फ निक्कू, रुक्सार उर्फ मौलवी और लुकमान बशीर उर्फ अबू माविया के पास थी.

भारतीय सेना के काफिले पर हमला 

जुलाई 2024 में सैफुल्लाह और निक्कू के समूह ने मिलकर डोडा में भारतीय सेना के काफिले पर हमला किया था, जिसमें कैप्टन बृजेश थापा समेत चार जवान शहीद हो गए थे. इसके बाद से सेना ने इन आतंकियों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया. बीते दो वर्षों में सेना ने अन्य तीन समूहों के अधिकांश आतंकियों को मार गिराया, जबकि सैफुल्लाह का समूह लगभग 17 बार घेराबंदी तोड़कर भागने में सफल रहा. इस बार सेना ने विशेष रणनीति बनाकर सभी संभावित सहायता मार्गों को बंद किया और एक साथ कई स्थानों पर कार्रवाई की. आखिर में कल शुरू हुए एनकाउंटर के मात्र 23 मिनट के भीतर सैफुल्लाह, फरमान और बाशा को मार गिराया गया. वर्तमान में जम्मू क्षेत्र में जैश-ए-मोहम्मद लगभग समाप्त हो चुकी है. अब केवल वली हसन और जैश का पुराना आतंकी बिजली भाई उर्फ सादिक अपने कुछ साथियों के साथ कश्मीर क्षेत्र में छिपे होने की जानकारी है, जिनकी तलाश जारी है.

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