आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के 590 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का पूरा सच

निजी क्षेत्र के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस एक घटना ने न केवल बैंक की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है, बल्कि शेयर बाजार में भूचाल लाते हुए निवेशकों को भारी नुकसान पहुंचाया है। आखिर यह पूरा फर्जीवाड़ा क्या है, इसके पीछे […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 23 फरवरी 2026, 09:54 AM 4 मिनट read
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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के 590 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का पूरा सच
Photo: UB India News Archive

निजी क्षेत्र के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस एक घटना ने न केवल बैंक की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है, बल्कि शेयर बाजार में भूचाल लाते हुए निवेशकों को भारी नुकसान पहुंचाया है। आखिर यह पूरा फर्जीवाड़ा क्या है, इसके पीछे कौन है और इस पर बैंक प्रबंधन से लेकर देश के केंद्रीय बैंक तक का क्या रुख है? आइए इसे आसान सवाल-जवाब के जरिए विस्तार से समझते हैं।

पूरा मामला क्या है और यह कैसे हुआ?
यह धोखाधड़ी आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ स्थित एक शाखा में हुई है, जो मुख्य रूप से हरियाणा राज्य सरकार से जुड़े खातों के एक समूह तक सीमित है। 18 फरवरी 2026 को हरियाणा सरकार की संस्थाओं ने अपने खातों के वास्तविक बैलेंस में गड़बड़ी पकड़ी थी।

बैंक के अनुसार, शाखा के कुछ कर्मचारियों ने बाहरी लोगों के साथ मिलीभगत करके इस घटना को अंजाम दिया है। इन लोगों ने फर्जी चेक और जाली प्राधिकरण पत्रों का इस्तेमाल करते हुए मैन्युअल रूप से करोड़ों रुपये बैंक के बाहर अन्य लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर कर दिए।

कार्रवाई के तौर पर, बैंक ने चार संदिग्ध अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मामले की तह तक जाने के लिए केपीएमजी को स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया गया है। इस घटना के बाद हरियाणा सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए आईडीएफसी बैंक (और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक) को डी-एम्पैनल कर दिया है और अपने विभागों को खाते बंद करने का निर्देश दिया है।

इस फर्जीवाड़े से निवेशकों को कितना नुकसान उठाना पड़ा है?
इस खबर के सामने आते ही सोमवार के कारोबारी सत्र में निवेशकों ने भारी बिकवाली की, जिससे आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयर 20% तक गिर गए। मार्च 2020 के बाद यह शेयर में सबसे बड़ी गिरावट है। इस एक झटके में निवेशकों की 14,438 करोड़ रुपये की संपत्ति (मार्केट कैप) स्वाहा हो गई। धोखाधड़ी की यह रकम (590 करोड़ रुपये) इतनी बड़ी है कि यह बैंक के तीसरी तिमाही के 503 करोड़ रुपये के कुल शुद्ध लाभ को भी पार कर गई है।

बैंक के एमडी और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने क्या सफाई दी है?
डैमेज कंट्रोल करते हुए बैंक के एमडी और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने स्पष्ट किया है कि यह कोई ‘सिस्टमिक फेल्योर’  नहीं है, बल्कि एक शाखा और एक ग्राहक समूह से जुड़ी एक अलग-थलग  घटना है।

उन्होंने कहा कि बैंक में चेक क्लियर करने के लिए ‘मेकर, चेकर और ऑथराइजर’ जैसे जरूरी नियंत्रण मौजूद हैं, लेकिन कर्मचारियों और बाहरी थर्ड-पार्टी की आपराधिक मिलीभगत के कारण ये नियम तोड़े गए। सीईओ ने निवेशकों को आश्वस्त किया है कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी है और गिरती क्रेडिट लागत के कारण मुनाफे की स्थिति बेहतर है, इसलिए 590 करोड़ रुपये का यह वित्तीय प्रभाव बैंक के लिए प्रबंधनीय होगा। रिकवरी के लिए बैंक ने अन्य बैंकों को संदिग्ध खातों में पड़े बैलेंस पर रोक लगाने का अनुरोध भी भेजा है।

पूरे प्रकरण पर आरबीआई गवर्नर की क्या टिप्पणी है?
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार को स्पष्ट किया कि स्थिति की निगरानी की जा रही है और इस घटना से कोई ‘प्रणालीगत जोखिम’ पैदा नहीं हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह धोखाधड़ी केवल हरियाणा सरकार के विशिष्ट खातों तक ही सीमित है और बैंक के अन्य ग्राहक सुरक्षित हैं।

अब आगे क्या?
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का यह मामला बैंकिंग सेक्टर में शाखा-स्तर के नियंत्रण और कॉरपोरेट गवर्नेंस पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि प्रबंधन और आरबीआई ने इसे एक सीमित घटना बताया है, लेकिन सरकारी फंड के प्रबंधन को लेकर बैंक की साख को जो नुकसान हुआ है, उसका असर संस्थागत कारोबार पर लंबे समय तक दिख सकता है। फिलहाल, बाजार की नजर फोरेंसिक ऑडिट के नतीजों और चुराई गई रकम की रिकवरी पर टिकी रहेगी।

IDFC फर्स्ट बैंक का शेयर 20% गिरकर ₹67 पर आया

IDFC फर्स्ट बैंक के शेयर आज यानी 23 फरवरी को 20% गिरकर 67 रुपए पर आ गए। बैंक की चंडीगढ़ ब्रांच में ₹590 करोड़ का फ्रॉड सामने आने के बाद शेयर गिरे हैं। यह फ्रॉड हरियाणा सरकार से जुड़ी संस्थाओं के बैंक खातों में अनधिकृत ट्रांजैक्शन के जरिए किया गया है।

 

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