केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आज से तीन दिवसीय सीमांचल दौरा , सीमा सुरक्षा पर बड़ा फैसला!

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज बुधवार 25 फरवरी को तीन दिन के दौरे पर बिहार आ रहे हैं। अमित शाह बिहार के संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करें। इस दौरान वह सीमा पर घुसपैठ और कथित अवैध धार्मिक ढांचों के कारण राज्य के सीमांचल क्षेत्र में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर समीक्षा बैठक की […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 25 फरवरी 2026, 07:42 AM 6 मिनट read
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आज से तीन दिवसीय सीमांचल दौरा , सीमा सुरक्षा पर बड़ा फैसला!
Photo: UB India News Archive

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज बुधवार 25 फरवरी को तीन दिन के दौरे पर बिहार आ रहे हैं। अमित शाह बिहार के संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करें। इस दौरान वह सीमा पर घुसपैठ और कथित अवैध धार्मिक ढांचों के कारण राज्य के सीमांचल क्षेत्र में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। अमित शाह तीनों दिन सीमावर्ती क्षेत्रों में डेरा डालेंगे। इस दौरान वह सात सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों (एसपी) और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे। बता दें, सीमांचल में बिहार के अररिया, किशनगंज और पूर्णिया सहित कई उत्तर-पूर्वी जिले शामिल हैं।

सीमांचल क्षेत्र में घुसपैठ के मुद्दे पर अधिकारियों से चर्चा करेंगे अमित शाह

अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, अमित शाह सीमांचल क्षेत्र में घुसपैठ और जनसांख्यिकीय परिवर्तन के मुद्दों पर अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे। साथ ही कानून-व्यवस्था की स्थिति और सीमा प्रबंधन का जायजा भी लेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, बैठक के दौरान गृह मंत्री सीमावर्ती क्षेत्रों में निर्मित अवैध धार्मिक ढांचों और स्थानीय अधिकारियों की ओर से उन घुसपैठियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट तलब कर सकते हैं, जो कथित तौर पर क्षेत्र की जनसांख्यिकी बदल रहे हैं।

चेतावनी दे रहे आबादी असंतुलन के आंकड़े

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का तीन दिवसीय सीमांचल दौरा किशनगंज से शुरू होकर अररिया और पूर्णिया तक जाएगा. इस दौरान वे जिला अधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और सीमा सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे. सरकार के सूत्रों की ओर से बताया गया है कि मुख्य फोकस सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ, अवैध धार्मिक निर्माण और जनसांख्यिकीय बदलाव पर रहेगा. विपक्ष इसे सांप्रदायिक एजेंडा बता रहा है, जबकि केंद्र सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बता रही है. बता दें कि केंद्र और भाजपा का कहना है कि यह सिर्फ राजनीति नहीं बल्कि सुरक्षा का सवाल है. सरकार का दावा है कि सीमावर्ती इलाकों में अवैध घुसपैठ लंबे समय से चिंता का विषय रही है. अमित शाह पहले भी कह चुके हैं कि अवैध प्रवासियों को चिन्हित कर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी.गृह मंत्री के सीमांचल दौरे में अवैध निर्माण, संदिग्ध गतिविधियों और सीमा प्रबंधन की समीक्षा की जाएगी. सूत्रों के अनुसार बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्य के डीजीपी विनय कुमार के साथ भी इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है. वाइब्रेंट विलेज जैसे कार्यक्रमों के जरिए सीमा क्षेत्रों के विकास पर भी बात होगी.

सीमांचल क्यों है संवेदनशील?

बता दें कि सीमांचल में किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जिले आते हैं. यह इलाका नेपाल और बांग्लादेश सीमा के पास स्थित है. इसे रणनीतिक रूप से भी अहम माना जाता है क्योंकि यही क्षेत्र देश की सुरक्षा के लिए संवेदनशील चिकन नेक कॉरिडोर के करीब है जो पूर्वोत्तर भारत को मुख्य भूमि से जोड़ता है. वहीं, इस इलाके में आबादी का परिवर्तन और इसमें आ रहा असंतुलन एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है. 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में मुस्लिम आबादी 16.87 प्रतिशत थी. लेकिन किशनगंज जिले में यह प्रतिशत करीब 68 के आसपास दर्ज किया गया. साथ ही यह भी कि सीमांचल क्षेत्र के अररिया, कटिहार और पूर्णिया में भी मुस्लिम आबादी राज्य औसत से अधिक है.

जनगणना के आंकड़े क्या कहते हैं?

2001 से 2011 के बीच बिहार की कुल आबादी में करीब 25.4 प्रतिशत वृद्धि हुई. इसी अवधि में मुस्लिम आबादी में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. सीमांचल जिलों में यह वृद्धि राज्य औसत से थोड़ी अधिक रही. 1981 और 1991 के आंकड़ों पर नजर डालें तो उस समय भी पूर्णिया प्रमंडल में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत धीरे धीरे बढ़ता दिखा. हालांकि, राज्य स्तर पर बड़ा बदलाव नहीं हुआ. जानकार मानते हैं कि उच्च जन्म दर, रोजगार के लिए प्रवासन और सीमा पार आवाजाही जैसे कई कारण इस बदलाव से जुड़े हो सकते हैं.
आरजेडी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे ध्रुवीकरण की राजनीति बता रहे हैं. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव पहले भी कह चुके हैं कि जनसंख्या के आंकड़ों को सांप्रदायिक नजर से देखना गलत है. कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने भी सवाल उठाया था कि यदि घुसपैठ बड़ी समस्या है तो इतने वर्षों में इसे रोका क्यों नहीं गया. विपक्ष का कहना है कि जन्म दर और प्राकृतिक वृद्धि को घुसपैठ से जोड़ना समाज में डर पैदा कर सकता है.

जानकारों की राय

विशेषज्ञ मानते हैं कि सीमांचल का मुद्दा जटिल है. एक तरफ सीमा क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. दूसरी तरफ जनसंख्या वृद्धि के पीछे सामाजिक और आर्थिक कारण भी होते हैं. डेटा बताता है कि मुस्लिम आबादी का प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन यह वृद्धि कई दशकों में धीरे धीरे हुई है. इसे पूरी तरह घुसपैठ से जोड़ना आसान निष्कर्ष हो सकता है. कुछ जानकारों का कहना है कि पारदर्शी जांच, ठोस डेटा और कानूनी प्रक्रिया के जरिए ही सच्चाई सामने आ सकती है.

राजनीतिक असर क्या होगा

सीमांचल का इलाका चुनावी नजर से भी अहम माना जाता है. यहां बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक मतदाता हैं. ऐसे में अमित शाह का यह दौरा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यह पहली बार है जब गृह मंत्री इतने विस्तार से सीमांचल में जनसांख्यिकीय और सुरक्षा मुद्दों की समीक्षा कर रहे हैं. इससे एनडीए सरकार को मजबूती मिल सकती है, लेकिन विवाद बढ़ने पर राजनीतिक बहस भी तेज हो सकती है.

अमित शाह की बैठकों पर नजर

फिलहाल सबकी नजर अमित शाह की बैठकों और संभावित घोषणाओं पर है. क्या सीमा प्रबंधन को लेकर नई रणनीति बनेगी. क्या अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए नई पहल होगी. इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिल सकते हैं. सीमांचल में डेमोग्राफिक चेंज का मुद्दा अब सिर्फ आंकड़ों की बहस नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और बिहार की राजनीति के बीच एक अहम विषय बन गया है.
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