कनाडाई PM आज 4 दिन के दौरे पर भारत पहुंचेंगे………..

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी आज 4 दिन के दौरे पर भारत पर पहुंच रहे हैं। इस दौरे का मकसद भारत और कनाडा के बीच व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और रक्षा जैसे क्षेत्रों में नए साझेदारी को मजबूत करने पर फोकस करना है। प्रधानमंत्री के तौर पर मार्क कार्नी का यह पहला भारत दौरा है। कनाडा में […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 27 फरवरी 2026, 08:57 AM 8 मिनट read
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कनाडाई PM आज 4 दिन के दौरे पर भारत पहुंचेंगे………..
Photo: UB India News Archive

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी आज 4 दिन के दौरे पर भारत पर पहुंच रहे हैं। इस दौरे का मकसद भारत और कनाडा के बीच व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और रक्षा जैसे क्षेत्रों में नए साझेदारी को मजबूत करने पर फोकस करना है। प्रधानमंत्री के तौर पर मार्क कार्नी का यह पहला भारत दौरा है। कनाडा में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कार्नी मुंबई में बिजनेस लीडर्स से मुलाकात करेंगे। इस दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में निवेश पर चर्चा होगी।

कार्नी की भारत यात्रा से पहले कनाडा के अधिकारी अब भारत पर लगाए गए कुछ गंभीर आरोपों से पीछे हटते नजर आ रहे हैं। पहले कनाडा ने आरोप लगाया था कि भारत उसकी जमीन पर हस्तक्षेप कर रहा है और सीमापार दबाव जैसी गतिविधियों में शामिल है। सीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ कनाडाई अधिकारी ने कहा कि अगर कनाडा को लगता कि भारत उसकी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल दे रहा है, तो प्रधानमंत्री भारत की यात्रा नहीं करते।

2 मार्च को नई दिल्ली में मोदी से मिलेंगे कार्नी

कार्नी 1 मार्च को नई दिल्ली पहुंचेंगे और 2 मार्च को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसका मुख्य एजेंडा में कंप्रीहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) की वार्ताओं को शुरू करना शामिल है, जो लंबे समय से रुकी हुई है।

इसके अलावा, सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर चर्चा होगी। साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद कार्नी ऑस्ट्रेलिया और जापान की यात्रा पर रवाना होंगे।

पूरा दौरा 27 फरवरी से शुरू होकर 7 मार्च तक चलेगा। इसका यात्रा का मकसद कनाडा का अमेरिका पर आर्थिक निर्भरता कम करना और नए व्यापारिक रास्ते खोलना है।

भारत में निवेश को बढ़ावा दे रहा कनाडा

भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। कनाडा के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 21 अरब डॉलर से ज्यादा है।

भारत में 600 से ज्यादा कनाडाई कंपनियां काम कर रही हैं। भारत से कनाडा को मुख्य निर्यात में दवाइयां, रत्न-आभूषण और समुद्री उत्पाद शामिल हैं।

कनाडा के बड़े पेंशन फंड पहले से ही भारत में रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में बड़ा निवेश कर चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने भारत में 100 बिलियन डॉलर (करीब 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) का निवेश किया है। अब कनाडा इस निवेश को और बढ़ाना चाहता है।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का कहना है कि दोनों देशों के बीच कभी-कभी राजनीतिक मतभेद रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कनाडा भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा।

क्लीन एनर्जी और महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग की संभावना

इस दौरे में एनर्जी सबसे अहम मुद्दा है। दोनों देश यूरेनियम सप्लाई समझौते पर बात कर रहे हैं, जिससे भारत के न्यूक्लिय पावर प्लांट को ईंधन मिल सके। इसके अलावा क्लीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा) और एनर्जी ट्रांजिशन (ऊर्जा परिवर्तन ) के लिए जरूरी महत्वपूर्ण खनिजों पर भी सहयोग बढ़ाने की चर्चा है।

कनाडा प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है, जबकि भारत को तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए भरोसेमंद और जलवायु-अनुकूल ऊर्जा स्रोतों की जरूरत है। इसलिए यह क्षेत्र दोनों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) और अन्य स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की योजना है।

2024 में कनाडा के कुल ऊर्जा निर्यात में भारत को केवल 761.5 मिलियन डॉलर का हिस्सा मिला। जबकि भारत से आयात 206 मिलियन डॉलर था, लेकिन अब इसे बढ़ाने पर जोर है।

दोनों देशों के संबंधों को रीसेट करेगा यह दौरा

भारत के कनाडा में उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने ओटावा में एक इंटरव्यू में बताया कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों को पूरी तरह रीसेट करेगी और नए व्यापार के बड़े अवसर खोलेगी।

  • यूरेनियम सप्लाई डील: यात्रा के दौरान लगभग 10-साल के लिए 2.8 अरब कनाडाई डॉलर का यूरेनियम सौदा होने की संभावना है, जो भारत की बढ़ती परमाणु ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करेगा। यह समझौता देश के ऊर्जा और नागरिक न्यूक्लियर कार्यक्रम को समर्थन देगा।
  • ऊर्जा सहयोग: भारत भारी क्रूड ऑयल, लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और अन्य ऊर्जा उत्पादों में कनाडा के साथ सहयोग बढ़ाने में रुचि रखता है। कनाडा भी अमेरिका पर अपनी ऊर्जा निर्यात निर्भरता कम करने के लिए भारत जैसे विविध साझेदार ढूँढ रहा है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा: दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने पहले ही उच्च-स्तरीय वार्ता की है, जिसमें कूटनीतिक और कानून-प्रवर्तन संपर्क अधिकारी नियुक्त करने पर सहमति बनी है, ताकि सुरक्षा सहयोग को मजबूती दी जा सके।
  • तकनीकी, शिक्षा और संस्कृति: AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, शोध एवं शिक्षा में साझेदारी पर समझौते की संभावना है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार के अलावा सामाजिक-वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग भी बढ़ेगा।
  • व्यापार और निवेश वार्ता: बातचीत में आर्थिक साझेदारी समझौता(CEPA) को आधिकारिक रूप से शुरू करने की तैयारी है, जो वस्त्र, सेवाएं, निवेश, कृषि और डिजिटल वाणिज्य जैसे क्षेत्रों को कवर करेगा। पिछले साल कार्नी और मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की थी, जिसमें दोनों ने CEPA को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई थी। दोनों देशों का लक्ष्य है कि यह व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता अगले लगभग 12 महीनों के भीतर पूरा हो सके, जिससे द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक लगभग 50-70 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • खास डील्स की उम्मीद: भारत कनाडा के भारी कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदना चाहता है। साथ ही, पाइपलाइन और टर्मिनल जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की बात चल रही है।
कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश के पटनायक ने कहा कि भारत-कनाडा अपने रिश्तों को सुधारने पर काम कर रहे हैं।
कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश के पटनायक ने कहा कि भारत-कनाडा अपने रिश्तों को सुधारने पर काम कर रहे हैं।

भारत-कनाडा के बीच तनाव

एक साल पहले संबंध बहुत खराब थे। पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो ने 2023 में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने का आरोप लगाया था।

2024 में कनाडा ने छह भारतीय अधिकारियों को निकाला और आरोप लगाया कि भारत सरकार से जुड़े लोग कनाडाई नागरिकों के खिलाफ हिंसा, धमकी और जबरन वसूली कर रहे थे।

जस्टिन ट्रूडो ने संसद में कहा कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों को सबूत मिले हैं कि भारतीय सरकार के एजेंट इस हत्या में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने इसे कनाडा की संप्रभुता पर हमला बताया और भारत से जांच में सहयोग मांगा।

भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया और उन्हें बेतुका बताया। भारत का कहना था कि कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथी और आतंकवादी खुलेआम सक्रिय हैं, जो भारत के खिलाफ गतिविधियां चलाते हैं और कनाडा उन पर कार्रवाई नहीं करता।

दोनों देशों ने एक-दूसरे के कई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया। भारत ने कनाडाई नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दीं। कनाडा ने भी भारत से व्यापार मिशन रद्द कर दिए, और दोनों तरफ से यात्रा सलाह जारी की गई। बातचीत लगभग बंद हो गई और CEPA जैसी महत्वपूर्ण चर्चाएं ठप पड़ गईं।

ट्रूडो सरकार के समय ये तनाव चरम पर पहुंच गए, लेकिन मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने (मार्च 2025) के बाद दोनों देशों ने रिश्ते सुधारने की कोशिश की।

कनाडा में हर चौथा व्यक्ति विदेशी मूल का

कनाडा दुनिया के उन देशों में है जहां प्रवासियों (इमिग्रेंट) की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2021 की आधिकारिक जनगणना के मुताबिक, कनाडा में लगभग 83.6 लाख (8.3 मिलियन) लोग विदेश में जन्मे हैं, जो देश की कुल आबादी का करीब 23% है। यह आंकड़ा स्टैटिस्टिक्स कनाडा ने जारी किया है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि कनाडा की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या वृद्धि में प्रवासियों का खास रोल रही है, लेकिन हाल के सालों में इस मुद्दे पर बहस भी तेज हुई है।

भारतीय विदेश मंत्रायल के मुताबिक, कनाडा में भारतीय मूल के लगभग 16 लाख लोग रहते हैं। वहीं करीब 3 लाख (लगभग 3.03 लाख) लोग पाकिस्तानी मूल के हैं।

कनाडा में विदेशी मूल के 83 लाख लोग रहते हैं, जिनमें से 13 लाख भारतीय मूल के हैं।
कनाडा में विदेशी मूल के 83 लाख लोग रहते हैं, जिनमें से 13 लाख भारतीय मूल के हैं।

कनाडा ने 2025 में 2,800 भारतीयों को निकाला

कनाडा सरकार ने 2025 के पहले 10 महीनों में 2,831 भारतीय नागरिकों को देश से बाहर निकाला है। ये जानकारी कनाडा की कैनेडियन बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) के आंकड़ों से सामने आई है।

इसके मुताबिक पिछले साल कुल 18,785 लोगों को कनाडा से निकाला गया, जिनमें भारतीय दूसरे नंबर पर हैं। सबसे ज्यादा 3,972 लोग मेक्सिको के थे।

इतना ही नहीं, अभी 29,542 लोगों को निकालने की प्रक्रिया चल रही है, जिनमें 6,515 भारतीय भी शामिल हैं। यानी आने वाले समय में और भारतीयों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

कनाडा सरकार ने बताया है कि जिन लोगों को निकाला गया, उनमें से कई पर क्रिमिनल मामले थे। लेकिन बड़ी संख्या उन लोगों की भी थी जिन्होंने शरणार्थी दावे से जुड़े नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया।

 

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