एक राज्यपाल कितने राज्यों की कमान संभाल सकता है?

पश्चिम बंगाल समेत देश के कई राज्यों को नए राज्यपाल मिले हैं. केंद्र शासित दिल्ली और लद्दाख को नए उप-राज्यपाल मिले हैं. इस फेरबदल से बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु आदि महत्वपूर्ण राज्य प्रभावित हुए हैं. सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल की हो रही है. यहां के गवर्नर सीवी आनंद बोस ने अपने पद […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 6 मार्च 2026, 07:41 AM 6 मिनट read
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एक राज्यपाल कितने राज्यों की कमान संभाल सकता है?
Photo: UB India News Archive

पश्चिम बंगाल समेत देश के कई राज्यों को नए राज्यपाल मिले हैं. केंद्र शासित दिल्ली और लद्दाख को नए उप-राज्यपाल मिले हैं. इस फेरबदल से बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु आदि महत्वपूर्ण राज्य प्रभावित हुए हैं. सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल की हो रही है. यहां के गवर्नर सीवी आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दिया. वजह स्पष्टतौर पर नहीं बताई गई है. इस्तीफे के बाद वो दिल्ली रवाना हो गए. वह 3.5 साल राज्य के गवर्नर रहे. इस्तीफे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, मैं हैरान और परेशान हूं.

राज्यपाल की नियुक्ति कैसे होती है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 के अनुसार, प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा. राज्यपाल की नियुक्ति की प्रक्रिया सीधी और स्पष्ट है. संविधान के अनुच्छेद 155 के तहत मिले अधिकार का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति, राज्यपाल की नियुक्ति करते हैं. वे अपनी दस्तखत और मुहर लगे दस्तावेज से यह नियुक्ति करते हैं. राज्यपाल की नियुक्ति में केंद्र सरकार की भूमिका भी तय है. राष्ट्रपति उसी को राज्यपाल नियुक्त करते हैं, जिसके नाम की संस्तुति प्रधानमंत्री और केन्द्रीय मंत्रिपरिषद करती है. इसका आशय यह हुआ कि राज्यपाल की नियुक्ति में केंद्र सरकार की भूमिका सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है. सामान्य दशा में राज्यपाल की नियुक्ति पांच साल के लिए होती है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 156 के अनुसार राष्ट्रपति जब चाहें, राज्यपाल को हटा सकते हैं.

सीवी आनंद बोस.

राज्यपाल बनने के लिए क्या हैं शर्तें और योग्यता?

भारत के संविधान के अनुच्छेद 157 और 158 में राज्यपाल पद के लिए आवश्यक योग्यताओं और शर्तों का उल्लेख किया गया है. राज्यपाल बनने के लिए भारत का नागरिक होना चाहिए. उसकी आयु कम से कम 35 वर्ष होना अनिवार्य है. ऐसा कोई भी व्यक्ति राज्यपाल नहीं बन सकता जो संसद के किसी भी सदन का सदस्य हो या राज्य विधान मण्डल दल का सदस्य हो. अगर ऐसे किसी भी व्यक्ति की की नियुक्ति राज्यपाल के रूप में होना जरूरी है तो शपथ ग्रहण करने की तारीख से उसकी सदस्यता समाप्त मानी जाएगी.

यह भी जरूरी है कि राज्यपाल के पद पर नियुक्ति पाने वाला व्यक्ति किसी भी लाभ के पद पर तैनात न हो. संविधान में लिखा नहीं है लेकिन एक मान्य परंपरा है कि राज्यपाल की नियुक्ति अपने राज्य में नहीं की जा सकती. कई बार नियुक्ति से पहले संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री से विचार-विमर्श करने की भी एक अनौपचारिक परंपरा पूर्व में रही है.

Rn Ravi

राज्यपाल आरएन रवि.

एक राज्यपाल को कितने राज्यों का अतिरिक्त प्रभार मिल सकता है?

भारतीय संविधान में यह नियम है कि एक व्यक्ति केवल एक ही राज्य का राज्यपाल होगा. लेकिन साल 1956 में 7वें संविधान संशोधन के माध्यम से इसमें बदलाव किया गया. अब एक ही व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है. हालांकि, संविधान में इस बात की कोई स्पष्ट सीमा नहीं दी गई है कि एक राज्यपाल को अधिकतम कितने राज्यों का प्रभार दिया जा सकता है. यह पूरी तरह से राष्ट्रपति और केंद्र सरकार के विवेक पर निर्भर करता है. यदि एक व्यक्ति दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल है, तो उसे मिलने वाला वेतन और भत्ते उन राज्यों के बीच उस अनुपात में बांटे जाते हैं, जैसा राष्ट्रपति तय करते हैं.

Rajendra Vishwanath Arlekar

केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.

राज्यपाल के तबादले और हटाने के नियम

नई नियुक्तियां एवं तबादले राष्ट्रपति ने केंद्र सरकार की सिफारिश पर संविधान के तहत मिले अधिकारों से करते हैं. राष्ट्रपति एक राज्यपाल को उसके कार्यकाल के बीच में ही एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित कर सकते हैं. इसके लिए कोई विशेष कारण बताना अनिवार्य नहीं है.

राष्ट्रपति किसी भी समय राज्यपाल को पद से मुक्त कर सकते हैं. राज्यपाल स्वयं भी राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र सौंपकर पद छोड़ सकते हैं. जैसे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने इस्तीफा दिया. इन्हीं अधिकारों का उपयोग करते हुए केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने कई राज्यपालों के तबादले किये हैं. कुछ नई नियुक्तियां भी की हैं.

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला तेलंगाना भेजे गए हैं. तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा अब महाराष्ट्र के राज्यपाल होंगे. नन्द किशोर यादव नागालैंड, लेफ्टिनेंट जनरल रिटायर्ड सैयद अता हुसैन बिहार के नए गवर्नर होंगे. तमिलनाडु के गवर्नर रहे आरेन रवि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल होंगे. लद्दाख के उप राज्यपाल रहे कवीन्द्र गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है. तरनजीत सिंह संधु दिल्ली के उपराज्यपाल होंगे तथा यहां तैनात वीके सक्सेना लद्दाख के उप राज्यपाल होंगे.

राज्यपाल की शक्तियां और कार्य

राज्यपाल राज्य में वही भूमिका निभाता है जो केंद्र में राष्ट्रपति निभाते हैं. बस किसी असमंजस की स्थिति में राज्यपाल अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेज सकते हैं. राज्य सरकार के सभी कार्य राज्यपाल के नाम से किए जाते हैं. वह मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है. वह राज्य विधानसभा का सत्र बुलाता है और उसे भंग कर सकता है. राज्य विधानमंडल द्वारा पारित कोई भी विधेयक राज्यपाल के हस्ताक्षर के बिना कानून नहीं बन सकता. कुछ विशेष परिस्थितियों में राज्यपाल को अपने विवेक से निर्णय लेने का अधिकार है. यदि राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो जाता है, तो राज्यपाल राष्ट्रपति को अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकता है.

राज्यपाल का पद केंद्र और राज्य के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है. जहां एक ओर वह राज्य का संवैधानिक मुखिया होता है, वहीं दूसरी ओर वह केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य करता है.

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