हम पर दुनिया की नजर, एआई की वैश्विक दौड़ में भारत बना बड़ा मैदान

पिछले दिनों नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के अवसर पर मैं भी न्यूयॉर्क सिटी से दिल्ली पहुंची थी। एआई और इन्सानी क्षमता पर केंद्रित एक सत्र में, एक शीर्ष एआई एग्जीक्यूटिव ने दर्शकों, जिनमें अधिकांश स्थानीय भारतीय थे, से पूछा कि उनका चैटजीपीटी का पसंदीदा उपयोग क्या है। दर्शकों का जवाब सुनकर […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 9 मार्च 2026, 07:41 AM 5 मिनट read
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हम पर दुनिया की नजर, एआई की वैश्विक दौड़ में भारत बना बड़ा मैदान
Photo: UB India News Archive

पिछले दिनों नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के अवसर पर मैं भी न्यूयॉर्क सिटी से दिल्ली पहुंची थी। एआई और इन्सानी क्षमता पर केंद्रित एक सत्र में, एक शीर्ष एआई एग्जीक्यूटिव ने दर्शकों, जिनमें अधिकांश स्थानीय भारतीय थे, से पूछा कि उनका चैटजीपीटी का पसंदीदा उपयोग क्या है। दर्शकों का जवाब सुनकर वह खुद हैरान रह गए-उच्च स्तरीय कोडिंग से लेकर ज्योतिष, जीवन सलाह और स्वास्थ्य से जुड़े सवालों तक।

हम सबने सुना है कि चैटजीपीटी हम सबको एक जैसा दिखाता है, और एआई से बना कंटेंट आसानी से पहचाना जा रहा है। लेकिन अगर भारत में चैटजीपीटी के 10 करोड़ साप्ताहिक सक्रिय उपयोगकर्ता एक ऐसे सांस्कृतिक माहौल में हैं, जो पश्चिम से काफी अलग है, तो एआई समय के साथ उस माहौल में कैसे ढलेगा? मेरा अंदाजा है कि मॉडल सुधार करने के लिए खुद को स्थानीय संस्कृति के अनुसार ढाल लेगा और लोग असल में मॉडल का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं, इसके फीडबैक लूप के जरिये उपयोगकर्ताओं की पसंद को समझेगा। एआई और स्थानीय परंपरा का एक शानदार उदाहरण रिलायंस के जियो इंटेलिजेंस पैवेलियन में देखने को मिला, जिसमें पुराने भारतीय महाकाव्य ‘महाभारत’ के पौराणिक किरदारों के एआई-संचालित होलोग्राम दिखाए गए थे। इसमें एआई का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन इसे 2,500 साल पुराने इतिहास से जोड़ा गया था। भारत में एआई बाजार को जीतने की होड़ जारी है।

एआई बनाने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए, भारत एक बहुत बड़ा मौका है। अभी दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, यहां क्लाउड का 5.8 फीसदी इस्तेमाल होता है, जो अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर है। भारत चैटजीपीटी के लिए दूसरा सबसे बड़ा बाजार भी है, जहां देश में 18-24 साल के लोग इस प्लेटफॉर्म के लगभग आधे उपयोगकर्ता आधार हैं। एआई प्रयोगशालाएं पहले से ही इस मौके का फायदा उठाने के लिए काम कर रही हैं। ओपनएआई ने ओपनएआई फॉर इंडिया लॉन्च किया है, जो देश में एआई को बढ़ाने के लिए बड़ी भारतीय कंपनियों के साथ भागीदारी करने की एक पहल है। इसकी शुरुआत भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी टाटा ग्रुप के साथ भागीदारी से हुई है, ताकि 100 मेगावाट की सॉवरेन, एआई-रेडी कंप्यूट क्षमता लगाई जा सके, जिसे एक गीगावाट तक बढ़ाया जा सकता है। ओपनएआई ने इस साल मुंबई और बंगलूरू में नए ऑफिस खोलने की भी घोषणा की। एंथ्रोपिक ने इंफोसिस के भारतीय मुख्यालय के साथ भागीदारी की और अपना पहला बंगलूरू ऑफिस खोला।

बहुभाषी और वॉइस-फर्स्ट मॉडल्स  (बोली जाने वाली भाषा को प्रमुखता) में रुझान, स्थानीय कंपनियों के साथ वितरण साझेदारी, कम देरी और उद्यम अनुमति के लिए भारत के हिसाब से मूल्य निर्धारण और स्थानीय कंप्यूट पर नजर रखें। क्योंकि इसे कुछ ही शहरों में अपनाया गया है और 1.46 अरब की आबादी में अब भी बहुत सारे उपयोगकर्ता बाकी हैं, इसलिए अभी तक कोई विजेता तय नहीं हुआ है। भारत ‘संप्रभु एआई’ बनाना चाहता है, यानी विदेशी प्रदाताओं पर निर्भर रहने के बजाय देश में ही अपनी एआई टेक्नोलॉजी को विकसित और संचालित करने की क्षमता। एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए अदाणी समूह ने अगले दस वर्षों में 250 अरब डॉलर का एआई इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम बनाने का वादा किया है। अदाणी ने 2035 तक नवीकरणीय ऊर्जा से चलने वाले डाटा सेंटरों के लिए 100 अरब डॉलर देने का वादा किया है, और उम्मीद है कि विनिर्माण, सर्वर्स और सॉवरेन क्लाउड सेवाओं में और 150 अरब डॉलर मिलेंगे।

भारत सरकार ने डीप टेक, मैन्युफैक्चरिंग और प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप्स के लिए 10,000 करोड़ रुपये (लगभग 1.1 अरब डॉलर) का स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 बनाया है। इस बीच, घरेलू स्टार्टअप ने मॉडल शिप किया और बड़ी घोषणाएं कीं। सॉफ्टबैंक समर्थित वाइब-कोडिंग स्टार्टअप इमर्जेंट ने लॉन्च के आठ महीने बाद अनुमानित सालाना राजस्व के मामले में 10 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया और चलते-फिरते सॉफ्टवेयर बनाने के लिए एक मोबाइल एप शिप किया। एआई स्टार्टअप सर्वम ने दो ओपन-सोर्स मॉडल जारी किए, एक चैट एप लॉन्च किया और स्मार्ट ग्लास के बारे में बताया।

सरकार द्वारा समर्थित एआई कंसोर्टियम भारतजेन ने एक मॉडल जारी किया, जो 22 भारतीय भाषाओं को समर्थन देता है। सवाल उठता है कि कैसे स्थानीयकरण और सॉवरेन एआई एक साथ आएंगे। जैसे-जैसे मॉडल भारत के हिसाब से बदलेंगे, भारत को जीतने की होड़ में लगे खिलाड़ियों को भी भारत की शर्तों पर खेलना पड़ सकता है: स्थानीय कंप्यूट, स्थानीय भागीदारी, और एआई क्षमता को भारत के अंदर रखने के लिए मुकाबला करना पड़ सकता है।

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