सियासी जंग का आगाज: पूर्वी और दक्षिण भारत में चुनावी परीक्षा के नतीजे तय करेंगे राष्ट्रीय राजनीति की दिशाऔर दशा !……

चार राज्यों-असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु व केरल और एक केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीखों की जो घोषणा की गई है, वह इस मायने में महत्वपूर्ण है कि पिछली बार के मुकाबले इस बार मात्र तीन चरणों में इन सभी राज्यों की 824 विधानसभा सीटों पर मतदान संपन्न करा लिया जाएगा। असम, केरल […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 16 मार्च 2026, 02:21 AM 9 मिनट read
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सियासी जंग का आगाज: पूर्वी और दक्षिण भारत में चुनावी परीक्षा के नतीजे तय करेंगे राष्ट्रीय राजनीति की दिशाऔर दशा !……
Photo: UB India News Archive

चार राज्यों-असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु व केरल और एक केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीखों की जो घोषणा की गई है, वह इस मायने में महत्वपूर्ण है कि पिछली बार के मुकाबले इस बार मात्र तीन चरणों में इन सभी राज्यों की 824 विधानसभा सीटों पर मतदान संपन्न करा लिया जाएगा। असम, केरल और पुदुचेरी में जहां 9 अप्रैल को मतदान होंगे, वहीं तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर 23 अप्रैल एवं पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर एवं दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान कराए जाएंगे। गौरतलब है कि पिछली बार पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में चुनाव हुए थे, लेकिन इस बार दो चरणों में चुनाव संपन्न कराने की घोषणा के साथ चुनाव आयोग ने यह संदेश भी दिया है कि चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की कोई हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी राज्यों में मतगणना चार मई को संपन्न होगी। भर्ती घोटालों व भ्रष्टाचार के मामलों और डेढ़ दशक की सत्ता विरोधी लहर के बीच पश्चिम बंगाल में अपनी प्रतिष्ठा और सत्ता बचाने के लिए जूझ रहीं ममता बनर्जी, जिन्हें पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट से फटकार सुनने को मिली थी, ने चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा से ठीक पहले मतदाताओं को रिझाने के लिए बकाया डीए भुगतान एवं पुरोहितों व मुअज्जिनों के वेतन में 500 रुपये बढ़ोतरी की दो महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। केरल में स्थानीय चुनावों में यूडीएफ की जीत ने कांग्रेस के लिए उम्मीदें बढ़ाई हैं, तो तिरुवनंतपुर नगर निगम में एनडीए के सबसे बड़ा गठबंधन बनकर उभरने से मिले झटके के बाद राज्य में वाम मोर्चे के सामने देश भर में केरल की इकलौती सत्ता बचाने की परीक्षा है। तमिलनाडु में स्टालिन की द्रमुक मजबूत दावेदार है, पर तथ्य यह भी है कि 1971 के बाद से द्रमुक लगातार दूसरी बार कभी सत्ता में नहीं लौटी है। इसके अतिरिक्त, अभिनेता विजय की टीवीके ने समीकरण जटिल कर दिए हैं, जिसका दक्षिणी तमिलनाडु व युवाओं में खासा असर दिख रहा है। असम में हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में भाजपा मजबूत स्थिति में दिख रही है। विपक्षी दलों द्वारा एसआईआर पर उठाए गए सवालों के मद्देनजर चुनाव आयोग ने 100 फीसदी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था कर चुनावों की निष्पक्षता व पारदर्शिता बनाए रखने की भरसक कोशिश की है, ताकि संदेह की गुंजाइश न रहे। अब यह तो चार मई को ही पता चलेगा कि मतदाताओं का समर्थन किस पार्टी या गठबंधन को मिलेगा, पर इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रीय राजनीति के साथ पूर्वी और दक्षिण भारत में राजनीति की दिशा व दशा तो तय करेंगे ही।

पश्चिम बंगाल चुनाव: ममता का चौका या कमल को मौका?

पिछली बार के आठ चरणों के बजाय पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों में चुनावी रणभेरी बजने के बाद फिजा में एक ही सवाल है। मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर छ़िड़े संग्राम के बीच हो रहे चुनाव में ममता बनर्जी जीत का चौका लगाकर इतिहास रचेंगी, या घुसपैठ के दांव में भाजपा को वाकई कमल को खिलाने का मौका लगेगा? भाजपा खराब कानून व्यवस्था, घुसपैठ और ममता सरकार के खिलाफ 15 साल की एंटी इन्कम्बेंसी को मुद्दा बनाकर जीत का ख्वाब देख रही है, तो ममता फिर से मुस्लिमों (28 फीसदी) के ध्रुवीकरण के लिए जी जान से जुटी हैं।

तीन देशों भुटान, नेपाल और बांग्लादेश से घिरे इस राज्य में भाजपा बीते ढाई दशक से कमल खिलाने का सपना पाले हुए है। बीते चुनाव में पार्टी वाम दलों और कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए मुख्य विपक्षी दल बनने में तो कामयाब रही, मगर सत्ता हासिल करने का सपना अधूरा ही रहा। इस बार वह घुसपैठ के कारण जनसांख्किीय बदलाव और भ्रष्टाचार को प्रमुख मुद्दा बनाया है। साथ ही बीते चुनाव से सबक सीखते हुए पाला बदल करने वाले नेताओं की जगह खांटी कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ाने की रणनीति बनाई है।

36 सीटों पर बेहद कड़ा मुकाबला 

राजनीतिक विश्लेषण के अनुसार पिछले चुनाव में लगभग 36 सीटों पर जीत का अंतर 5000 वोट से कम था। इनमें से कई सीटें ऐसी थीं जहां हार-जीत का फैसला कुछ सौ वोटों से हुआ। यही कारण है कि इन सीटों को आगामी चुनाव का सबसे अहम रणक्षेत्र माना जा रहा है। अगर इन सीटों पर थोड़े से वोटों का झुकाव बदलता है तो सत्ता का समीकरण भी बदल सकता है।

उत्तर बंगाल और जंगलमहल पर नजर
भाजपा की रणनीति उत्तर बंगाल और जंगलमहल क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की है। नॉर्थ बंगाल के कूचबिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जैसे जिलों में भाजपा को पिछले चुनाव में अच्छी सफलता मिली थी। वहीं, ममता के नेतृत्व में तृणमूल सरकार सामाजिक और कल्याणकारी योजनाओं के सहारे उतर रही है। तृणमूल का दावा है कि महिलाओं, किसानों और गरीब तबकों के लिए चलाई गई योजनाओं ने उसे मजबूत जनसमर्थन दिलाया है।

फ्रंट फुट पर खेल रहीं ममता
मुस्लिम वोट बैंक को साधे रखने के लिए ममता लगातार फ्रंट फुट पर खेल रही हैं। खासतौर पर एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट, सड़क और संसद में आक्रामक मोर्चा खोलना इसी वोट बैंक को साथ बनाए रखने की रणनीति है। बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा और तृणमूल के बीच मतों का अंतर सात फीसदी रहा है। भाजपा आदिवासी, मतुआ, महिला मतदाताओं को एकजुट कर इस अंतर को पाटना चाहती है। वहीं, राज्य में नेता विपक्ष भाजपा के शुभेंदु अधिकारी घुसपैठ से जुड़े मुद्दे पर बेहद आक्रामक नजर आ रहे हैं।

नए समीकरण पर होगी नजर
यहां जनादेश के लिए मुस्लिम वोट बैंक सबसे अहम है। दशकों तक यह वोट बैंक जिसके साथ रहा, सत्ता उसी के पास रही। इस बार मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम और फुरफुरा शरीफ के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की पार्टी आईएसएफ के बीच गठबंधन की संभावना बन रही है। एआईएमआईएम बिहार के सीमांचल से लगते दिनाजपुर, मालदा, कबीर मुर्शिदाबाद और सिद्दीकी कोलकाता क्षेत्र में तृणमूल के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं।

राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल का चुनाव केवल राज्य की सत्ता तक सीमित नहीं है। यह मुकाबला राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। तारीखों की घोषणा के साथ ही साफ हो गया है कि बंगाल की राजनीति और ज्यादा गरमाने वाली है। बड़ा सवाल यही है कि क्या तृणमूल किला बचा पाएगी या भाजपा पहली बार सत्ता तक पहुंचने में सफल होगी।

पिछला चुनाव-2021  कुल सीट 294
पार्टी              सीट   वोट %
तृणमूल कांग्रेस   215   48
भाजपा                77    38
अन्य                  02    10

विधानसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा

असम, केरल, पुडुचेरी में एक चरण में 9 अप्रैल को वोटिंग होगी. जबकि तमिलनाडु में भी एक ही चरण में 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में वोटिंग होगी. सभी राज्यों के नतीजे 4 मई को आएंगे.

By-Election Date: 6 राज्य की 8 विधनासभा सीटों पर उपचुनाव की भी घोषणा

असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ-साथ कई राज्यों की सीटों पर उपचुनाव भी होंगे. गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और नागालैंड की 8 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी होंगे. गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा में होने वाले उपचुनाव के लिए मतदान 9 अप्रैल को होगी. जबकि महाराष्ट्र और गुजरात की तीन सीटों पर 23 अप्रैल को उपचुनाव का मतदान होगा. इसमें बारामती सीट पर भी उपचुनाव होगा, जहां से पूर्व डिप्टी सीएम अजीत पवार विधायक थे.

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 का पूरा कार्यक्रम
दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु में विधानसभा की कुल 234 सीटें हैं. इन सभी सीटों पर एक चरण में 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. वोटों की गिनती 4 मई को होगी. तमिलनाडु में गजट नोटिफिकेशन 30 मार्च को लागू होगा. नामांकन की आखिरी तारीख 6 अप्रैल है. स्क्रूटनी 7 अप्रैल को होगी. 9 अप्रैल तक नाम वापस लिया जा सकेगा.

बंगाल में दो चरण में चुनाव

बंगाल में दो चरण में चुनाव होंगे. पहले चरण में राज्य के 152 विधानसभा सीटों में 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. जबकि दूसरे चरण में 142 विधानसभा सीटों पर 29 अप्रैल को वोटिंग होगी. वोटों की गिनती 4 मई को सभी 5 राज्यों के साथ ही होगी. मालूम हो कि बंगाल में विधानसभा की कुल सीटें 294 हैं.

असम, केरल, पुडुचेरी में एक चरण में 9 अप्रैल को चुनाव, 4 मई को नतीजे

असम, केरल, पुडुचेरी में एक चरण में 9 अप्रैल को चुनाव, 4 मई को नतीजे

असम की सभी 126 विधानसभा सीटों पर एक चरण में 9 अप्रैल को वोटिंग होगी. वोटों की गिनती 4 मई को सभी 5 राज्यों के साथ होगी. गजट नोटिफिकेशन 16 मार्च को जारी होगा, नामांकन का आखिरी तारीख 23 मार्च होगी.  24 मार्च को स्क्रूटनी तो 26 मार्च तक नामवापसी की डेट है. वोटिंग 9 अप्रैल को होगी.

जानिए किस राज्य में कितने वोटर

  • असम: 2.50 करोड़
  • केरल: 2.70 करोड़
  • पुडुचेरी: 9.44 लाख
  • तमिलनाडु: 5.67 करोड़
  • पश्चिम बंगाल: 6.44 करोड़

 

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