ऐसे समय में, जब संसद की कार्यवाही में बार-बार हंगामे, व्यवधान और निलंबन की घटनाएं इस पवित्र संस्था की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगा रही हों, तब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में सांसदों के निलंबन को वापस लेने पर सहमति बनना एक अत्यंत स्वागतयोग्य और लोकतांत्रिक कदम है। उल्लेखनीय है कि सदन की कार्यवाही में बाधा डालने तथा अध्यक्ष की ओर कागज फेंकने के आरोप में सात कांग्रेस सांसदों व मदुरै से एक सीपीआई(एम) सांसद को बजट सत्र के शेष समय के लिए संसद से निलंबित कर दिया गया था। सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति दर्शाती है कि जटिल से जटिल मुद्दों को भी आपसी बातचीत के जरिये सुलझाया जा सकता है। संसद में आज एक प्रस्ताव लाकर सांसदों का निलंबन 12 बजे खत्म किए जाने की संभावना है। यह प्रस्ताव विपक्ष की ओर से पेश किया जा सकता है, जिसका सत्तापक्ष की ओर से समर्थन किया जाएगा और लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी के बाद निलंबन खत्म होगा। बैठक में यह फैसला भी लिया गया कि सांसद सदन की कार्यवाही के दौरान तख्तियां (प्लेकार्ड) और एआई से तैयार की गई तस्वीरों का इस्तेमाल नहीं करेंगे और सदन की गरिमा बनाए रखेंगे। संसद के सुचारु संचालन और संसदीय परंपराओं की गरिमा को सुनिश्चित करने की दिशा में यह अनिवार्य कदम है। यह इसलिए भी जरूरी था, क्योंकि पिछले कुछ समय से कुछ सांसदों के व्यवहार की वजह से संसदीय प्रक्रियाएं तो बाधित होने ही लगी थीं, संसद की उत्पादकता पर भी गंभीर असर पड़ रहा था। उल्लेखनीय है कि संसद में एक मिनट की कार्यवाही पर करीब ढाई लाख रुपये खर्च होते हैं। हंगामे या बार-बार स्थगन के कारण हर बाधित मिनट सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी है। यह भी सच है कि संसद में अनुशासन बनाए रखना केवल अध्यक्ष या सरकार की नहीं, बल्कि सभी दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है। अगर सरकार विपक्ष की चिंताओं और मांगों को सुनने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं देती, तो इससे असंतोष व टकराव की स्थिति पैदा होती है, लेकिन अगर विपक्ष भी अपनी बात रखने के लिए व्यवधान का रास्ता अपनाता है, तो इससे संसदीय परंपराएं कमजोर ही होती हैं। इसलिए, जरूरी है कि दोनों पक्ष संतुलन और संयम का परिचय दें। सर्वदलीय बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आम सहमति से उम्मीद की जानी चाहिए कि अब सदन की कार्यवाही अनुशासित व गरिमापूर्ण ढंग से चलेगी, जो संसदीय संस्कृति को बचाने के लिए नितांत जरूरी भी है।
संसदीय सद्भाव की ओर: संवाद से सुलझा गतिरोध…
ऐसे समय में, जब संसद की कार्यवाही में बार-बार हंगामे, व्यवधान और निलंबन की घटनाएं इस पवित्र संस्था की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगा रही हों, तब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में सांसदों के निलंबन को वापस लेने पर सहमति बनना एक अत्यंत स्वागतयोग्य और लोकतांत्रिक कदम है। उल्लेखनीय है […]
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