इस्लामोफोबिया’ पर संयुक्त राष्ट्र में चर्चा, भारत ने कहा-हम धर्म के नाम पर हिंसा के खिलाफ, लेकिन एक ही धर्म पर फोकस न करें

संयुक्त राष्ट्र (UN) में इस्लामोफोबिया विरोधी दिवस पर आयोजित महासभा में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को जमकर लताड़ा. पाकिस्तान का नाम लिए बगैर भारत ने ‘इस्लामफोबिया’ को लेकर उस पर निशाना साधा. भारत ने कहा कि हमारा पड़ोसी देश ‘इस्लामफोबिया’ के नाम पर मनगढ़ंत कहानियां बनाता रहा है. जबकि उसके अपने देश में […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 17 मार्च 2026, 07:17 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
इस्लामोफोबिया’ पर संयुक्त राष्ट्र में चर्चा, भारत ने कहा-हम धर्म के नाम पर हिंसा के खिलाफ, लेकिन एक ही धर्म पर फोकस न करें
Photo: UB India News Archive

संयुक्त राष्ट्र (UN) में इस्लामोफोबिया विरोधी दिवस पर आयोजित महासभा में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को जमकर लताड़ा. पाकिस्तान का नाम लिए बगैर भारत ने ‘इस्लामफोबिया’ को लेकर उस पर निशाना साधा. भारत ने कहा कि हमारा पड़ोसी देश ‘इस्लामफोबिया’ के नाम पर मनगढ़ंत कहानियां बनाता रहा है. जबकि उसके अपने देश में अहमदिया समुदाय के खिलाफ क्रूर दमन किया जा रहा है. यही नहीं बेसहारा अफगानों पर वह लगातार अत्याचार कर रहा है. रमजान के पवित्र महीने में उस पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए जा रहे हैं.

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने देश का पक्ष रखते हुए कहा, “हमारा प्रतिनिधिमंडल धर्म के नाम पर होने वाली किसी भी तरह की हिंसा और नफरत की कड़ी निंदा करता है, चाहे वह किसी भी धर्म के नाम पर क्यों न हो. हम एक ऐसे देश के तौर पर जहां दुनिया के लगभग हर बड़े धर्म के मानने वाले शांतिपूर्वक साथ रहते हैं. ऐसे देश के तौर पर जिसने दुनिया के 4 बड़े धर्मों (हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म) को जन्म दिया, हम किसी भी अन्य देश की तुलना में, धार्मिक भेदभाव से मुक्त दुनिया के अन्य देशों के प्रति कहीं अधिक जागरूक है.”

‘हमारे संविधान की धर्मनिरपेक्ष की भावना’
उन्होंने कहा, ” हमारा’सर्व धर्म समभाव’ का दर्शन, जिसका मतलब है सभी धर्मों के प्रति समान आदर. यह हमारे देश की सभ्यतागत जीवन-शैली का हिस्सा है, इसी भावना ने संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना को प्रेरित भी किया है.”

भारत ने यूएन में आगे कहा, “इतिहास हमेशा इस बात का गवाह रहा है कि धर्म का राजनीतिकरण करने से न शिकायतें सुलझती हैं और न ही उनका समाधान होता है. भले ही इरादे कितने भी अच्छे क्यों न हों, ऐसा करने से चुनिंदा और पोलराइजेशन करने वाले नैरेटिव्स को वैधता मिलने का खतरा बना रहता है, आगे चलकर यही चीजें अधिक विभाजन पैदा करती हैं.”

उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र के गठन के पीछे यह भावना था कि यह एक ऐसी संस्था बने जो धर्म, संस्कृति और राजनीति से परे हो. संघ की विश्वसनीयता इसकी सार्वभौमिकता और निष्पक्षता पर टिकी हुई है. इसलिए, हम ऐसे ढांचों के प्रति सावधानी बरतने का अनुरोध करते हैं जो केवल किसी एक धर्म पर ही केंद्रित हों, और जो ‘रिलीजियोफोबिया’ (धर्म-भय) की व्यापक परिघटना के सभी रूपों को संबोधित न करते हों.”

‘अपनी मूल भावना से बना रहे UN’
उन्होंने कहा, “यही कारण है कि साल 1981 का ‘धर्म या विश्वास के आधार पर असहिष्णुता और भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर घोषणापत्र’ (Declaration on the Elimination of All Forms of Intolerance and of Discrimination Based on Religion or Belief remains) — आज भी हमारी नजर में- एक अत्यंत संतुलित और स्थायी दस्तावेज बना हुआ है; यह सभी धर्मों के अनुयायियों के अधिकारों को सुनिश्चित करता है, बिना किसी एक धर्म को खास प्राथमिकता दिए.”

भारत का पक्ष रखते हुए हरीश ने कहा, “शांति और मानवीय गरिमा बनाए रखने के मामले में संयुक्त राष्ट्र का सबसे बड़ा योगदान उसके उन प्रयासों में दिखता है जिनके जरिए वह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखता है, संघर्ष की स्थितियों में स्थायी शांति स्थापित करता है, विकास कार्य और मानवीय सहायता प्रदान करता है, तथा सार्वभौमिक मानवाधिकारों को बढ़ावा देता है, ये सभी चीजें उन लोगों के धर्म की परवाह किए बिना किए जाते हैं जिनकी वह सेवा करता है.”

वो कहते हैं, ‘वैश्विक सार्वजनिक वस्तुएं’ (Global Public Goods)— ठीक सूर्य की रोशनी की तरह, बिना किसी भेदभाव या पक्षपात के, सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध होनी चाहिए. संयुक्त राष्ट्र ने संघर्ष खत्म करने, गरीबी-उन्मूलन और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अथक परिश्रम करके अपनी विश्वसनीयता अर्जित की है. हम संयुक्त राष्ट्र से यह अनुरोध भी करते हैं कि वह अपनी इसी मूल भावना और आदर्शों पर दृढ़तापूर्वक के साथ बना रहे.”

उन्होंने आगे कहा, “संयुक्त राष्ट्र के लिए यह बहुत ही अहम है कि वह ‘धार्मिक पहचान को हथियार बनाने’ और संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए उसका दुरुपयोग करने की लगातार बढ़ती प्रवृत्ति और उससे जुड़े खतरों पर गंभीरतापूर्वक संज्ञान ले, चाहे ऐसा कार्य किसी देश की सरकारी संस्था द्वारा किया जा रहा हो या फिर किसी गैर-सरकारी तत्वों के जरिए.”

भारत ने PAK पर साधा निशाना
किसी देश का नाम लिए बगैर भारत ने अप्रत्यक्ष तौर पर पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा, “हमारा पश्चिमी पड़ोसी देश इस बात का एक ज्वलंत उदाहरण है कि किस तरह से वह अपने ही पड़ोस में ‘इस्लामफोबिया’ के नाम पर मनगढ़ंत कहानियां रचता रहा है. यह सोचना होगा कि इस देश में अहमदिया समुदाय के खिलाफ क्रूर दमन को क्या कहा जाएगा? या फिर बेसहारा अफगानों को बड़े पैमाने पर वापस भेजना, या फिर रमजान के इस पावन महीने में ताबड़तोड़ हवाई बमबारी करना?

भारत में मुसलमानों के हालात पर हरीश ने कहा, “हमारा देश 20 करोड़ से अधिक मुसलमानों का घर है, जो दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी में से एक है. इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC), जिसे हमारे पश्चिमी पड़ोसी ने हमारे खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की लगातार कोशिश की है, उसने हमारे देश पर बार-बार झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाए. हमारे देश के मुसलमान, जिनमें जम्मू-कश्मीर के मुसलमान भी शामिल हैं, अपनी बात रखने के लिए अपने प्रतिनिधि खुद चुनते हैं. यहां जो एकमात्र “फोबिया” (डर) साफ तौर पर दिखाई देता है, वह भारत के उस बहुसांस्कृतिक और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के खिलाफ है. इस तरह की बातें भारत की बुनियादी सोच के खिलाफ हैं.”

इस्लामोफोबिया और भेदभाव पर हो कार्रवाईः UN
इस्लामोफोबिया विरोधी दिवस के अवसर पर भारत ने कहा, “भारत इस अवसर पर एक ऐसी दुनिया के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है जो धार्मिक नफरत और हिंसा के सभी रूपों से मुक्त हो. हम संयुक्त राष्ट्र से यह गुजारिश करते हैं कि वह अपना समय और सीमित संसाधन ऐसे समावेशी समाज बनाने में लगाए, जो समानता, गरिमा और कानून के शासन पर आधारित हों, साथ ही हर धर्म के हर व्यक्ति के लिए हो.”

इस्लामोफोबिया को लेकर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने रविवार को दुनिया भर में मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव और पूर्वाग्रह से लड़ने के लिए और ज्यादा मजबूत कदम उठाने की अपील की. ​​उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि मुसलमानों के खिलाफ नफरत सामाजिक एकता और मानवाधिकारों के लिए लगातार खतरा बनी हुई है. उन्होंने कहा कि दुनिया भर में करीब दो अरब मुसलमान अलग-अलग संस्कृतियों और समाजों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो मानवीय विविधता की समृद्धि को दर्शाते हैं. UN प्रमुख ने इस्लामोफोबिया और भेदभाव पर कड़ी कार्रवाई की भी मांग की.

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰