इंड्स्ट्री की डेफिनेशन क्यों बदलना चाहता है सुप्रीम कोर्ट?

सुप्रीम कोर्ट ने उद्योगों को नए सिरे से परिभाषित करने के लिए उसकी पुरानी डेफिनेशन में बदलाव की बात कही है. इस बदलाव से उद्योग जगत पर क्‍या असर पड़ सकता है और बिजनेस करने वाले इससे किस तरह प्रभावित होंगे, यह सवाल अभी से उद्यमियों के मन में उठने शुरू हो गए हैं. सबसे […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 18 मार्च 2026, 10:20 AM 3 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
इंड्स्ट्री की डेफिनेशन क्यों बदलना चाहता है सुप्रीम कोर्ट?
Photo: UB India News Archive
सुप्रीम कोर्ट ने उद्योगों को नए सिरे से परिभाषित करने के लिए उसकी पुरानी डेफिनेशन में बदलाव की बात कही है. इस बदलाव से उद्योग जगत पर क्‍या असर पड़ सकता है और बिजनेस करने वाले इससे किस तरह प्रभावित होंगे, यह सवाल अभी से उद्यमियों के मन में उठने शुरू हो गए हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कोर्ट को उद्योगों की परिभाषा बदलने की जरूरत ही क्‍यों पड़ी है और पुरानी परिभाषा में ऐसी क्‍या कमी थी, जो आधुनिक उद्योगों को पूरी तरह से जस्टिफाई नहीं कर पा रही है.
सबसे पहले आपको यह बताते हैं कि आखिर देश में उद्योगों की मौजूदा परिभाषा को कब लागू किया गया था. यह बात है साल 1978 की जब सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की बेंच ने Bangalore Water Supply & Sewerage Board बनाम आर. राजप्पा मामले में ‘उद्योग’ की परिभाषा (जो इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947 की धारा 2(जे) में दी गई है) का व्यापक अर्थ बताया था. सुप्रीम कोर्ट की इस व्‍याख्‍या का असर दूर त‍क दिखा और बाद में अस्पतालों से लेकर सरकारी विभागों तक को उद्योग की श्रेणी में शामिल कर लिया गया.
परिभाषा पर उठे सवाल अभी हल नहीं हुए
ऐसा नहीं कि शीर्ष अदालत की ओर से निर्धारित उद्योग की परिभाषा ही आज तक चल रही है. इसमें पहले भी बदलाव किए गए हैं. साल 991 की उदारीकरण नीति के बाद भारत की आर्थिक तस्वीर बदलने लगी, तो इस व्याख्या की व्यापकता पर सवाल उठने लगे. लिहाजा साल 2002 में Bangalore Water Supply के फैसले को State of UP बनाम जय बीर सिंह मामले में चुनौती दी गई. मई 2005 में फिर शीर्ष अदालत की 5 जजों की संविधान पीठ ने इस याचिका को बड़ी बेंच के पास भेज दिया. इसके बाद जनवरी 2017 में इस संदर्भ को उठाया गया, जहां 7 जजों की बेंच ने इसे 9 जजों की बेंच के पास भेजने का निर्देश दिया.
पिछले महीने फिर हुआ मंथन
उद्योग की परिभाषा को लेकर सवालों का हल अभी तक नहीं निकला और फरवरी 2026 में, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले को अंतिम बहस के लिए सूचीबद्ध किया. 17 मार्च से मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, पी.एस. नरसिम्हा, दीपांकर दत्ता, उज्जल भुइयां, एस.सी. शर्मा, जॉयमल्या बागची, आलोक अराधे और विपुल एम. पंचोली की 9 जजों की बेंच दो दिन तक इस मामले की सुनवाई कर रही है. आज यानी 18 मार्च को इस सुनवाई का आखिरी दिन था. हालांकि, अभी तक परिभाषा को लेकर कोई स्‍पष्‍टता सामने नहीं आई है.
क्‍या होगा परिभाषा का असर
इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट (IDA) का मकसद कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करना है. साथ ही उत्पादन और उत्पादकता में बाधा न आए, इसका भी ध्यान रखना है. यह कानून वेतन, काम के घंटे, विवादों के निपटारे, यूनियन बनाने या हड़ताल करने के परिणाम और नौकरी से निकाले जाने या उत्पीड़न से सुरक्षा जैसे मुद्दों को नियंत्रित करता है. सीधे शब्दों में कहें तो उद्योग की परिभाषा तय करती है कि IDA की सुरक्षा, पाबंदियां और नियम किसी संस्था पर लागू होंगे या नहीं. पहले के फैसलों में अलग-अलग राय थी. कुछ ने चैरिटी या कल्याणकारी गतिविधियों को एक्ट से बाहर रखा, तो कुछ ने संगठित श्रम और नियोक्ता के नियंत्रण को अहम माना.
UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰