बंगाल में जंग: ममता ने LPG को मुद्दा बनाया…………

चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने 144 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी कोलकाता के भवानीपुर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। पिछले चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराया था। इसके बाद ममता बनर्जी उपचुनाव में […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 19 मार्च 2026, 06:44 AM 5 मिनट read
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बंगाल में जंग: ममता ने LPG को मुद्दा बनाया…………
Photo: UB India News Archive

चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने 144 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी कोलकाता के भवानीपुर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। पिछले चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराया था। इसके बाद ममता बनर्जी उपचुनाव में भवानीपुर से जीत कर विधानसभा पहुंची।  लेकिन इस बार शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ेंगे यानि ममता अगर इन दोनों में से किसी भी सीट से लड़ती है तो शुभेंदु अधिकारी से ही मुकाबला होगा।

बीजेपी ने अपने तेज़तर्रार नेता दिलीप घोष को खड़गपुर सदर से मैदान में उतारा है जबकि अग्निमित्रा पॉल को आसनसोल दक्षिण से टिकट दिया गया है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का जनाधार बहुत मजबूत है। ममता कई बार साबित कर चुकी हैं कि वह जानती हैं, चुनाव कैसे लड़ा जाता है और कैसे जीता जाता है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि बीजेपी इस चुनाव को हल्के से लेगी। बीजेपी बंगाल में ममता को हराने और सरकार बनाने के लिए लड़ रही है।

पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के संगठन में जो गलतियां हुईं थीं उन्हें इस बार दुरुस्त किया गया है और अगर ममता की ये बात सही है कि SIR में उनके समर्थकों के वोट भारी तादाद में काटे गए हैं तो फिर ममता के लिए सरकार बचाना मुश्किल होगा। लेकिन ममता बनर्जी किसी से कम नहीं हैं। बंगाल में चुनाव तारीखों के ऐलान के साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग पर जबरदस्त हमला बोल दिया।

दरअसल चुनाव आयोग ने बंगाल में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल के आदेश दिए हैं। ममता बनर्जी के करीबी बंगाल के पुलिस महानिदेशक, मुख्य सचिव, गृह सचिव और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर समेत 6 बड़े अफसरों को चुनाव आयोग ने हटा दिया। चुनाव आयोग ने नंदिनी चक्रवर्ती की जगह दुष्यंत नारियाला को नया मुख्य सचिव बनाया है, जगदीश मीणा की जगह संघमित्रा घोष को गृह सचिव नियुक्त किया है, पीयूष पांडेय की जगह सिद्धनाथ गुप्ता को पुलिस महानिदेशक बनाया है और अजय कुमार नंद को कोलकाता का पुलिस आयुक्त बनाया है।

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के आदेश को बंगाल के खिलाफ साजिश बताया। उन्होंने कहा कि हो सकता है चुनाव के दौरान बीजेपी उनपर हमला करवाए और उनकी हत्या की कोशिश करे। लेकिन बीजेपी नेताओं ने चुनाव आयोग के फैसले को बिल्कुल सही बताया। केन्द्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि जिन अफसरों को हटाया गया है, वे ममता बनर्जी के लिए पार्टी वर्कर के तौर पर काम कर रहे थे, इसलिए उनको हटाना जरूरी था।

सुकांत मजूमदार ने कहा कि अभी कई जिलों के DM और SP भी ऐसे हैं जो तृणमूल कांग्रेस के लिए काम करते हैं, इसलिए बीजेपी चुनाव आयोग से उनको भी हटाने की मांग करेगी। कायदे कानून की नजर से देखें तो चुनाव आयोग को पूरा अधिकार है। वह चुनाव के समय किसी भी अफसर को हटा सकता है लेकिन fairplay के हिसाब से देखें तो किसी भी अफसर को हटाने के लिए उसके खिलाफ कोई शिकायत होनी चाहिए।

दूसरी बात, इन अफसरों को हटाए जाने पर इतनी हाय तौबा क्यों ? क्या तृणमूल कांग्रेस ने इन अफसरों को चुनाव में मदद करवाने के लिए रखवाया था? अगर ये आरोप सही है कि ये अफसर तृणमूल कांग्रेस के वर्कर्स  की तरह काम कर रहे थे तो ममता को चुनाव आयोग पर ये आरोप लगाने का क्या हक है कि उसके अफसर बीजेपी के इशारे पर काम करते हैं?

मोटी बात ये है ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि चुनाव आयोग ने चुनाव के समय किसी अफसर को हटाया हो। महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार थी, फिर भी चुनाव से पहले कई बड़े अफसर बदले गए थे। इस बार भी चुनाव आयोग ने तमिलनाडु में चार IPS अफसरों को हटाया, करूर और इरोड समेत चार जिलों के SP बदल दिए, असम में जहां बीजेपी की सरकार है वहां भी पांच जिलों के SSP बदले गए। इसीलिए चुनैव आयोग को दोष देने का कोई कारण नहीं है।

इधर ममता बनर्जी चुनाव का ऐलान होते ही सड़क पर उतर गईं। उन्होंने LPG  सिलेंडर की किल्लत के विरोध में मार्च निकाला। तृणमूल कांग्रेस के नेता ममता के साथ सड़क पर पैदल चले। ममता ने रैली में कहा कि देश में एलपीजी की कोई किल्लत नहीं है, बीजेपी ने जानबूझकर लोगों को परेशान करने के लिए सिलेंडर की सप्लाई कम की है, लेकिन बंगाल के लोग बीजेपी को चुनाव में सबक सिखाएंगे। ममता बनर्जी ने कहा कि लोगों को केन्द्र सरकार के दावे नहीं, बीजेपी के वादे नहीं, गैस के सिलेंडर चाहिए।

ममता बनर्जी जमीन से जुड़ी नेता हैं। वो फ्रंट फुट पर खेलती हैं। रविवार को चुनाव की तारीखों का एलान हुआ और अगले ही दिन ममता सड़क पर उतर गईं। यही बात ममता को दूसरे नेताओं से अलग बनाती है। ममता ने मुद्दा भी LPG सिलेंडर का उठाया, जो सीधे आम जनता से जुड़ा है।

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