जंग के चलते क्रूड दोगुना, 146 डॉलर पहुंचा, पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है…………

मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के चलते इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल (Crude Oil Price) के पार जा चुकी हैं। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले से शुरू हुए संघर्ष के बाद से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में 45 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 20 मार्च 2026, 08:33 AM 10 मिनट read
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जंग के चलते क्रूड दोगुना, 146 डॉलर पहुंचा, पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है…………
Photo: UB India News Archive

मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के चलते इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल (Crude Oil Price) के पार जा चुकी हैं। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले से शुरू हुए संघर्ष के बाद से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में 45 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा देखने को मिल चुका है। मध्य पूर्व में शुरू हुए संघर्ष के बाद से अब तक कई देशों ने अपने यहां पेट्रोल-डीजल के प्राइस 20% तक बढ़ा दिए हैं।।

ईरान की ओर से खाड़ी देशों के एनर्जी ठिकानों पर नए हमलों के बाद आज 19 मार्च को ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल और नेचुरल गैस की कीमतों में 30% तक की तेजी है। जंग शरू होने के बाद से भारत में क्रूड की कीमतें लगभग दोगुनी होकर 146 डॉलर पर पहुंच गई है। इसके बढ़ने से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम 10-15 रुपए बढ़ सकते हैं। भारत इराक, सऊदी अरब, रूस, UAE से तेल खरीदता हैं। इन सभी अलग-अलग तरह के तेलों की कीमतों का जो औसत निकाला जाता है, उसे ही ‘इंडियन बास्केट’ कहते हैं।

कच्चे तेल के तीन बड़े बेंचमार्क

दुनियाभर में कच्चा तेल मुख्य रूप से तीन बड़े बेंचमार्क के आधार पर पहचाना और बेचा जाता है, जिन्हें ब्रेंट, WTI और OPEC बास्केट कहते हैं। ब्रेंट क्रूड उत्तरी सागर (यूरोप) के समुद्री कुओं से निकलता है और दुनिया का दो-तिहाई तेल कारोबार इसी के भाव पर टिका है।

वहीं WTI अमेरिका के जमीनी इलाकों से निकलता है और अपनी शुद्धता के कारण अमेरिकी बाजार का मुख्य मानक है। OPEC बास्केट सऊदी अरब, ईरान और इराक जैसे खाड़ी देशों के संगठन (OPEC) द्वारा उत्पादित अलग-अलग कच्चे तेलों का एक औसत मिश्रण है।

भारत पर होने वाले असर को 2 पॉइंट में समझें…

भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल और 50% से ज्यादा गैस आयात करता है, इसलिए वहां की हर हलचल हमारी जेब और इकोनॉमी पर असर डालती है।

1. पेट्रोल-डीजल और LPG के दाम बढ़ सकते हैं

इंडियन बास्केट के साथ इंटरनेशनल बेचमार्क ब्रेंट क्रूड भी जंग के बाद 73 डॉलर से बढ़कर 114 डॉलर प्रति बैरल पहुंच है। अगर कच्चा तेल इसी स्तर पर बना रहा, तो सरकारी तेल कंपनियों के लिए मौजूदा कीमतों पर पेट्रोल-डीजल और गैस बेचना मुश्किल होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में गैस और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 10 से 15 रुपए तक की बढ़ोतरी की आशंका है।

सरकारी तेल कंपनियों ने फिलहाल अपने मार्जिन को कम करके या घाटा सहकर कीमतों को कंट्रोल में रखा है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में साफ किया है कि भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि इसके बावजूद अगर अगले 1-2 हफ्ते तक क्रूड इसी स्तर पर बना रहता है, तो सरकार के पास दाम बढ़ाने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा।

2. खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो सकती है

कच्चा तेल से सिर्फ पेट्रोल-डीजल नहीं बनता बल्कि पेंट, प्लास्टिक, फर्टिलाइजर और दवाइयों के कच्चे माल में भी इस्तेमाल होता है। डीजल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिससे फल, सब्जी और अनाज के दाम बढ़ेंगे। कुल मिलाकर आम आदमी का बजट बिगड़ जाएगा।

यूरोप में गैस की कीमतें 30% से ज्यादा उछली

ईरान के कतर पर किए गए इस हमले का सबसे ज्यादा असर यूरोप में गैस के दामों पर पड़ा है। यहां मुख्य गैस कॉन्ट्रैक्ट डच TTF बेंचमार्क एक समय करीब 30% तक उछलकर 70 यूरो पर पहुंच गया था। हालांकि अभी यह 16% की तेजी के साथ 63 यूरो के करीब ट्रेड कर रहा है।

ब्रिटेन में गैस की कीमतें 140% तक बढ़ीं

ब्रिटेन में थोक गैस की कीमतें बढ़कर 171.34 पेंस प्रति थर्म ($2.29) पर पहुंच गई हैं। जनवरी 2023 के बाद से कीमतें इस स्तर तक पहले कभी नहीं पहुंची थीं। जंग शुरू होने के बाद ये करीब 140% बढ़ी है। युद्ध से पहले इसकी कीमत 71.13 पेंस प्रति थर्म ($1.33) थी।

क्रूड और गैस के दाम बढ़ने की 2 वजहें

1. कतर का रास लफ्फान प्लांट बंद

ईरान के ड्रोन हमलों में कतर के रास लफ्फान को काफी नुकसान पहुंचा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा LNG हब है और ग्लोबल सप्लाई का करीब पांचवां हिस्सा (20%) यहीं से आता है। हमले के बाद इस प्लांट को फिलहाल बंद कर दिया गया है। इससे सप्लाई रुक गई है।

2. ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना

भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा।

दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।

अमेरिका- पाकिस्तान में 20% तक बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत
मध्य पूर्व में शुरू हुए संघर्ष के बाद से भारत ने अभी तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा नहीं किया है। वहीं, दूसरी ओर इस युद्ध में ईरान के खिलाफ लड़ने वाली दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्तियों अमेरिका अपने यहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों को बढ़ाने से खुद को नहीं रोक पाया। 28 फरवरी के बाद से अमेरिका में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 20 फीसदी तक बढ़ गई हैं।

ईरान में चल रहे संघर्ष का असर भारत के पड़ोसी देशों पर भी पड़ रहा है। पाकिस्तान में भी पेट्रोल और डीजल 20% तक महंगे हो गए हैं। श्रीलंका में फ्यूल की कीमत 8 फीसदी तक बढ़ गई है। चीन भी इससे अछूता नहीं रहा। चीन में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा देखने को मिला है। 10 मार्च को चीन ने पेट्रोल की कीमतों में 3.7 फीसदी बढ़ोतरी की घोषणा की। यह 2022 के बाद से चीन में सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी।

Strait of Hormuz ने बिगाड़ा तेल-गैस का खेल

कच्चे तेल और गैस की सप्लाई में आ रही रुकावट की मुख्य वजह ईरान का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) है। युद्ध शुरू होने के बाद से ही ईरान ने इस पूरे इलाके को फुल कंट्रोल में कर लिया है। अमेरिका और इजरायल ने जैसे ही ईरान की सबसे बड़ी गैस फील्ड साउथ पार्स (South Pars) और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमला करना शुरू किया, ईरान ने भी जबरदस्त पलटवार किया।

ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों के गैस और तेल रिफाइनरी पर जबरदस्त हमला किया। ईरान ने कतर की सबसे अहम गैस सुविधाओं में से एक, रास लफान कॉम्प्लेक्स मिसाइल दागकर हमला किया। इस मिसाइल हमले ने पूरे मध्य-पूर्व और दुनिया के एनर्जी बाजारों में हलचल मचा दी है।

क्रम संख्या देश 23 फरवरी 2026 के रेट 11 मार्च 2026 के रेट बदलाव
1 कंबोडिया $1.11 $1.32 67.81%
2 वियतनाम $0.75 $1.13 49.73%
3 नाइजीरिया $0.59 $0.80 35.02%
4 लाओस $1.34 $1.78 32.94%
5 कनाडा $1.16 $1.30 28.36%
6 पाकिस्तान $0.92 $1.15 24.49%
7 मालदीव $0.87 $1.04 18.54%
8 ऑस्ट्रेलिया $1.11 $1.31 18.23%
9 संयुक्त राज्य अमेरिका $0.87 $1.01 16.55%
10 सिंगापुर $2.16 $2.50 15.69%
11 प्यूर्टो रिको $0.90 $1.02 13.54%
12 जर्मनी $2.08 $2.36 13.30%
13 ग्वाटेमाला $1.04 $1.17 12.90%
14 सेशेल्स $1.34 $1.52 12.89%
15 सिएरा लियोन $1.45 $1.63 12.29%
95-ऑक्टेन (सुपर) पेट्रोल की औसत कीमत, USD प्रति लीटर
स्रोत: Global Petrol Prices | 11 मार्च, 2026 (यह डेटा 11 मार्च 2026 तक का है।)

रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान के इस हमले से कतर की एक बड़ी गैस सुविधा में आग लग गई और उसे ढांचागत नुकसान पहुंचा। इससे यह डर और बढ़ गया है कि अब यह युद्ध सिर्फ सैन्य ठिकानों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह सीधे तौर पर दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए खतरा बन गया है।

भारत कब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों कंट्रोल कर पाएगा?

7 मार्च को सरकार ने 14.2 किलो वाला LPG सिलिंडर की कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी की थी। और 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 115 रुपये तक का इजाफा किया गया था। सरकार ने पीएम उज्जवला योजना के तहत LPG सिलेंडर पर मिलने वाली 300 रुपये की सब्सिडी को जारी रखा है। इस योजना के तहत सिलिंडर रिफिल करने वालों को सिर्फ 12 सिलिंडर रिफिल तक ही सब्सिडी मिलेगी। इससे अधिक रिफिल कराने पर आपको खुद ही पैसा देना होगा। अधिक सिलिंडर रिफिल कराने पर सब्सिडी नहीं मिलेगी।

अब सवाल यह है कि आखिर भारत कब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाएगा? इसका जवाब है कि सरकार अनिश्चितकाल तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों नहीं कंट्रोल कर सकती है। सरकार एक लीटर पर पेट्रोल पर 19.9 रुपये और डीजल पर 15.8 रुपये की एक्साइज ड्यूटी लेती है। कीमतों को कंट्रोल करने के लिए सरकार इसमें कटौती कर सकती है, जिससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर ज्यादा बोझ न बढ़े। वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल तक एक्साइज ड्यूटी कट करके कंट्रोल की जा सकती है। यानी अगर कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल तक जाती है, तो उतने तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों को कंट्रोल किया जा सकता है।

हालांकि, अभी तक सरकार ने एक्साइज ड्यूटी कम करने को लेकर कोई घोषणा नहीं की है। अगर इसी तरह वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार इजाफा होता रहता है तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां इसका भार आम जनता पर कीमतों में इजाफा करके कम कर सकती हैं।

10 डॉलर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर OMC को कितना नुकसान?

इलारा सिक्योरिटीज की एक स्टडी के अनुसार जब भी कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर का इजाफा होगा, तब ऑयल मार्केटिंग कंपनियां को एक लीटर पेट्रोल-डीजल पर 6.3 रुपये का नुकसान होगा। यानी उनके मार्जिन में इतने रुपये की कमी आएगी।

कोविड कॉल में जब कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी, तो पेट्रोल-डीजल के रेट में कमी नहीं की गई थी। उस समय कंपनियों ने प्रॉफिट कमया था। और अब जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं तो ये कंपनियां जनता पर सीधे बोझ नहीं डाल रही हैं। क्योंकि कीमतें कम होने पर इन्होंने प्रॉफिट कमया था।

 

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