सैन्य बलों में IPS बॉस..! क्‍या है CAPF बिल, जिसे राज्‍यसभा में आज पेश करेंगे अमित शाह

गृह मंत्री अमित शाह आज राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक पेश करेंगे. बिल में बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और सीआईएसएफ जैसे अर्धसैनिक बलों में आईजी (IG) और उसके ऊपर के पदों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति ( Deputation) के बारे में नियम तय किए गए हैं. लेकिन आईजी स्तर के अधिकारियों की […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 23 मार्च 2026, 07:38 AM 5 मिनट read
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सैन्य बलों में IPS बॉस..! क्‍या है CAPF बिल, जिसे राज्‍यसभा में आज पेश करेंगे अमित शाह
Photo: UB India News Archive

गृह मंत्री अमित शाह आज राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक पेश करेंगे. बिल में बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और सीआईएसएफ जैसे अर्धसैनिक बलों में आईजी (IG) और उसके ऊपर के पदों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति ( Deputation) के बारे में नियम तय किए गए हैं. लेकिन आईजी स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर पिछले साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि इन पदों पर डेप्युटेशन के जरिए आईपीए अधिकारियों की होने वाली नियुक्तियों में दो साल के भीतर कमी लानी चाहिए, ताकि ज्‍यादा से ज्‍यादा अर्धसैनिक बलों के भीतर से आने वाले अधिकारियों की नियुक्ति हो सके.

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक में हालांकि, सरकार ने आईजी स्तर पर भी 50 फीसदी का अनुपात बनाए रखने का प्रावधान किया है. बिल में कहा गया है कि इस मामले में पहले दिया गया कोर्ट का कोई आदेश हो या समय-समय पर जारी किए गए कोई अन्य आदेश, केंद्र सरकार के पास इस मामले से जुड़े नए नियम बनाने का अधिकार रहेगा.

  • बिल में प्रावधान किया गया है कि इन बलों का मुखिया यानि DG, आईपीएस अधिकारी बनेगा.
  • एडीजी के पद पर कम से कम 67 फीसदी नियुक्ति आईपीएस अधिकारियों की होगी.
  • आईजी स्तर के पदों पर 50 फीसदी नियुक्ति आईपीएस अधिकारियों में से की जाएगी.
  • वर्तमान व्यवस्था में भी DG के पद पर आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति होती है.
  • एडीजी स्तर पर 67 % और आईजी स्तर पर 50% अधिकारियों की नियुक्ति आईपीएस से की जाती है.

CAPF बनाम IPS… ये है पूरा विवाद    

दरअसल, ये पूरा विवाद सीएपीएफ बनाम आईपीएस का है. सीएपीएफ  में दो तरह के अधिकारी होते हैं. पहले- IPS यानी इंडियन पुलिस सर्विस के अधिकारी. इन्हें सरकार डेप्युटेशन पर कुछ समय के लिए सीएपीएफ  में भेजती है. और दूसरे- कैडर अधिकारी जो सीएपीएफ में सीधे भर्ती होते हैं. कैडर अधिकारियों की भर्ती UPSC की ओर से आयोजित CAPF (AC) एग्जाम के जरिए होती है. यह पूरा विवाद CAPF बनाम IPS का है. सीएपीएफ में दो तरह के अधिकारी होते हैं. पहले- IPS यानी इंडियन पुलिस सर्विस के अधिकारी. इन्हें सरकार डेप्युटेशन पर कुछ समय के लिए CAPF में भेजती है. और दूसरे- कैडर अधिकारी जो CAPF में सीधे भर्ती होते हैं. कैडर अधिकारियों की भर्ती UPSC की ओर से आयोजित CAPF (AC) एग्जाम के जरिए होती है.

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प्रमोशन पर पड़ता है असर

इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी जड़ ‘प्रमोशन’ है. एक IPS अधिकारी आमतौर पर 13-14 साल की सेवा में DIG रैंक तक पहुच जाता है. वहीं, CAPF के कैडर अधिकारी को उसी DIG रैंक तक पहुंचने में 25 से 30 साल लग जाते हैं. डेटा के मुताबिक, CRPF और BSF जैसे बलों में लगभग 60% से ज्यादा कैडर अधिकारी असिस्टेंट कमांडेंट (AC) के पद पर भर्ती होने के बाद 10-12 साल तक उसी रैंक पर बने रहते हैं, जबकि IPS इसी दौरान दो प्रमोशन पा चुके होते हैं. प्रमोशन के इंतजार में CAPF के कैडर अधिकारी सालों गुजार देते हैं. कई बार तो कोई प्रमोशन भी नहीं मिलता है. आंकड़े बताते हैं कि CAPF में ‘वॉलेंटियरी रिटायरमेंट’ यानी VRS लेने वाले अधिकारियों की संख्या में पिछले 5 साल में 25% की बढ़ोतरी देखी गई है, जिसका बड़ा कारण प्रमोशन में देरी है. पिछले 3 साल में CAPF के 20 हजार से ज्यादा जवानों और अधिकारियों ने VRS ले लिया है या इस्तीफा दे दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ये फैसला

IPS अधिकारियों की नियुक्ति से CAPF में कैडर अधिकारियों का प्रमोशन लगभग ठहर सा गया. 15-15 सालों से अधिकारी अपने पहले प्रमोशन का इंतजार ही कर रहा है. इससे ये लड़ाई CAPF बनाम IPS की बन गई. इसे लेकर CAPF के कैडर अधिकारियों ने नॉन-फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन (NFFU) और ऑर्गनाइज्ड ग्रुप ‘ए’ सर्विसेज (OGAS) की मांग की थी. NFFU का मतलब ये है कि अगर किसी अधिकारी को पद खाली न होने के कारण प्रमोशन नहीं मिलता है तो उसे उसके बैच के सबसे सीनियर प्रमोटेड अफसर के बराबर सैलरी दी जाती है. 2019 में सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला आया. अब तक CAPF कैडर अधिकारी सेवा शर्तों में सुधार की मांग कर रहे थे. लेकिन 2019 के फैसले के बाद IPS अधिकारियों का रवैया बदल गया. इससे कैडर अधिकारियों की स्थिति और खराब हो गई. फिर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने एक और फैसला दिया और साफ किया कि CAPF एक ‘OGAS’ है. कोर्ट ने आदेश दिया कि शीर्ष पदों पर IPS का कोटा कम किया जाए ताकि कैडर अधिकारियों का मनोबल न गिरे. इस कोटा को सुप्रीम कोर्ट ने 2 साल के अंदर धीरे-धीरे कम करने का आदेश दिया था. कोर्ट का मकसद था कि CAPF के अपने अधिकारियों को ज्यादा मौके मिलें.

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