महिला अफसर सेना में स्थायी कमीशन की हकदार :सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा, ‘आर्मी, नेवी और एयर फोर्स की महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों को स्थायी कमीशन न देना उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था में मौजूद भेदभाव का नतीजा था।’ कोर्ट ने कहा कि महिला अधिकारियों के काम का आकलन इस सोच के साथ किया गया कि उन्हें परमानेंट कमीशन […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 24 मार्च 2026, 08:00 AM 3 मिनट read
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महिला अफसर सेना में स्थायी कमीशन की हकदार :सुप्रीम कोर्ट
Photo: UB India News Archive

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा, ‘आर्मी, नेवी और एयर फोर्स की महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों को स्थायी कमीशन न देना उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था में मौजूद भेदभाव का नतीजा था।’ कोर्ट ने कहा कि महिला अधिकारियों के काम का आकलन इस सोच के साथ किया गया कि उन्हें परमानेंट कमीशन नहीं मिलेगा। जिन महिला अफसरों को गलत या मनमाने मूल्यांकन के कारण कमीशन नहीं मिला, उन्हें अब पूरी पेंशन मिलेगी। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जवल भुईयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि इन अधिकारियों की 20 साल की न्यूनतम सेवा पूरी मानी जाएगी, भले ही वे इससे पहले ही सेवा से बाहर हो गई हों। बेंच ने केंद्र सरकार को आगे के लिए साफ और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाने और मूल्यांकन के सभी नियम पहले से बताने का निर्देश दिया, ताकि भविष्य में भेदभाव न हो।

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक जिन महिला अधिकारियों ने अपनी सेवा से हटाए जाने को लेकर अदालत में चुनौती दी थी, उन्हें 20 साल की सेवा के बराबर पेंशन पाने का हकदार माना जाएगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि सेना में महिलाओं के खिलाफ प्रणालीगत भेदभाव की वजह से उन्हें परमानेंट कमीशन नहीं मिल पाया।

सेना में पुरुषों के एकाधिकार नहीं हो सकता
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सेना में केवल पुरुषों का एकाधिकार नहीं हो सकता। जस्टिस ने साफ किया कि पुरुष अधिकारी यह उम्मीद नहीं कर सकते कि भविष्य के सभी खाली पद केवल उनके लिए ही होंगे। कोर्ट के अनुसार, अवसरों की कमी और गलत तरीके से अयोग्य ठहराए जाने के कारण महिला अधिकारियों की योग्यता और उनके करियर की प्रगति पर बुरा असर पड़ा है।

किन पर लागू होगा यह आदेश?
यह फैसला उन महिला अधिकारियों के लिए एक बार का उपाय के रूप में आया है जो कानूनी लड़ाई के दौरान सेवा से मुक्त हो गई थीं। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह आदेश जेएजी (जज एडवोकेट जनरल) और एईसी (आर्मी एजुकेशन कोर) कैडर की महिला अधिकारियों पर लागू नहीं होगा। साथ ही, कोर्ट ने भविष्य में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए चयन के तरीकों और कट-ऑफ नियमों की समीक्षा करने का भी निर्देश दिया है।

क्या है मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब कई महिला अधिकारी जिनमें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का हिस्सा रहीं अधिकारी भी शामिल थीं, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले स्पष्ट आदेशों के बावजूद केंद्र सरकार और सेना स्थायी कमीशन देने में पुरुषों के मुकाबले उनके साथ भेदभाव कर रही है। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने अब यह महत्वपूर्ण निर्णय दिया है।

 

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