अगर युद्ध जल्दी नहीं थमा तो क्या देश में फिर से लॉकडाउन लगेगा?

भारत ने पश्चिम एशिया युद्ध के बीच तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने के बाद किसी अफरा-तफरी से बचने के लिए बड़ा कदम उठा लिया है। कोरोना जैसी चुनौती के दौरान तैयारियों के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में 7 एम्पॉवर्ड ग्रुप बनाने का ऐलान किया था, जिसका मॉडल बहुत हद तक […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 26 मार्च 2026, 08:30 AM 5 मिनट read
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अगर युद्ध जल्दी नहीं थमा तो क्या देश में फिर से लॉकडाउन लगेगा?
Photo: UB India News Archive

भारत ने पश्चिम एशिया युद्ध के बीच तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने के बाद किसी अफरा-तफरी से बचने के लिए बड़ा कदम उठा लिया है। कोरोना जैसी चुनौती के दौरान तैयारियों के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में 7 एम्पॉवर्ड ग्रुप बनाने का ऐलान किया था, जिसका मॉडल बहुत हद तक कोरोना काल की टीमों जैसा ही होगा। देश में लॉकडाउन जैसे हालात न पैदा हों, भारत ने इसके लिए मजबूत रणनीति बनाकर उस पर अमल करना भी शुरू कर दिया है। वहीं, पाकिस्तान-बांग्लादेश और श्रीलंका इमरजेंसी मोड में चले गए हैं।

कोरोना काल जैसे 7 पावरफुल समूह, तेल कीमतों पर लगाम

  • टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में बताया था कि पश्चिम एशिया संकट से निपटने के लिए सीनियर अफसरों और एक्सपर्ट्स की 7 एम्पॉवर्ड ग्रुप बनाए गए हैं।
  • जो ‘धुरंधर’ टीमें बनाई गईं, उनका मॉडल कोरोना के दौर जैसा बनाया गया है, जो पेट्रोल-डीजल, खाद, नेचुरल गैस, सप्लाई-चेन और महंगाई जैसे खतरों से निपटने के लिए बनाई गई है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थीं।

तीन तरह की स्ट्रैटेजी पर काम करेंगी ये टीमें

  • ये टीमें शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म स्ट्रैटेजी के लिए बनाई गई हैं। यह समूह एनर्जी प्रोडॅक्ट्स के लिए वैकल्पिक आयात सोर्स को भी तलाशेगा।
  • यह समूह घरेलू उपलब्धता पर भी नजर रखेगा और यह किसी बाधा से बचने के लिए कुछ उपायों के बारे में सुझाव भी देगा। साथ ही किसी भी मार्केट में काला बाजारी और जमाखोरी पर लगाम लगाएगा।

युद्ध के संकट में क्या-क्या हो सकता है, एक्सपर्ट्स ने बताया

  • Business viewpoint पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि युद्ध का संकट तेल-गैस की कीमतें और बढ़ सकती हैं। महंगाई बढ़ सकती है। खान-पान की चीजें महंगी हो सकती हैं। सप्लाई में कमी आ सकती है और आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
  • एनर्जी एनालिस्ट आरके शर्मा के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि यह महज एनर्जी का मुद्दा नहीं है, बल्कि व्यापक आर्थिक चुनौती है। अगर सप्लाई लगातार बाधित रहती है तो हर क्षेत्र में महंगाई का दबाव बढ़ता ही जाएगा।

यह कोरोना जैसी स्वास्थ्य इमरजेंसी नहीं, सप्लाई पर फोकस हो

  • भले ही पीएम मोदी ने कोरोना काल जैसा तैयार रहने को कहा हो, मगर कोरोना की तरह कोई लॉकडाउन नहीं लगने जा रहा है। अथॉरिटीज ने साफ किया है कि मौजूदा संकट आर्थिक और जियोपॉलिटकल है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य इमरजेंसी नहीं है।
  • अर्थशास्त्री मीरा अय्यर के मुताबिक, अभी जो हालात हैं, वह सतर्क रहने के हैं, ये खतरे की घंटी नहीं है। यह सप्लाई शॉक है। यह गंभीर हो सकता है, मगर इसके लिए लॉकडाउन लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। महंगाई को रोकने और सप्लाई जारी रखने पर फोकस होना चाहिए।

सप्लाई-चेन बरकरार रखने पर फोकस

  • रिपोर्ट में अधिकारियों ने कहा है कि सरकार इस वक्त सप्लाई-चेन को बरकरार रखने पर फोकस कर रही है। टीमें ईंधन की उपलब्धता को स्थिर रखने और मार्केट में किसी तरह का कोई पैनिक रोकने के लिए काम कर रही हैं।
  • खुद पीएम मोदी ने लोकसभा में बताया है कि देश 27 के बजाय अब 41 देशों से तेल-गैस का आयात कर रहा है। साथ ही 53 मीट्रिक टन ऑयल रिजर्व को बढ़ाकर 65 मीट्रिक टन किया जा रहा है।

रोजमर्रा की लाइफ बाधित न हो, इस पर काम

एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने रिपोर्ट में बताया कि लक्ष्य यह है कि संकट को दूर रखा जाए और रोजमर्रा की लाइफ में कम से कम बाधा पहुंचे, इस पर काम हो रहा है। जो उपाय अपनाए जा रहे हैं, उसका मकसद यही है कि भारत में किसी तरह का एनर्जी लॉकडाउन नहीं लगे।

फिलीपींस में एनर्जी इमरजेंसी, पाकिस्तान-बांग्लादेश मिशन मोड पर

  • फर्स्ट पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, फिलीपींस पहला देश है, जिसने युद्ध के चलते एनर्जी इमरजेंसी लगा दी है। उसने काम के घंटे से लेकर वर्क फ्रॉम होम जैसे उपाय अपनाए हैं। वहीं, पाकिस्तान में भी महंगाई तेजी से पांव पसार रही है। लोग सड़कों पर आ गए हैं।
  • पाकिस्तान में भी सरकारी दफ्तरों में काम के घंटे सीमित किए गए हैं। 4 घंटे तक सीमित किए गए हैं। बांग्लादेश ने पहले ही भारत से कई महीने का डीजल मंगा लिया है। वहां भी ऑनलाइन क्लासेज, सरकार दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम लागू कर दिया गया है। श्रीलंका ने भी कमोबेश ऐसे ही कदम उठाए हैं।
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