ट्रंप ने ईरान में सेना उतार दी तो क्या होगा?

अमेरिका शायद ईरान में वह करने की तैयारी कर रहा है जिसकी कल्पना भी आज से एक महीने पहले ज्यादातर अमेरिकियों ने नहीं की थी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी वक्त ईरान की जमीन पर अपने सैनिक उतार सकते हैं. ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की जंग को लगभग एक महीना हो चुका […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 26 मार्च 2026, 09:09 AM 5 मिनट read
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ट्रंप ने ईरान में सेना उतार दी तो क्या होगा?
Photo: UB India News Archive

अमेरिका शायद ईरान में वह करने की तैयारी कर रहा है जिसकी कल्पना भी आज से एक महीने पहले ज्यादातर अमेरिकियों ने नहीं की थी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी वक्त ईरान की जमीन पर अपने सैनिक उतार सकते हैं. ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की जंग को लगभग एक महीना हो चुका है. ट्रंप जो कुछ चाहते थे, वो पा नहीं सके हैं. भले ईरान के टॉप लीडर्स मारे गए हैं लेकिन इस्लामिक गणराज्य की नींव अभी भी जिंदा है, अभी भी एक सुप्रीम लीडर वहां की कुर्सी पर कायम है. ईरान अभी भी पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिका के साथी देशों पर हमले कर रहा है, उसकी मिसाइलें इजरायल के एयर डिफेंस को भेद रही हैं. होर्मुज में नाकेबंदी है, दुनिया तेल सकंट से गुजर रही है. ऐसे में ट्रंप सेना उतारने के फैसले के करीब हैं.

इस समय अमेरिकी नौसेना के दो मरीन एसॉल्ट जहाज USS ट्रिपोली और USS बॉक्सर पूरी गति से ईरान की ओर बढ़ रहे हैं. अमेरिकी सेना की 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिक इस समय ईरान की ओर जा रहे हैं. अमेरिका के पहले से ही खाड़ी क्षेत्र में लगभग 50,000 सैनिक तैनात हैं. सवाल है कि अगर ट्रंप ने सेना उतारने का आदेश दे दिया तो अमेरिकी सेना कैसे इस ऑपरेशन को अंजाम दे सकती है. इस ऑपरेशन के क्या नतीजे हो सकते हैं. चलिए समझने की कोशिश करते हैं.

यहां ध्यान रहे कि जमीनी सैन्य अभियान बहुत ही जटिल होते हैं और उन्हें सरल बनाना संभव नहीं है. लेकिन यह समझने की कोशिश कर सकते हैं कि एक जमीनी सैन्य अभियान वास्तव में कैसा दिख सकता है.

ईरान की जमीन पर ट्रंप की सेना

स्टेप 1- जमीनी हमला अमेरिका की कई स्पेशल फोर्सेज से शुरू हो सकता है, जैसे डेल्टा फोर्स या सील टीम 6, जो पड़ोसी इराक से हेलीकॉप्टर के जरिए प्रवेश करके ईरान के अंदर गहराई तक घुसें और वहां यूरेनियम के भंडार का पता लगाएं.

स्टेप 2- इसके बाद C-17 भारी विमान लगभग 1500 अमेरिकी सैनिकों को, जो 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हैं, ईरान के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में पैराशूट से उतार सकते हैं, जो ईरान का तेल क्षेत्र है. वे वहां के हवाई अड्डे पर भी कब्जा कर लेते हैं. वह बहुत महत्वपूर्ण हवाई अड्डा है.

स्टेप 3- फिर USS ट्रिपोली जहाज से बड़े पैमाने पर अमेरिकी मरीन हमला करते हैं. यह बड़ा जहाज़ जापान से मरीन सैनिकों को लेकर आ रहा है. वे खार्ग द्वीप पर उतरते हैं और ईरान के तेल निर्यात केंद्र पर नियंत्रण कर लेते हैं. यह युद्ध की शुरुआत से ही अमेरिका का एक बड़ा लक्ष्य रहा है.

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स्टेप 4- इसके बाद अमेरिकी मरीन दूसरे जहाज USS बॉक्सर से एक और हमला करते हैं और ईरान के दक्षिणी हिस्से में स्थित बंदर इमाम खुमैनी बंदरगाह पर कब्जा कर लेते हैं. यह एक बहुत महत्वपूर्ण कार्गो और तेल टर्मिनल है. इससे वहां की आर्थिक गतिविधि पूरी तरह कट सकती है.

स्टेप 5- फिर अमेरिकी विशेष बलों की टीमें फोर्दो सुरंग परिसर पर हमला करती हैं और संभावित रूप से ईरान के यूरेनियम भंडार को खोजती हैं. हमें नहीं पता कि वहां यूरेनियम भंडार है या नहीं, लेकिन मान लेते हैं कि वे उसे ढूंढ लेते हैं और उनपर कब्जा कर लेते हैं.

स्टेप 6- इसके बाद ईरान की जमीनी जवाबी कार्रवाई पूरी ताकत से शुरू होती है. इस दौरान दोनों तरफ मरने वाले सैनिकों की संख्या बढ़ सकती है. यहीं से जमीनी युद्ध वास्तव में बड़े पैमाने पर शुरू होगा.

स्टेप 7- तेज और भीषण लड़ाई होती है, जैसी इराक और अफगानिस्तान में हुई थी, लेकिन उससे भी ज्यादा तीव्र. क्योंकि इराक और अफगानिस्तान के विपरीत, ईरान के पास कहीं बड़ी जमीनी सेना है.

स्टेप 8- अमेरिका की जमीन पर उतरी सेना को अमेरिकी एयरफोर्स का भरपूर समर्थन मिलता है, जिससे संभावित रूप से बड़े पैमाने पर जमीनी हताहत हो सकते हैं और युद्ध और तेज हो सकता है.

खार्ग आइलैंड के सैटेलाइट तस्वीर में तेल टर्मिनल दिख रहे हैं

खार्ग आइलैंड के सैटेलाइट तस्वीर में तेल टर्मिनल दिख रहे हैं

ईरान की जमीन पर सेना उतारने के संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं?

  1. अमेरिका खार्ग द्वीप और ईरान के दक्षिणी तेल क्षेत्र पर कब्जा करने में सफल हो सकता है. इससे ईरान के तेल निर्यात को लगभग पूरी तरह अलग-थलग किया जा सकता है.
  2. शायद हॉर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा पूरी तरह हल नहीं हो. अमेरिका इसके कुछ हिस्सों पर कब्जा कर सकता है, लेकिन ईरान असममित युद्ध रणनीति (जैसे गुरिल्ला वॉर) का इस्तेमाल करके इसके कुछ हिस्सों पर नियंत्रण बनाए रख सकता है.
  3. दोनों पक्षों में भारी सैन्य हताहत होते हैं और ईरान में नागरिक हताहत भी होते हैं.
  4. अमेरिकी सेना सीमित या बड़े पैमाने पर ईरान में फंस सकती है.

फिर से ध्यान रहे कि यह सिर्फ एक संभावित व्यापक परिदृश्य है कि जमीनी सैन्य अभियान कैसा दिख सकता है. इसमें कोई आसान रास्ता नहीं होता. यह कभी भी एक साफ-सुथरा अभियान नहीं हो सकता. ऐसे अभियान कभी भी पूरी तरह सरल नहीं होते और यही युद्ध की सच्चाई है.

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