भारत में बढ़ सकती है महंगाई !

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक बाजार एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव को नजरअंदाज कर रहे हैं। सिस्टमैटिक्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा हालात केवल तात्कालिक उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि वैश्विक परिदृश्य में एक बड़े बदलाव का संकेत हैं, जो आगे चलकर बार-बार उभर सकते हैं और लंबी अवधि तक […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 28 मार्च 2026, 07:31 AM 5 मिनट read
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भारत में बढ़ सकती है महंगाई !
Photo: UB India News Archive

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक बाजार एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव को नजरअंदाज कर रहे हैं। सिस्टमैटिक्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा हालात केवल तात्कालिक उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि वैश्विक परिदृश्य में एक बड़े बदलाव का संकेत हैं, जो आगे चलकर बार-बार उभर सकते हैं और लंबी अवधि तक अनिश्चितता बनाए रख सकते हैं।

वैश्विक बाजार उम्मीद और डर के बीच झूल रहा है

रिपोर्ट के अनुसार, बाजार फिलहाल हर युद्ध से जुड़ी खबर पर उम्मीद और डर के बीच झूल रहे हैं, लेकिन इसके पीछे एक गहरा बदलाव चल रहा है। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में बदलती नीतियां और ईरान की प्रतिक्रिया मिलकर ऐसी स्थिति बना रही हैं, जहां निवेशकों के लिए लंबी अवधि के जोखिमों का आकलन करना मुश्किल हो गया है।

रिपोर्ट ने इसे वैश्विक भू-राजनीतिक ढांचे में एक बड़े मेटामॉर्फोसिस के रूप में बताया है, जिसमें अमेरिका और चीन के नेतृत्व वाले ग्लोबल साउथ के बीच शक्ति संतुलन बदल रहा है। इससे आने वाले समय में इस तरह के तनाव और टकराव बार-बार देखने को मिल सकते हैं।

संकट का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर दिख रहा

आर्थिक मोर्चे पर रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि इस संकट का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास या उससे ऊपर पहुंच चुकी है, जो न सिर्फ सप्लाई से जुड़े जोखिम बल्कि बढ़ते जियोपॉलिटिकल प्रीमियम को भी दर्शाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर तनाव कम भी होता है, तब भी कच्चे तेल और गैस की सप्लाई में बाधाएं बनी रह सकती हैं, जिससे कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।

भारी कर्ज बढ़ा रही चिंता

इसके साथ ही वैश्विक कर्ज भी चिंता का बड़ा कारण बनता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के दौरान वैश्विक कर्ज करीब 29 ट्रिलियन डॉलर बढ़कर 348 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे सरकारों की आर्थिक प्रोत्साहन देने की क्षमता सीमित हो सकती है।

भारत को लेकर क्या आशंका?

भारत को लेकर रिपोर्ट में विशेष रूप से चेतावनी दी गई है कि ऊंचे कच्चे तेल के दाम और कमजोर मांग मिलकर स्टैगफ्लेशन की स्थिति पैदा कर सकते हैं। इससे हाल के आर्थिक सुधारों पर असर पड़ सकता है और घरेलू अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले महीनों में भारत की खुदरा महंगाई दर 6 से 7 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है।

अंत में रिपोर्ट ने कहा है कि मौजूदा हालात अस्थायी नहीं हैं। ऊंचे तेल के दाम, सख्त वित्तीय परिस्थितियां और बार-बार होने वाले भू-राजनीतिक झटके अब वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थायी विशेषताएं बन सकते हैं, जिससे लंबी अवधि तक समायोजन का दौर जारी रह सकता है।

संकट से निपटने को सजग और एकजुट रहना होगा:मोदी

पश्चिम एशिया में उभरते संकट और उसके भारत पर संभावित प्रभाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस बैठक में केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, सतर्कता और दीर्घकालिक (लंबे समय की) तैयारी पर विशेष जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक हालात लगातार बदल रहे हैं और ऐसे समय में भारत को सजग, तैयार और एकजुट रहना होगा। उन्होंने राज्यों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन राज्यों के माध्यम से ही संभव है। इसलिए केंद्र और राज्यों के बीच निरंतर संवाद, सूचना का समय पर आदान-प्रदान और साझा निर्णय प्रक्रिया जरूरी है। प्रधानमंत्री ने बताया कि 3 मार्च से एक अंतर-मंत्रालयी समूह लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और रोजाना समीक्षा के आधार पर जरूरी निर्णय लिए जा रहे हैं।

उर्वरक भंडारण की निगरानी सुनिश्चित करें

कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से खरीफ सीजन की तैयारी पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने उर्वरकों के भंडारण और वितरण की सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े।

सीमा और तटीय राज्यों के लिए विशेष निर्देश

सीमा और तटीय राज्यों के लिए विशेष निर्देश जारी करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे शिपिंग, समुद्री संचालन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति से जुड़े संभावित जोखिमों के प्रति विशेष सतर्कता बरतें। उन्होंने उन राज्यों को, जिनके नागरिक पश्चिम एशिया में कार्यरत हैं, हेल्पलाइन सक्रिय करने, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने और सहायता तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए।

सप्लाई चेन सुचारू रखें, जमाखोरों पर सख्त हों

प्रधानमंत्री ने राज्यों को निर्देश दिए कि वे सप्लाई चेन को सुचारू बनाए रखें और जमाखोरी व मुनाफाखोरी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। उन्होंने राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम सक्रिय करने तथा प्रशासनिक सतर्कता बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि किसी भी प्रकार की आपूर्ति बाधा उत्पन्न न हो सके।

पेट्रोल-डीजल, एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता

मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए कहा कि उनके राज्यों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है।

प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने आगे कहा कि उस कठिन समय में ‘टीम इंडिया’ की तरह एकजुटता दिखाते हुए जिस तरह देश ने सप्लाई चेन, व्यापार और जनजीवन पर पड़े प्रभाव को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया था उसी तरह मौजूदा संकट से भी निपटा जाएगा।

 

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