बंगाल में बवाल: मालदा में मतदाता सूची पर विरोध प्रदर्शन, भवानीपुर में भाजपा-TMC भिड़ंत

सुप्रीम कोर्ट ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों के नौ घंटे के घेरेबंदी को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर कड़ी फटकार लगाई और इसे चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने और अधिकारियों का मनोबल गिराने का “पूर्व नियोजित, सुनियोजित और प्रेरित” प्रयास बताया। मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों द्वारा मतदान सूची के विशेष […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 2 अप्रैल 2026, 10:06 AM 8 मिनट read
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बंगाल में बवाल: मालदा में मतदाता सूची पर विरोध प्रदर्शन, भवानीपुर में भाजपा-TMC भिड़ंत
Photo: UB India News Archive

सुप्रीम कोर्ट ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों के नौ घंटे के घेरेबंदी को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर कड़ी फटकार लगाई और इसे चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने और अधिकारियों का मनोबल गिराने का “पूर्व नियोजित, सुनियोजित और प्रेरित” प्रयास बताया। मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों द्वारा मतदान सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में लगे तीन महिला अधिकारियों सहित सात न्यायिक अधिकारियों को ब्लॉक विकास अधिकारी के कार्यालय में बंधक बना लिया गया। कोर्ट ने उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र बलों की तैनाती का भी आदेश दिया है।

पश्चिम बंगाल के मालदा में गुरुवार सुबह से एक नया विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। इस बार पुराने मालदा ब्लॉक के मंगलबाड़ी इलाके में। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वैध दस्तावेज होने के बावजूद उनके कई नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। गुरुवार को रात में कुछ घंटों के लिए खोले जाने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 12 को फिर से अवरुद्ध कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने टायरों में आग लगा दी और सड़क को बांस से अवरुद्ध कर दिया। स्थिति पर नजर रखने के लिए मालदा पुलिस स्टेशन की पुलिस टीमों और सीएपीएफ के जवानों को नाकाबंदी स्थल पर तैनात किया गया है।

क्यों हो रहा प्रदर्शन?
बुधवार को कालियाचक प्रदर्शन में उठाई गई मांगों को लेकर आज पुराने मालदा ब्लॉक में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सभी वैध दस्तावेज होने के बावजूद मतदाता सूची से उनके नाम हटाए जाने के विरोध में वे प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार सुबह से ही मालदा के विभिन्न इलाकों में लोग अपने नाम हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। राष्ट्रीय राजमार्ग काफी देर तक अवरुद्ध रहा और न्यायिक अधिकारियों को भी घेर लिया गया। बाद में देर रात उन्हें रिहा कर दिया गया।

बुधवार रात को मालदा के कालियाचल में जमा हुई भीड़ सुबह से वहां नजर नहीं आई। लोग सुबह से सड़कों पर निकलने भी लगे हैं। हालांकि, दबा हुआ तनाव अभी भी बरकरार है। गुरुवार सुबह से ही उन इलाकों में पुलिस ने चौकियां लगा रखी हैं, जहां रात में विरोध प्रदर्शन हुए थे। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 12 और मालदा-मोथाबारी राज्य राजमार्ग पर भी कई स्थानों पर पुलिस की चौकियां स्थापित की गई हैं। इलाके में सुबह से ही पुलिस की मौजूदगी साफ तौर पर देखी जा सकती है। पुलिस के मुताबिक, खुफिया शाखा को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मालदा जिले में आज मुख्यमंत्री का रैली
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी आज मालदा जिले के बैष्णवनगर में चुनावी रैली कर रही हैं। इससे पहले, पुराने मालदा ब्लॉक में एक नया विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने पश्चिम बंगाल पुलिस के महानिदेशक से उस घटना पर रिपोर्ट मांगी है, जिसमें मालदा जिले के कालियाचक में मतदाताओं के “तार्किक विसंगति” श्रेणी के तहत वर्गीकृत किए जाने के न्यायिक निर्णय में शामिल सात न्यायिक अधिकारियों, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं, को उन मतदाताओं के एक समूह द्वारा घेर लिया गया और बंधक बना लिया गया, जिनके नाम इस प्रक्रिया में हटा दिए गए थे।

इसके साथ ही बुधवार को सात अधिकारियों को बंधक बना लिया गया था। हालांकि,  गुरुवार को करीब 1 बजे, जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस की एक विशाल टुकड़ी मौके पर पहुंची, प्रदर्शनकारियों को हटाया, न्यायिक अधिकारियों को बचाया और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। लगभग नौ घंटे तक घेराव में रहने के बाद उन्हें छुड़ाया गया। जिले से ऐसी खबरें मिली थीं कि बचाए जाने के बाद सुरक्षित स्थान पर ले जाते समय भी काफिले पर हमला करने का प्रयास किया गया था। न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने के दौरान, प्रदर्शनकारियों के एक अन्य समूह ने मालदा जिले के सुजापुर विधानसभा क्षेत्र के कालियाचक ब्लॉक-I के निकट स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया। प्रशासन प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त करने में सफल रहा कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों को जल्द से जल्द पुनः शामिल करने का प्रयास किया जाएगा, जिसके बाद उन्होंने अवरोध हटा दिया।

बंगाल के मामले पर सीजेआई सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया में तैनात न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई हिंसा और डराने-धमकाने की घटनाओं पर गंभीर रुख अपनाया है। इस मामले पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सख्त टिप्पणी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल के डीएम और पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रवैये पर भी सख्त टिप्पणी की। सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा कि दोनों अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। सात न्यायिक अधिकारियों को नौ घंटे तक बंधक बनाकर रखे जाने का ये मामला बेहद गंभीर है।
बंगाल सरकार को भी लगाई फटकार
उन्होंने कहा कि ये मामला अदालत को चुनौती देने जैसा है। कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार को भी फटकार लगाई। सीजेआई ने कहा कि मालदा में हुई हिंसा की घटना न्यायपालिका पर दबाव बनाने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था को भी चुनौती देने की तरह है। कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने के मामले में सरकार के रवैये को लचर बताया और कहा कि इस मामले में तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की गई।

सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस घटना को न्याय प्रशासन में बाधा डालने की सुनियोजित और दुस्साहसी कोशिश करार दिया। कोर्ट ने कहा कि सात न्यायिक अधिकारियों, जिनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल हैं, को घंटों तक बिना सुरक्षा, भोजन और पानी के छोड़ दिया गया, जबकि राज्य प्रशासन को पहले से सूचना दी गई थी।

बंगाल के वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी
अदालत ने इस मामले में राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों- मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनके रवैये को बेहद निंदनीय बताते हुए पूछा है कि समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। मामले की अगली सुनवाई में संबंधित अधिकारियों की वर्चुअल उपस्थिति अनिवार्य की गई है और उनसे अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी गई है।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती कराए। कोर्ट ने सभी स्थलों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने, आम लोगों की आवाजाही सीमित करने और अधिकारियों और उनके परिवारों को किसी भी खतरे का तत्काल आकलन करने का आदेश दिया है।

जानें कोर्ट ने क्या टिप्पणी की

  1.  न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, यह घटना न केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने का एक घिनौना प्रयास है, बल्कि यह न्यायालय के अधिकार को भी चुनौती देती है।
  2. कोर्ट ने कहा, यह कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और लंबित मामलों में आपत्तियों के निपटारे की चल रही प्रक्रिया को रोकने के लिए सोची-समझी और प्रेरित चाल प्रतीत होती है।
  3. ​यह पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कर्तव्य की अवहेलना को दर्शाता है, और उसके अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि सूचना दिए जाने के बावजूद वे न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने में क्यों विफल रहे।
  4. मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा, रात 11 बजे तक आपका कलेक्टर वहां नहीं था। मुझे रात में बहुत कठोर मौखिक आदेश जारी करने पड़े।
  5. हम किसी को भी कानून अपने हाथ में लेकर गंभीर कर्तव्य निभा रहे न्यायिक अधिकारियों में मनोवैज्ञानिक भय पैदा करने की अनुमति नहीं देंगे। इसके साथ ही पीठ ने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे कृत्य आपराधिक अवमानना ​​के दायरे में आ सकते हैं। इसने राज्य प्रशासन की आपराधिक विफलता की भी आलोचना की।
  6. कोर्ट ने कहा, दुर्भाग्य से आपके राज्य में हर कोई राजनीतिक भाषा बोलता है और यह सबसे अधिक ध्रुवीकृत राज्य है। आप हमें अवलोकन करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
  7. मुख्य न्यायाधीश ने पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल से कहा, क्या आपको लगता है कि हमें पता नहीं है कि उपद्रवी कौन हैं? मैं रात 2 बजे तक सब कुछ निगरानी कर रहा था। बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।
  8. सभी नेताओं को एकजुट होकर इसकी निंदा करनी चाहिए। हम यहां अधिकारियों की रक्षा के लिए मौजूद हैं। उनके आदेश हमारे न्यायालय के आदेश माने जाएंगे।
  9. कोर्ट ने कहा, इसका उद्देश्य जजों  को डराना,आपत्ति-सुनवाई प्रक्रिया को बाधित करना और अदालत के अधिकार को चुनौती देना है  और ये घटना अदालत की आपराधिक अवमानना के दायरे में आती है।
  10. सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों के लिए केंद्रीय बलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया, कोर्ट ने बंगाल  के शीर्ष अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया और कहा कि इस घटना की जांच CBI या NIA से करवाई जाए, प्रारंभिक जांच रिपोर्ट अदालत को सौंपी जाए।
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