क्या 7 दिन बाद चली जाएगी TMC से बागी 20 सांसदों की सांसदी?

तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों से जुड़ा मामला अब और विवादों में गहराता जा रहा है. बागी होने पर क्या फैसला हो इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी से तो जवाब मांगा ही है, इसके साथ ही अब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी इन सभी सांसदों […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 26 अगस्त 2026, 06:14 AM 4 मिनट read
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क्या 7 दिन बाद चली जाएगी TMC से बागी 20 सांसदों की सांसदी?
Photo: UB India News Archive
तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों से जुड़ा मामला अब और विवादों में गहराता जा रहा है. बागी होने पर क्या फैसला हो इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है.  सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी से तो जवाब मांगा ही है, इसके साथ ही अब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी इन सभी सांसदों को नोटिस भेजा है. उनसे सात दिन के भीतर अपना जवाब देने को कहा गया है. इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी लेकर आए थे. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके कहा था कि बागी सांसदों की सदस्यता खत्म कर दीजिए. जिसके बाद अब यह मामले ने और तूल पकड़ लिया है. तो बिना देरी किए समझते हैं सिलसिलेवार पूरी कहानी.

सात दिन में जवाब, फिर क्या होगा?

मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, लोकसभा सचिवालय ने 20 सांसदों को नोटिस जारी कर उनकी टिप्पणियां मांगी हैं. ये नोटिस 25 अगस्त की तारीख के हैं. सांसदों को नोटिस मिलने के सात दिन के भीतर अपना जवाब देना है. कार्रवाई संविधान की दसवीं अनुसूची और सांसदों के दल-बदल से जुड़ी प्रक्रिया के तहत हो रही है. यानी सात दिन की अवधि जवाब देने के लिए है, सांसदी खत्म होने की समय सीमा नहीं. जवाब मिलने के बाद अयोग्यता से जुड़ी कार्यवाही आगे बढ़ेगी. इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि सात दिन पूरे होते ही 20 सांसदों की सदस्यता खत्म हो जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था मामला

TMC नेता और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने 20 सांसदों की अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उनका आरोप था कि स्पीकर के सामने अयोग्यता से जुड़ी याचिकाओं पर फैसला लेने में देरी हो रही है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई की और 20 सांसदों को नोटिस जारी किया. सुप्रीम कोर्ट की पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पीकर की ओर से बताया कि 20 सांसदों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं. इस पर जस्टिस बागची ने साफ कहा कि सवाल केवल नोटिस जारी करने का नहीं, बल्कि कार्यवाही को तय समय सीमा में पूरा करने का है.
यह पूरा विवाद TMC के 20 सांसदों के पार्टी से अलग होकर NCPI के साथ जाने से जुड़ा है. इन सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI के साथ जुड़ने या विलय का दावा किया है. उन्होंने लोकसभा में अलग समूह के तौर पर मान्यता की मांग भी की थी. बाद में उन्हें संसद में NCPI समूह के तौर पर देखा गया और उन्होंने NDA की संसदीय गतिविधियों में हिस्सा लिया है. TMC का कहना है कि ये सभी सांसद पार्टी के चुनाव चिन्ह पर लोकसभा पहुंचे थे. पार्टी के मुताबिक, किसी दूसरे राजनीतिक संगठन के साथ जाना स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ने के बराबर है. इसलिए उन पर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल विरोधी कानून लागू होना चाहिए. दूसरी ओर, बागी सांसदों का पक्ष है कि उनका कदम वैध विलय के तहत आता है.

टीएमसी से बागी सांसदों में कौन-कौन सांसद हैं मामले में?

अयोग्यता की मांग जिन 20 सांसदों के खिलाफ की गई है, उनमें काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, रचना बनर्जी, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, पार्थ भौमिक, अरूप चक्रवर्ती, अधिकारी दीपक देव और सायनी घोष शामिल हैं. इनके अलावा बापी हालदार, मोहम्मद अबू ताहेर खान, कालीपद सरेन खेरवाल, असीत कुमार माल, जून मालिया, मिताली बाग, खलीलुर रहमान, माला रॉय, शर्मिला सरकार और यूसुफ पठान के नाम भी याचिका में हैं.
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