मेरी खामोशी को हार मत समझ लेना………….

आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया है। इस पर राघव चड्ढा ने कहा है कि पार्टी उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। राघव चड्ढा ने वीडियो जारी कर कहा कि वह आम आदमी की आवाज सदन में उठाते थे, इससे किसी को क्या परेशानी […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026, 05:41 AM 6 मिनट read
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मेरी खामोशी को हार मत समझ लेना………….
Photo: UB India News Archive

आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया है। इस पर राघव चड्ढा ने कहा है कि पार्टी उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। राघव चड्ढा ने वीडियो जारी कर कहा कि वह आम आदमी की आवाज सदन में उठाते थे, इससे किसी को क्या परेशानी हो सकती है। आम आदमी को संदेश देते हुए राघव चड्ढा ने कहा, “खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।” राघव ने आप को चुनौती देते हुए कहा कि मेरी खामोशी को मेरी हर ना समझे। मैं वो दरिया हूं, जो सैलाब ला सकता हूं। राघव की ये चुनौती सीधे सीधे अरविंद केजरीवाल के लिए है। क्योंकि ये फैसला अरविंद केजरीवाल का ही था कि राघव चड्ढा को उप नेता पद से हटाया जाए।

राघव ने वीडियो में क्या कहा?

2 मिनट 18 सेकेंड के वीडियो में राघव चड्ढा ने कहा कि वह हमेशा ही सदन में आम लोगों से जुड़े मुद्दे उठाते हैं, लेकिन क्या यह कोई अपराध है। क्योंकि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा  सचिवालय को लिखकर दिया कि राघव चड्ढा को बोलने का समय नहीं दिया जाए। उन्होंने सदन में मोबाइल डेटा, मिडिल क्लास पर टैक्स, एयरपोर्ट पर महंगे खाने और डिलिवरी ब्वॉय का मुद्दा उठाया। इन सभी मुद्दों को लोगों का समर्थन मिला और कई मुद्दों पर लोगों की परेशानियों का समाधान भी हुआ, लेकिन इससे आम आदमी पार्टी को क्या नुकसान हुआ होगा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उन्हें चुप करा दिया है और सदन में उनका बोलने का अधिकार छीन लिया है, उन लोगों के सामने चुनौती है। इसके साथ ही राघव ने शायराना अंदाज में पलटकर आने का वादा भी किया।

राघव चड्ढा ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा ‘ मुझे जब-जब पार्लियामेंट में बोलने का मौका मिलता है, मैं जनता के मुद्दे उठाता हूं. शायद ऐसे टॉपिक उठाता हूं, जिसे आम तौर पर संसद में नहीं उठाया जाता. मगर क्या जनता के मुद्दे उठाना अपराध है क्या, क्या मैंने कोई गुनाह कर दिया. ये सवाल मैं इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि आप ने राज्यसभा के सक्रेटेरियट को कहा है कि राघव चड्ढा को पार्लियामेंट में बोलने का मौका न दिया जाए. अब भला मेरे बोलने पर कोई रोक क्यों लगाना चाहेगा. मैं तो हमेशा देश के आम आदमी की बात करता हूं. मेरे मुद्दों से देश के आम आदमी का तो फायदा हुआ, लेकिन आम आदमी पार्टी का क्या नुकसान हुआ. आप हमेशा मेरा हौसला बढ़ाते हैं. आप मेरा हाथ थामे रेखिएगा. मैं आपसे हूं और आपके लिए हूं. जिन लोगों ने मुझे खामोश किया, उन्हें कहना चाहता हूं, मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है.’

कल भी एक वीडियो से दिया था संदेश
इससे पहले आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था. इसमें उन्होंने सदन में पार्टी के उपनेता के रूप में उठाए गए मुद्दों पर प्रकाश डाला था. राज्यसभा सदस्य ने यह वीडियो उन्हें पद से हटाए जाने के कुछ घंटों बाद पोस्ट किया. उस वीडियो में मध्यम वर्ग पर कर का बोझ, डेटा की समय सीमा समाप्त होने की समस्या, भारत में पितृत्व अवकाश का अधिकार और हवाई अड्डों पर अतिरिक्त सामान के शुल्क जैसे मुद्दों का जिक्र किया गया था.
राघव चड्ढा और आप में दुश्मनी?
दरअसल, राघव चड्ढा पंजाब से राज्यसभा सदस्य हैं. राघव चड्ढा एक समय में ‘आप’ संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी विश्वासपात्र माने जाते थे. मगर बीते कुछ समय से राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच तलवारें खिंच गई हैं. कारण कि राघव चड्ढा को AAP ने राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटाया तो राघव चड्ढा ने भी आप से दुश्मनी के संकेत वीडियो के जरिए दे दिए. इतना ही नहीं, आम आदमी पार्टी का मानना है कि राघव चड्ढा पार्टी का स्टैंड नहीं रख पाते हैं.
कैसे ‘आप’ और राघव में बढ़ती गई दूरी?
  • दरअसल, यह कदम ‘आप’ से जुड़े मामलों पर राघव चड्ढा की लंबे समय से चली आ रही चुप्पी और पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के कई सार्वजनिक कार्यक्रमों से उनकी अनुपस्थिति के बीच उठाया गया है. कभी केजरीवाल के करीबी विश्वासपात्र और देश के सबसे युवा सांसदों में से एक माने जाने वाले चड्ढा ने पार्टी के कार्यों में अहम भूमिका निभाई थी. इसमें खासकर पंजाब और दिल्ली में ‘आप’ के कार्यकाल के दौरान उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही. हालांकि, हाल के महीनों में हालात बदल गए हैं.
  • आबकारी नीति मामले से जुड़े होने के आरोप में मार्च 2024 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय चड्ढा मेडिकल कारणों से विदेश में थे. अरविंद केजरीवाल की लगभग छह महीने की कैद के दौरान चड्ढा देश से बाहर ही रहे और 13 सितंबर 2024 को उनकी रिहाई के कुछ ही दिनों बाद उनसे मिले.
  • दिल्ली की एक अदालत द्वारा आबकारी मामले में केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और ‘आप’ के अन्य नेताओं को पिछले महीने बरी किए जाने पर चड्ढा ने चुप्पी साधे रखी। अदालत से राहत मिलने के बाद केजरीवाल की पत्रकार वार्ता और जंतर-मंतर पर हुई रैली में भी वह शामिल नहीं हुए.
  • पार्टी नेताओं ने दावा किया कि चड्ढा को अन्य राज्यों में पार्टी के चुनाव प्रचार अभियानों और संगठनात्मक कामों से धीरे-धीरे अलग किया जा रहा है. हालांकि वह संसद के भीतर और बाहर मुखर रहे हैं तथा हवाई किराए में बढ़ोतरी और गिग वर्कर्स की स्थिति जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं.
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